‘रिश्ता लिखेंगे हम नया’ में काकी मांसा का ‘दया दरवाजा तोड़ो’ पल !

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प्रसिद्ध मराठी एक्ट्रेस, अदिति देशपांडे पहली बार एक हिंदी शो ‘रिश्ता लिखेंगे हम नया’ में काम कर रही हैं और इस शो में ‘काकी मांसा’ की उनकी भूमिका अपने किरदार में कई रंग लिए हुए है और यह काफी सारगर्भित भी है! एक तरफ, रतन (रोहित सुचांती) के लिए उनके मन में अथाह प्यार और दुलार है लेकिन उसी के साथ, वह दीया (तेजस्वी प्रकाश) से नफरत करती हैं, जिसके लिए वह सोचती हैं कि उसे रतन की जिंदगी की सुरक्षा करने के कपट में इस परिवार पर जबरदस्ती थोप दिया गया है।

इस कहानी के बढ़ने के साथ, दीया परिवार में हर किसी को यह मानने के लिए राजी करके पलटवार करने का नाटक रचती है कि उसके और रतन के बीच प्यार पनप रहा है, जिससे काकी मांसा क्रोधित हो जाती हैं, जो अब दीया से बदला लेना और एक उसे सबक सिखाना चाहती हैं। लेकिन चीजें योजना के अनुसार नहीं होती है क्योंकि काकी मांसा अपने खुद के जाल में ही फंस गई हैं।

‘सीआईडी के दया दरवाजा तोड़’ मोमेंट

दीया से बदला लेने के लिए, काकी मांसा, गुस्से में, उसे जान से मारने की योजना बनाती हैं। तो, वह एक कुल्हाड़ी लेकर दीया के कमरे में जाती हैं और रजाई पर यह सोचकर हमला करती हैं कि दीया उसके अंदर सो रही है। हालांकि, उन्हें जल्द ही यह पता चल जाता है कि दीया कमरे में नहीं है लेकिन तभी दीया कमरे में प्रवेश करने वाली होती है। पकड़ी जाने से बचने के लिए, काकी मांसा छिपने के लिए बाथरूम की ओर भागती हैं लेकिन दुर्भाग्य से दरवाजा अटक जाता है और वे बाहर फंस जाती हैं। अब, भागने की कोई और जगह न होने पर, काकी मांसा ‘सीआईडी के दया दरवाजा तोड़’ मोमेंट से प्रेर​णा लेते हुए उस दरवाजे को तोड़कर खोलने का फैसला लेती हैं और कुल्हाड़ी को जोर से दरवाजे पर मारती हैं और दरवाजा तुरंत ही टूट जाता है!

लेकिन दरवाजा तोड़ना शुरुआत में अदिति के लिए आसान काम नहीं था। यह एक शॉट देने के लिए उन्हें इससे पहले कई दरवाजों को तोड़कर अभ्यास करना पड़ा था!

अदिति कहती हैं, “सच कहूं, तो वह दरवाजा तोड़ना वाकई काफी कठिन काम था। लेकिन मैं इसके अभ्यास का पूरा आनंद लिया। शुरुआत में, मैं ठीक से नहीं कर पाई और यह काफी मजेदार भी था। हालांकि, प्रोडक्शन टीम ने मुझे प्रोत्साहित किया और मुझे सीआईडी में दया के दरवाजा तोड़ने के वीडियोज़ देखने और प्रेरणा लेने के लिए भी कहा! इससे वाकई मदद मिली! (हंसते हुए)। दया को देखने के बाद, मैंने खुद में नई ऊर्जा पाई एवं ज्यादा मेहनत के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया और अंतत: वह दरवाजा तोड़ दिया! सबसे मजेदार पल यह था कि जब मैं यह शॉट ठीक तरह से नहीं कर पाई तो शूट के दौरान सेट पर मौजूद सभी ने ‘दया, दरवाजा तोड़ो’ का नारा लगाना शुरू कर दिया था। लेकिन अंत भला तो सब भला। हम जैसा परफेक्ट शॉट चाहते थे, वह हमें मिल गया! जय हो दया जी की!”

 


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Mayapuri

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