करणी सेना ने फिर बोला धावा, अक्षय कुमार की फिल्म ”पृथ्वीराज” की घेराबंदी !

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नहीं हो पाएगी पृथ्वीराज चौहान पर बनी फिल्म रिलीज? – शरद राय
एकबार फिर करणी सेना ने एक बॉलीवुड फिल्म पर हमला बोला है। फ़िल्म है- अभिनेता अक्षय कुमार की “पृथ्वीराज”। निर्माता आदित्य चोपड़ा (YRF) और लेखक निर्देशक चंद्र प्रकाश द्विवेदी की इस फ़िल्म के डिस्ट्रीब्यूटर हैं- यशराज फिल्म्स। अक्षय कुमार ने फ़िल्म में पृथ्वीराज चौहान की भूमिका निभाई है। फ़िल्म 5 नवम्बर 2021 को रिलीज  होनी है जिसका प्रोमो टीजर आते ही करनी सेना एक्शन में आगई है। करणी सेना  के मुम्बई अध्यक्ष श्री दिलीप राजपूत ने फिल्म प्रदर्शन ना करने दिया जाए, इसके लिए बृहनमुम्बई पोलिस आयुक्त श्री परमबीर सिंह और उपायुक्त जोन-9 श्री अभिषेक त्रिमुखे के दफ्तर में शिकायत दर्ज कराया है। आइए, पढ़ते हैं कि इनकी शिकायत में क्या लिखा है-
सेवा में
श्री परमबीर सिंह (भा. पु. से)
पुलिस आयुक्त
बृहन्मुम्बई पुलिस
उचित कार्यवाही के लिए अग्रेषित
श्री अभिशेष त्रिमुखे (भा.पु.से)
पुलिस उपायुक्त – जॉन ९
बृहन्मुम्बई पुलिस
विषय : भावनाओं को आहात करने के जुर्म में “पृथ्वीराज” फिल्म के निर्माता यशराज फिल्म्स के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने हेतु तथा डिजिटल प्लेटफार्म पर किये जा रहे फिल्म के प्रोमो के प्रसारण पर तत्काल बंद करने हेतु प्रार्थना पत्र।
माननीय महोदय,
महान पराक्रमी योद्धा, दिल्ली के सिंहासन पर बैठनेवाले आखिरी हिन्दू सम्राट, राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान के जीवनी पर आधारित एक फिल्म का निर्माण यश राज फिल्म्स द्वारा किया जा रहा है. इस फिल्म के निर्माता यश राज फिल्म्स है, निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा मुख्य किरदार अक्षय कुमार निभा रहे है. निर्माणाधीन फिल्म का नाम “पृथ्वीराज” रखा गया है. उच्च प्रतिष्ठित सम्राट, राष्ट्र गौरव, भारत भूमि के वीर योद्धा पर बन रही इस फिल्म को “पृथ्वीराज” नाम देना आधा अधूरा और असम्मानजनक है. इस तरह से संबोधन करोड़ों के दिलों को ठेस पहुंचाने वाला है. भावनाओं को आहात करने वाला है. निश्चित रूप से डिजिटल प्लेटफार्म पर जारी इस फिल्म के प्रोमोशन हमारे भावनाओं को ठेस पहुंचा रही है. सम्राट के प्रति हमारी आस्था को आहात करने में सक्षम है.
महोदय, इस से पहले भी कई महान हस्तियों के जीवनी पर फिल्मे बन चुकी है. किसी भी निर्माता -निर्देशक ने इस तरह का दुस्साहस न करते हुए फिल्म को उचित नाम , सम्मान और न्याय दिया है. इस पात्र के साथ हम एक सूची दे रहे है जिसमे कुछ फिल्मों के नाम है. महोदय, इस तरह से फिल्म को आधा अधूरा, पहला नाम देकर निर्माता ने समुदाय को जानबूझ कर उकसाने का काम किया है. निर्माताओं ने शीर्षक के प्रति अपनी संकीर्ण मानसिकता का प्रदर्शन किया है, इसलिए कहानी और पटकथा पर भी संदेह है कि उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और कथा को छेड़छाड़ और विकृत किया हो सकता है।
महोदय, सवाल यह उठता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान जैसे विशाल और विराट व्यक्तिमत्व पर सही फिल्म बनाने वाले की सोच इतनी संकीर्ण कैसे हो सकती है ? महान योद्धा राजा, सम्राट पृथ्वीराज चौहान भले ही भगवान नहीं हो, परन्तु यही परम सत्य है कि हमारे मंदिरों में जो देवी – देवता विराजमान है वह उनके ही कारण हैं।