थलाइवी की शूटिंग के दौरान मेरी लाइफ में भी पॉलिटिकल कॉमेडी चल रही थी – कंगना

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यूं तो हर पॉलिटिकल पर्सन को पहली नज़र में लोग भ्रष्ट और कामचोर ही मानकर चलते हैं। लेकिन कुछ गिने चुने जनप्रिय नेता ऐसे भी हुए हैं जिनकी न सिर्फ तारीफ हुई है बल्कि उन्हें भगवान से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है। इनमें सबसे बड़ा नाम तमिलनाडु की पहली महिला मुख्यमंत्री जयललिता का आता है। उनके जीतेजी जनता की उनके प्रति मुहब्बत और समर्पण ऐसा था कि जो भगवान के लिए होता है। वहीं उनके जाने के बाद भी लोगों के मन से उनके लिए इज़्ज़त कम नहीं हुई बल्कि बढ़ी ही है। – सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’

बीते कुछ समय से बॉलीवुड में बायोपिक बनाने का जुनून सवार है। इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए कंगना रनौत फिल्म थलाईवी के साथ 23 अप्रैल को हाज़िर होने वाली हैं। तमिल शब्द थलाईवा का हिन्दी अर्थ होता है ‘बॉस’, उस हिसाब से थलाईवी का अर्थ लेडी बॉस है जो जयललिता तो थीं हीं, साथ साथ कंगना अपनी रियल लाइफ में भी हैं।  23 मार्च को कंगना के जन्मदिवस पर इस फिल्म का ट्रैलर लॉन्च किया गया और कंगना ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर फिल्म से जुड़ी कुछ बेहद मज़ेदार बातें मीडिया के साथ शेयर कीं।

कंगना पीले रंग की साड़ी में, बड़े-बड़े झुमके पहने और गजरा लगाए किसी महारानी से कम नहीं लग रही थीं। उनकी एंट्री बुईक सुपर सरीखी ओपन कार में हुई। आते ही कंगना ने सबसे पहले मीडिया का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ सब कोरोना से डरे हुए हैं वहीं हमारे हौसले के साथ मीडिया ने भी यहाँ अच्छी तादाद में आकर हमारे कंधे से कंधा मिलाया है। हालाँकि यहाँ हर तरह की सावधानी के साथ ही ये प्रेस रिलीज हो रहा है, फिर भी मीडिया पर्सन्स के सपोर्ट के लिए वह तालियों के हकदार हैं।

इसके बाद उन्होंने फिल्म की क्रिएटिव प्रडूसर ब्रिन्दा प्रसाद को धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि ब्रिन्दा की बदौलत ही ये फिल्म वजूद में या सकी, ये इन्हीं का आइडिया था। इसके बाद उन्होंने बताया कि इस फिल्म को पूरा करना कितना बड़ा टास्क था जो इस फिल्म के राइटर केवी विजेंद्र प्रसाद के बिना नामुमकिन था। विजेंद्र के साथ कंगना पहले मणिकर्णिका में काम कर चुकी थीं। विजेंद्र प्रसाद पहले ही बजरंगी भाईजान, बाहुबली सीरीज और रजांना सरीखी फिल्मों के लेखक होकर कई अवार्ड्स जीत चुके हैं। कंगना ने आगे कहा कि इस फिल्म की शूटिंग 2019 में ही शुरु हो रही थी लेकिन फिर पेंडमिक आया और उनकी ज़िंदगी में ‘राजनीतिक कॉमेडी’ भी शुरु हो गई।

ब्रिन्दा प्रसाद

महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के साथ हुई सोशल मीडिया जंग को याद करते हुए कंगना मुसकुराते हुए उसे अपनी ज़िंदगी की राजनीतिक कॉमेडी का नाम देती नज़र आई। उन्होंने बताया कि कैसे वो एक तरफ रियल लाइफ में राजनीति झेल रही होती थीं और दूसरी तरफ फिल्म के सेट पर भी उन्हें संसद के दृश्य या पॉलिटिकल रैली के सीन करने होते थे जिसकी वजह से उनकी ज़िंदगी की ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन, दोनों तरफ राजनीति चल रही थी।

