मूवी रिव्यू: एक्शन, डांस तथा इमोशन से लबरेज ‘काबिल’

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रेटिंग****

बदला और इमोशन राकेश रौशन की ज्यादातर फिल्मों की विशेषता रही हैं। उनकी ताजा फिल्म ‘काबिल’  में हीरो जिस नये और हैरतजंदा अंदाज में बदला लेता दिखाया गया है जिसके तहत बाद उसे पूरी तरह से दर्शकों का सर्पोट और हमदर्दी हासिल होती है। दूसरे इस बार फिल्म के लेखक निर्देशक संजय गुप्ता राकेश रौशन के अनुभवों को फिल्म में पूरी तरह कैश करने में सफल रहे हैं।

रितिक रौशन एक ऐसा ब्लांइड नौजवान हैं जो अपनी इस कमी के बावजूद वो सारे काम करता है जो एक आम आदमी कर सकता है। पेशे से वो कार्टून फिल्मों का डबिंग आर्टिस्ट है। एक बार उसकी पहचान की महिला उसे यामी गौतम से मिलवाती है, दरअसल यामी भी रितिक की तरह ब्लाईंड है और वो भी किसी पर भी निर्भर न हो खुद पर डिपेंड है। हालांकि वो अपने अंधेपन की वजह से इसलिये शादी नही करना चाहती क्योंकि उसे अपने लिये किसी की दया या हमदर्दी नहीं चाहिये। यहां रितिक अपनी बातों से उसे अपनी तरफ आकर्षित कर लेते है। जल्द दोनों की शादी हो जाती है। उसी मौहल्ले में शेलार बंधू यानि रोनित रॉय, रोहित रॉय रहते हैं। रोहित अपने कारपोरेटर भाई रोनित से मिली शह पर गुडांगिरी करता रहता है इस काम में उसका एक दोस्त भी है। उसकी नजर यामी पर है और एक दिन मौका पाकर वो अपने दोस्त के साथ यामी का रेप कर देता है। लेकिन एक तो पुलिस में कारपोरेटर भाई का प्रभाव, दूसरे उसके खिलाफ कोई सबूत न मिलने पर उसकी हिम्मत और बढ़ जाती है लिहाजा वो एक बार फिर यामी को रेप करने में कामयाब हो जाता है। इस बार यामी सह नहीं पाती और सुसाईट कर लेती है। इसके बाद जब रितिक पुलिस ऑफिसर नरेन्द्र झा से मिलता है लेकिन इस बार वो उससे कोई मदद न मागंते हुये उसे चेलेंज करता है कि अब वो खुद अपनी पत्नि की मौत के जिम्मेदार लोगों से बदला लेगा और पहले की तरह इस बार भी पुलिस चाह कर भी कुछ नहीं कर पायेगी, बिलकुल वैसे ही जैसे वो सुबूतों के अभाव में उसकी बीवी के हत्यारों को नहीं पकड़ पाई। इसके बाद किस प्रकार रितिक एक एक करके उन सभी को मौत के घाट उतारने में सफल होता है जो उसके अपराधी थे और वाकई पुलिस ऑफिसर नरेन्द्र सुबूत न होने के तहत उसे छू तक नहीं पाता।kaabil-story

