कामना पाठक को है कई भाषाओं का ज्ञान

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कामना पाठक

ऐसा माना जाता है कि अलग-अलग तरह की भाषाएं बोलना विभिन्न प्रकार के लोगों और उनकी संस्कृति को जानने का सबसे अच्छा तरीका है। दिलचस्प बात यह है कि टेलीविजन अभिनेत्री, कामना पाठक- जोकि -एंड टीवी पर ‘राजेश’ उर्फ ‘हप्पू की उलटन पलटन’ की ‘रज्जो’ की भूमिका निभाने के लिये जानी जाती हैं, उनका मानना है कि केवल सामान्य क्लास ले लेना ही नई भाषा सीखने का तरीका नहीं है। अलग-अलग भाषाओं में बात करके भी कोई इसे सीख सकता है। केवल बातचीत करना ही लोगों से जुड़ने का सबसे अच्छा तरीका नहीं है, बल्कि उनकी भाषा बोलना उनके और करीब ला देता है। कामना को एक या दो भाषाओं में नहीं बल्कि 8 क्षेत्रीय भाषाओं में महारत हासिल है! जी हां, आपने बिलकुल सही सुना!

कामना ने थियेटर से अपने ऐक्टिंग कॅरियर की शुरुआत की है और जल्द ही यंग सोनाक्षी सिन्हा का खिताब पाकर, टेलीविजन का रुख कर लिया। इसका श्रेय जाता है अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा से उनकी मिलती-जुलती शक्ल को। थोड़े ही समय में कामना ने दबंग दुल्हनिया के रूप में दर्शकों के दिलों में अपनी एक खास जगह बना ली। इस शो में वह बेहतरीन बुंदेलखंडी बोलती हैं। इंदौर की रहने वाली, कामना अपनी मातृभाषा के अलावा अवधी, भोजपुरी, ब्रज भाषा, छत्तीसगढ़ी, हरियणवी, बघेली, बंगाली, पंजाबी जैसी भाषाएं भी बोलना जानती हैं। इसके साथ ही वह थोड़ी-बहुत गुजराती भी बोल लेती हैं। यदि यह आपको हैरान करने के लिये काफी नहीं हैं तो यह जान लें कि कुछ उर्दू नाटकों में काम करने की वजह से कामना थोड़ी-बहुत उर्दू समझती हैं भी हैं और बोल भी सकती हैं!

इतनी आसानी से अलग-अलग भाषाएं सीखने और उन्हें बोलने की अपनी काबिलियत के बारे में वह कहती हैं, ‘‘मेरी मां हमेशा मुझसे कहती थीं कि ‘भाषा ताकत होती है’। इस बात को ध्यान में रखकर मैंने कभी भी भाषा के महत्व को कमतर नहीं समझा। मैं कभी भी नई भाषा सीखने से पीछे नहीं हटी और मैं हमेशा ही इन खूबियों की आभारी रही हूं, जिसने मेरी जिंदगी को बेहतर बनाया है। मुझे यह समझ में आया कि कुछ प्रोफेशन में कई सारी भाषाएं बोलने वालों को दूसरों की तुलना में ज्यादा तवज्जो दी जाती है, लेकिन अभी भी मेरा मानना है कि अपनी मानसिक क्षमताओं को बढ़ाने से किसी को भी कई रूपों में फायदा पहुंचता है और इससे ज्यादा से ज्यादा तथा अलग-अलग तरह के लोगों तक पहुंच पाते हैं।’’

आगे अपनी बात रखते हुए वह कहती हैं, ‘‘थियेटर ने मेरी जिंदगी में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है, जिसने मुझे विभिन्न भाषाओं, उनकी बारीकियों और बोलने के तरीकों को सीखने में मदद की।  मैं भाषा बोलने के अंदाज को बहुत ही जल्दी समझती हूं और सीख जाती हूं। यही वजह है कि मैं अलग-अलग क्षेत्र की भाषओं के किरदार में आसानी से ढल जाती हूं।’’ हमें कामना से सीखने की जरूरत है!

देखिये, कामना का बुंदेलखंडी स्वैग ‘हप्पू की उलटन पलटन’ में हर सोमवार से शुक्रवार, रात 10 बजे, केवल -एंड टीवी पर

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Mayapuri

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