INTERVIEW: आमिर खान की प्यासा में मुझे काम करना है – कल्कि कोचलिन

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लिपिका वर्मा

कल्कि कोचलिन ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहली  फिल्म ’देव डी’, ‘‘द्वारा बेस्ट सहायक अभिनेत्री श्रेणी में फिल्मफेयर अवॉर्ड पाया। उसके बाद, ‘जिन्दगी न मिलेगी दोबारा’ और ‘यह जवानी है दीवानी’ में बतौर कॉमेडी कर यह साबित कर दिया कि वह एक बहुत ही बेहतरीन अभिनेत्री भी है। निर्देशक अनुराग कश्यप  से शादी में असफल होने के बाद कल्कि ने अपने आप को थिएटर से भी जोड़ लिया। हालांकि वह एक थिएटर एक्टर ही है और उनका प्रेम ड्रामा से भी बहुत ज्यादा देखा गया है। ‘‘जी हाँ जब मेरे पास फिल्में नहीं होती है तो मैं अपने कुछ बेरोजकर अभिनेताओ को जोड़ कर थिएटर शुरू कर देती हूँ। मुझे बिना काम के रहना अत्यंत ही खराब लगता है। लेकिन करने के लिए और भी बहुत कुछ है जीवन में  तो थिएटर प्लेस निर्देशित कर एवं उसमें अभिनेत्री बन कर बहुत खुशी मिलती है। और इस तरह हम अपने शिल्प क्राफ्ट से जुड़े रहते हैं। ’’

पेश है कल्कि के साथ लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश –

मंत्रा में आप का किरदार क्या है ?

फिल्म ‘मंत्रा’ में मेरे किरदार का नाम है प्रिया कपूर जो एक शेफ है। लेकिन अपने माता-पिता के उलझे हुए रिश्तों से परेशान है। मेरे पिता के किरदार में रजत कपूर हैं जो एक मजबूत बिजनेस मैन तो हैं लेकिन अच्छे पिता और पति नहीं हैं। मेरा किरदार आज के जमाने के वर्किंग मिडल क्लास, स्वतंत्र और आर्थिक रूप से मजबूत लड़की का है जो पारिवारिक भावुक रिश्तों की वजह से भीतर से टूटी हुई है। मिडल क्लास की सोसाइटी की ऐसी लड़की जो आर्थिक रूप से मजबूत तो है लेकिन पारिवारिक इमोशनल रिश्तों को लेकर बेहद उलझी है। डोमेस्टिक वॉयलंस, अपनी आजादी और अधिकार के लिए लड़ने वाला किरदार है।kalki-koechlin

बॉलीवुड में लगभग कितने वर्ष हो गए है , क्या कहना है अपने सफर के बारे में? आर्ट और कमर्शियल फिल्म्स को लेकर लोगों की घटना को हाईलाइट करें?

‘अब मैंने बॉलीवुड में लगभग 10 साल से ज्यादा वक्त बिता लिया है। पहले मेरे लिए यह जगह नई थी तो मैं अपनी इमेज को लेकर चिन्तित थी, सोचती थी कि यह इंडस्ट्री मेरे बारे में क्या सोच रही होगी ? लेकिन, अब मैं रिलैक्स हो गई हूं। जहां तक बॉलीवुड का सवाल है यह  बहुत गणित पूर्ण कैलकुलेटेड, बिजनेस है जिसकी कई परते (लेयर्स) जहां पर एक एक्टर को उसके बॉक्स ऑफिस में कलैक्शन करने के आधार पर तोला जाता। बॉलिवुड  एक इंडस्ट्री लगती है। मुझे लगता है बॉलीवुड में आर्ट सिनेमा को तवज्जो मिलने में अभी और ज्यादा वक्त लगेगा। जब तक इंडस्ट्री में -फिल्म से ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की धारणा नहीं बदलेगी  तब तक आर्ट सिनेमा को मजबूती और तवज्जो नहीं मिलेगा।  यही नजरिया है जो आर्ट और कमर्शियल फिल्म्स को दो भागों में बांटता है। आर्ट फिल्मों का स्ट्रगल हमेशा से रहा है यदि इन फिल्मों का स्ट्रगल नहीं होता तो वह कमर्शियल फिल्में बन जातीं।

आप ऐसी कौन-सी बायोपिक में काम करना चाहेंगी ?

जी हां, मुझे भी बायॉपिक में काम करना है, मैं हमेशा से ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार निभाना चाहती रही हूं। अगर बॉलीवुड में कभी भी , ‘सिस्टर निवेदिता’ की जिंदगी पर फिल्म बनेगी तो उसकी कास्टिंग में मेरे अलावा कोई और होगा नहीं (हंसते हुए) क्योंकि, ‘सिस्टर निवेदिता’ -इंग्लिश वुमन का किरदार है। वह स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होकर भारत शिफ्ट हो गई थीं। बाद में उन्होंने भारत में कई स्थानों पर स्कूलों का सेटअप भी किया । ‘सिस्टर निवेदिता ’ ने बहुत सी किताबें भी लिखी थीं। मैंने उनकी किताबों को खूब पढ़ा है, क्योंकि मेरी मां, ‘सिस्टर निवेदिता’ की बहुत बड़ी प्रसंशक  रही  हैं। और मैं उनकी बहुत बड़ी फैन भी हूँ।kalki koechline

पुराने जमाने की कोई फिल्म का रीमेक हो  तो आप कौन सी फिल्म में काम करना चाहेंगी? आपकी पसंदीदा पुरानी फिल्म कौन सी है?