कंगना ने इसे भी माँ जयललिता का आशीर्वाद बताया। उन्होंने माना कि शायद माँ कहीं बैठी ये चाहती थीं कि मैं उनका कैरेक्टर निभाते वक़्त असल राजनीति के भी मायने समझूँ। उन्होंने ये भी माना कि वो तो सिर्फ एक कैरेक्टर, जयललिता का पात्र लेकर उनकी लाइफ को बस उधार लेकर शूट कर रही थीं लेकिन माँ जयललिता ने वाकई वो ज़िंदगी जी है। इतनी मुसीबतों और उतार-चढ़ाव से भरे जीवन को वाकई कितनी मुश्किलों से उन्होंने जिया और फिर लोगों के लिए अपनी सेवा भी दी, ये सोच कंगना ने कहा कि वो ज़िंदगी भर उनकी कर्ज़दार रहेंगी।

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय जयललिता जी

सवाल उनके लुक्स को लेकर हुआ तो कंगना पहले हँस दीं। फिर मुसकुराते हुए ही बोलीं कि मुझे लगा था सबसे पहला सवाल होगा कि किसी तमिलियन पॉलिटिकल कैरेक्टर के लिए नॉर्थ इंडियन को क्यों लिया गया? ऐसा ही मणिकर्णिका के वक़्त भी हुआ था कि पहला अब्जेक्शन यही था कि कोई मराठी लड़की क्यों नहीं ली गई? लेकिन इस ट्रैलर (थलाईवी) को देखकर सब तरफ से तारीफ हुई। किसी ने ये न कहा कि
“नॉर्थ इंडियन को साउथ इंडियन क्यों बना दिया। इसका श्रेय भी केवी विजेंद्र प्रसाद सर को जाता है, जो मेरे गुरु भी हैं। उन्होंने ही सबसे पहले मुझे इस रोल के लिए सजेस्ट किया था और मैं सच बताऊँ तो मुझे खुद बहुत अजीब लग रहा था कि मैं कैसे करूंगी। पर उन्होंने जो आदेश दिया मैंने उसमें हामी भर दी। फिर हम लुक टेस्ट के लिए अमेरिका गए। मेरी फेस शेप लॉंग है, मेरी जॉ लाइन भी बिल्कुल अलग है और माँ जयललिता का फेस शेप बिल्कुल अलग था। मैं बिल्कुल ओपॉजिट लगती थी और इस बात से हमारे डायरेक्टर विजय जी बिल्कुल खुश नहीं थे। फिर हमने यूएस जाकर बहुत से टेस्ट किए। उसी दौरान मैं उनकी फिल्में भी देखती रही और धीरे-धीरे अपना वजन बढ़ाने लगी।

एक रोज़ रेयलाइज़ हुआ और सबने कहा भी कि मैं बिल्कुल जयललिता माँ जैसी लग रही थी। ये भी शायद उनका आशीर्वाद ही था कि इतने सारे नेगेटिव विचारों के आने के बाद भी हम उस फिल्म से जुड़े रहे और एक समय आकर मैंने वाकई उनके जैसी लुक अपना ली।”

अपनी हर बात को खुले अंदाज़ में, बेखौफ कहने वाले कंगना रनौत के आने पर तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत हुआ था और उसी तरह उनकी स्टेटमेंट खत्म होने पर ईवेंट तालियों की आवाज़ से गूंज उठा। कंगना रनौत आने वाली फिल्म थलाईवी में दमदार तो नज़र आ ही रही हैं, ये तो हम ट्रैलर देखकर ही जान गए हैं लेकिन ये फिल्म कितनी दमदार होगी और सिनेमाघरों पर कितनी कामयाब होगी, ये हम 23 अप्रैल 2021 को, रिलीज के बाद देखेंगे।

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Mayapuri