अपनी वीरता के लिए जाने जाने वाले, पृथ्वीराज चौहान को एक बहादुर भारतीय राजा के रूप में सराहा जाता है, जो मुस्लिम शासकों के आक्रमण के खिलाफ खड़े थे। उन्हें व्यापक रूप से एक योद्धा राजा के रूप में जाना जाता है और उन्हें मुस्लिम आक्रमणकारियों का विरोध करने का श्रेय दिया जाता है। अगर कोई इस तरह से हमारे अभिमान का अनादर या अपमान करता है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महोदय, करणी सेना, फिल्म निर्माताओं से अपेक्षा करती है कि वे इस विषय पर व्यापक शोध करें, यह सुनिश्चित करे कि वे किसी की भावनाओं को आहात तो नहीं पहुंचा रहे या इतिहास की गलत व्याख्या तो नहीं कर रहे है.  करणी  सेना ने विनम्रतापूर्वक स्क्रिप्ट साझा करने के लिए कहा है ताकि हमारे इतिहासकारों की टीम उसे सत्यापित कर सके। दुर्भाग्य से निर्माता – निर्देशक स्क्रिप्ट का निरीक्षण साझा करने या देने के लिए तैयार नहीं हैं। उस परिस्थिति में, हमने अपनी आशंका का समाधान करने हेतु फिल्म के निर्माता से लिखित आश्वासन के लिए कहा है. वे लिखित में दे कि फिल्म में इतिहास के साथ कोइ छेड़-छाड़ नहीं की गयी है न ही गलत दर्शाया गया है या फिल्म की पटकथा विकृत नहीं है।
          महोदय, ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म के निर्माता सकारात्मक रूप से सहयोग या प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके द्वारा हम यह बताना चाहेंगे कि उनके लिए यह एक फिल्म हो सकती है, लेकिन हमारे लिए धरती सुपुत्र पृथ्वीराज चौहान एक विरासत, आदर्श, प्रेरणा और सम्मान है। राष्ट्र गौरव पृथ्वीराज चौहान की जीवनी सौदे की चीज नहीं है, महिमा और कदसे समझौता नहीं किया जा सकता है। निर्माता के लिए यह शुद्ध मनोरंजन तथा धन संचय का साधन  हो सकता है लेकिन हमारे लिए सम्राट पृथ्वीराज चौहान हमारा गौरव है।
राष्ट्र गौरव पृथ्वीराज चौहान के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पहला शब्द हास्यास्पद जैसा कुछ है। निर्माता और निर्देशक ने जान बूझकर ऐसा किया है.  उनका यह आचरण विशेष वर्ग की भावनाओं को अपमानित करने और अपमान करने के लिए दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रेरित है।
हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप उक्त शिकायत का संज्ञान लें और हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए निर्माता यश राज फिल्म्स के विरूद्ध भा. दं , वि. की धारा 153 और 295 ए के तहत कानून सम्मत कार्रवाई  करे । यह विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया जाता है।
          यदि प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाती है, तो विरोध को उच्चतम संभव स्तर पर ले जाया जाएगा।
स्थान : मुंबई
दिनांक: 15-02-2021
दिलीप राजपूत
अध्यक्ष
श्री राजपूत करणी सेना, मुम्बई
               ..जो भी विवाद फिल्म “पृथ्वीराज” को लेकर हो सकता है, वो आगे के कुछ दिनों में नज़र आएगा।यह पहली बार नही है जब रिलीज से पहले किसी फिल्म को लेकर बवाल उठे या स्व घोषित धर्म- ध्वजारोही करणी सेना ने पहली बार विवाद खड़ा किया हो! इसके पहले फिल्म ‘पद्मावत’, ‘मणिकर्णिका’, वेब सीरीज ‘आश्रम’और ‘तांडव’ भी सुर्खियों  में रहे हैं। विवाद का लाभ भी निर्माता को पहुंचा है। संक्षेप में, हम यही कहेंगे कि फिल्म को मनोरंज  के दायरे में ही रखना चाहिए। जिसतरह हम  फटेंसी फिल्मे दिमाग घर पर छोड़कर देखते हैं, वैसे ही ऐतिहासिक और धार्मिक फिल्मो को भी देखें तो अच्छा! निर्माता और विरोधियों  के बीच की खिचड़ी में हाथ डालने की बजाय होनेवाले किसी भी उपद्रव से बचें, इसी में राष्ट्र का भला है।और, राजपूत राजा पृथ्वीराज का इतिहास बतानेवाला ग्रंथ ‘पृथ्वीराज रासो’ भी यही कहता है।

क्या थी कहानी वीर योद्धा व सम्राट पृथ्वीराज चौहान की?