संजय गुप्ता हमेशा वेस्ट्रन फिल्मों के प्रभाव में रहे हैं बेशक वे एक उम्दा तकनीशियन है लेकिन उनकी फिल्मों की शुरूआत तो प्रभावशाली होती है लेकिन बाद में वे हमेशा गड़बड़ा जाते रहे हैं, लेकिन इस बार चूंकि उन्हें राकेश रौशन जैसे अनुभवी मेकर का साथ मिला लिहाजा इस बार वे हर तरफ से एक चौकस फिल्म बनाने में सफल रहे। रितिक और यामी को उन्होंने एक स्वालंभी जोड़े के तौर पर प्रस्तुत किया है। दोनो बेशक ब्लाइंड हैं लेकिन वे हर वो काम करते हैं जो एक आम आदमी करता है। दोनो नौकरी करते हैं घूमते फिरते है होटल क्लब जाते हैं हाई लाइट कि दोनों डांस भी करते हैं। इसके अलावा जहां यामी पियानो बजाने की मास्टर है वहीं रितिक कार्टून फिल्मों का डबिंग आर्टिस्ट है उसे एक साथ कितनी ही आवाजें निकालने में महारत हासिल है। रितिक और यामी की जोड़ी इतनी खूबसूरत लगी है कि जब यामी के साथ रेप होता है तो इसके बाद भ्रष्ट सब इंसपेक्टर तथा अपने रेपिस्ट भाई को कवर करते कारपोरेटर से दर्शक को पूरी तरह से घृणा हो जाती है। फिर जब हर तरफ से निराश रितिक अपनी पत्नि का बदला खुद लेने का चेलेंज पुलिस स्टेशन में इंसपेक्टर के सामने करते हुये कहते हैं कि आपकी आंखे खुली रहेगी लेकिन आप देख नहीं पायेगें, आपके कान खुले रहेगें लेकिन आप सुन नहीं पायेगें, आपका मुंहू खुला रहेगा लेकिन आप बोल नहीं पायेगें, आप सब कुछ समझेगें लेकिन किसी को समझा नहीं पायेगें। मघ्यांतर से पहले रितिक द्धारा दिये गये इस चेलेंज के बाद दर्शख की जिज्ञासा और बढ़ जाती है। यहां संजय मासूम द्धारा लिखे सटीक संवादो का ही कमाल है जो फिल्म को और ज्यादा प्रभावशाली बना देते हैं। इसके अलावा रितिक और यामी की डांस सीक्वेंस तो कमाल की है ही, उससे कहीं ज्यादा हैरानी अंधे रितिक को ढेर सारी अवाजों के साथ डबिंग करते देख होती है। बाद में अपनी इस योग्यता को वे अपराधियों के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं। संजय गुप्ता के निर्देशन में साफ साफ राकेश रौशन का प्रभाव दिखाई देता है क्योंकि इस तरह के इमोशंस राकेश ही ला सकते हैं। जंहा फिल्म के संवाद कमाल के हैं वहीं कोरियोग्राफर अहमद खान द्धारा रितिक और यामी को डांस करते हुये पैरों का इस्तेमाल कराना बिलकुल नया है। वहीं एक्शन मास्टर श्याम कौशल ने अंधे रितिक से रोमांचक एक्शन करवाया है। बेशक फिल्म की रफ्तार शुरू से आखिर तक धीमी है लेकिन दर्शक को गति से जरा भी शिकायत नहीं होती।kaabil-

काबिल बेशक रितिक की सर्वश्रेष्ठ फिलमों में गिनी जायेगी क्योंकि गुजारिश के बाद एक बार उन्होंने एक अपाहिज शख्स को प्रभावशाली ढंग से जी कर दिखाया है। उनकी एक एक भाव भंगिमा चाहे वो रोमांटिक हो या बदले से तपे शख्स की, दोनों को ही उन्होंने किरदार के भीतर घुस कर जीया है। यामी गौतम ने भी रितिक का पूरा साथ दिया हैं ब्लाइंड महिला को उन्होंने पूरी शिद्धत से जीकर दिखाया है। सबसे बड़ी बात कि रितिक के साथ उनकी जोड़ी बेहद खूबसूरत लगी है। अपराधी प्रवृति के भाईयों के किरदारों में इस बार दोनों भाई रोहित और रोनित रॉय खूब जमे हैं तथा इंसपेक्टर की भूमिका में नरेन्द्र झा ने भी बहुत उम्दा काम किया है। रितिक के दोस्त के रूप में सुरेष मैनन ठीक लगे। राजेष रौशन के संगीत में शीर्षक गीत काबिल हूं तथा हसीनों का दीवाना खूबसूरत बने हैं।

रितिक रौशन के खूबसूरत अभिनय, डांस तथा एक्शन और यामी गौतम के साथ मासूम खूबसूरत जोड़ी दर्शकों को बेहद पंसद आने वाली है।


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Mayapuri

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