मैं गुरुदत्त और वहीदा रहमान की फिल्म ‘प्यासा’ के रीमेक में काम करना चाहती हूं। मुझे लगता है कि हमें ‘प्यासा’ का रीमेक जरूर बनाना चाहिए ताकि एक बार फिर से लोग एक बेहतरीन कहानी देख पाएं वह भी नए अंदाज के साथ। ‘प्यासा’ एक बहुत खूबसूरत, लवली, सिंपल और ब्रिलियंट  फिल्म है, उसके सभी गाने भी बहुत सुरीले और सार्थक मीनिंगफुल, हैं। ‘प्यासा’ की कहानी में प्यार, इमोशन और मानवता का खूबसूरत ताना-बाना है।

आप शायद नहीं जानती कि आमिर खान ने प्यासाबनाने की इच्छा भी जताई थी ?

जी नहीं मुझे इस बात का ज्ञान नहीं है ,मैंने यह मीडिया रिपोर्ट्स नहीं पढ़ी है। आप अगर आमिर खान से मिलें तो कहियेगा कि – जब भी वह ‘प्यासा’ बनाएं मुझे उस फिल्म में जरूर कास्ट करें।

Aamir khan, Kalki Koechlin
Aamir khan, Kalki Koechlin

फिल्म प्यासायदि रीमेक हो तो क्या बदलाव लाना चाहेंगी इस नई प्यासामें आप?

अगर ‘प्यासा’ का रीमेक बनें तो मैं कोई भी बदलाव नहीं देखना चाहूंगी। फिल्म के सारे गाने वैसे ही रहने चाहिए। अगर कोई बदलाव  करना ही हो तो बस इस बात का ध्यान रखा जाए की फिल्म आज के परिस्थिति को ध्यान में रख कर बनाई जाए। दुर्भाग्य से पिछले पचास सालों में परिस्थियों में कोई खास बदलाव तो नहीं आया हैं। लोगों का नजरिया लगभग वैसा ही है जैसा पचास साल पहले था। बदलाव करके इस फिल्म को खराब नहीं करना चाहिए। यह उस जमाने की एक क्लासिक फिल्म है भाई !!

स्वतन्त्रता के क्या मायने है आपके लिए ? सोशल मीडिया एवम ट्रॉल्लिंग के बारे में क्या विचार है आपका?

जब भी कोई नई आजादी मिलती है तो उसके साथ ही बहुत सी जिम्मेदारी भी होती है। ऐसा ही कुछ सोशल मीडिया के साथ है जहां किसी को भी, कभी भी और कहीं भी अपनी बात कहने की आजादी हैं लेकिन सच बात तो यह है हम यह जानते ही नहीं हैं कि सोशल मीडिया की जिम्मेदारी का इस्तेमाल कैसे करना है। ट्विटर और फेसबुक में लिखने और बताने के लिए लोगों के पास दिन में 20 चीजें हैं। यह प्लेटफोर्म लोगों की पर्सनल आवाज के लिए है यह आपको सोचना है कि- आपको कौन सी निजी बातें करनी हैं। मैं सोशल मीडिया को इंजॉय करती हूं। जब कभी मुझे ट्रोल किया जाता है तो मैं उसे हंसी-मजाक में लेती हूं और उसी अंदाज में जवाब भी देती हूं। वैसे तो ट्रोललिंग  जैसी चीजें कभी न खत्म होने वाली चीजें हैं। मैं ट्विटर में होने वाली अपनी आलोचना से सीखने का काम करती हूं और बाद में यही सीखी हुई चीजें अपने एक्टिंग में इस्तेमाल करती हूं जिसे ज्यादा से ज्यादा लोग देखने आते।kalki-koechlin

क्या आप निर्देशन की बागडोर को भी संभाल सकती हैं ?

मैं जल्द ही कोई कहानी लिखूंगी जिसमें खुद को कास्ट कर सकूं। मेरा निर्देशन में जाने का कोई प्लान नहीं है।

आपकी आगे आने वाली फिल्मों के बारे में कुछ बतायें?

इन दिनों मैं राखी शांडिल्य की फिल्म में काम कर रही हूं जिसकी शूटिंग इस समय चल रही है। फिल्म में मेरे साथ सुमित व्यास भी अहम् भूमिका में हैं। इसकी कहानी वर्तमान समय के एक परिवार की है जिसमें दिखाया जाएगा कि आज के समय में कैसे बच्चों को बड़ा किया जाए और कॉर्पोरेट की दुनिया में कैसे खुद को स्टेब्लिश रखा जाए और कैसे पारिवारिक और कामकाजी जिंदगी को बैलेंस किया जाए। साथ ही एक ‘स्मोक’ नाम की वेब सीरीज पर भी काम कर रही हूं।

लिपिका वर्मा


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