*मत चूको चौहान*

वसन्त पंचमी का शौर्य

*चार बांस, चौबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण!*
*ता उपर सुल्तान है, चूको मत चौहान!!*

वसंत पंचमी का दिन हमें “हिन्दशिरोमणि पृथ्वीराज चौहान” की भी याद दिलाता है। उन्होंने विदेशी इस्लामिक आक्रमणकारी मोहम्मद गौरी को 16 बार पराजित किया और उदारता दिखाते हुए हर बार जीवित छोड़ दिया, पर जब सत्रहवीं बार वे पराजित हुए, तो मोहम्मद गौरी ने उन्हें नहीं छोड़ा। वह उन्हें अपने साथ बंदी बनाकर काबुल अफगानिस्तान ले गया और वहाँ उनकी आंखें फोड़ दीं।

पृथ्वीराज का राजकवि चन्द बरदाई पृथ्वीराज से मिलने के लिए काबुल पहुंचा। वहां पर कैद खाने में पृथ्वीराज की दयनीय हालत देखकर चंद्रवरदाई के हृदय को गहरा आघात लगा और उसने गौरी से बदला लेने की योजना बनाई।

चंद्रवरदाई ने गौरी को बताया कि हमारे राजा एक प्रतापी सम्राट हैं और इन्हें शब्दभेदी बाण (आवाज की दिशा में लक्ष्य को भेदनाद्ध चलाने में पारंगत हैं, यदि आप चाहें तो इनके शब्दभेदी बाण से लोहे के सात तवे बेधने का प्रदर्शन आप स्वयं भी देख सकते हैं।

इस पर गौरी तैयार हो गया और उसके राज्य में सभी प्रमुख ओहदेदारों को इस कार्यक्रम को देखने हेतु आमंत्रित किया।

पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पहले ही इस पूरे कार्यक्रम की गुप्त मंत्रणा कर ली थी कि उन्हें क्या करना है। निश्चित तिथि को दरबार लगा और गौरी एक ऊंचे स्थान पर अपने मंत्रियों के साथ बैठ गया।

चंद्रवरदाई के निर्देशानुसार लोहे के सात बड़े-बड़े तवे निश्चित दिशा और दूरी पर लगवाए गए। चूँकि पृथ्वीराज की आँखे निकाल दी गई थी और वे अंधे थे, अतः उनको कैद एवं बेड़ियों से आजाद कर बैठने के निश्चित स्थान पर लाया गया और उनके हाथों में धनुष बाण थमाया गया।

इसके बाद चंद्रवरदाई ने पृथ्वीराज के वीर गाथाओं का गुणगान करते हुए बिरूदावली गाई तथा गौरी के बैठने के स्थान को इस प्रकार चिन्हित कर पृथ्वीराज को अवगत करवाया

‘‘चार बांस, चैबीस गज, अंगुल अष्ठ प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, चूको मत चौहान।।’’

अर्थात् चार बांस, चैबीस गज और आठ अंगुल जितनी दूरी के ऊपर सुल्तान बैठा है, इसलिए चौहान चूकना नहीं, अपने लक्ष्य को हासिल करो।

इस संदेश से पृथ्वीराज को गौरी की वास्तविक स्थिति का
आंकलन हो गया। तब चंद्रवरदाई ने गौरी से कहा कि पृथ्वीराज आपके बंदी हैं, इसलिए आप इन्हें आदेश दें, तब ही यह आपकी आज्ञा प्राप्त कर अपने शब्द भेदी बाण का प्रदर्शन करेंगे।

इस पर ज्यों ही गौरी ने पृथ्वीराज को प्रदर्शन की आज्ञा का आदेश दिया, पृथ्वीराज को गौरी की दिशा मालूम हो गई और उन्होंने तुरन्त बिना एक पल की भी देरी किये अपने एक ही बाण से गौरी को मार गिराया।

गौरी उपर्युक्त कथित ऊंचाई से नीचे गिरा और उसके प्राण पंखेरू उड़ गए। चारों और भगदड़ और हा-हाकार मच गया, इस बीच पृथ्वीराज और चंद्रवरदाई ने पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार एक-दूसरे को
कटार मार कर अपने प्राण त्याग दिये।

*”आत्मबलिदान की यह घटना भी 1192 ई. वसंत पंचमी वाले दिन ही हुई थी।”*

*ये गौरवगाथा अपने बच्चों को अवश्य सुनाए*     


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Mayapuri

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