लड़की हो तो बेबो जैसी..! चच्चा फिल्मी

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kareenaचच्चा फिल्मी के घर में जाकर मुझे पता लगा कि उनकी दीवारों, ट्रकों और अलमारियों पर कपूर परिवार की लाडली बेबो का कब्जा हो चुका है। जहां देखो करीना कपूर की मैगजीन से काटी फोटो लेवी से चिपकी नजर आती हैं।

“क्या बात है चच्चा, बेबो के इतने दीवाने हो, यह तो मुझे मालूम ही ना था ?” मैं उनके तकिए पर चिपकी करीना को गर्मागर्म फोटो देखकर फुसफुसाया।

“दीवाना.. अरे मियां.. मैं इस छौरी का बचपन से फैन हूं। जब मैं स्कूल की टूटी दीवार फांद कर, सवा रुपये की टिकट लेकर, अजंता सिनेमा के सबसे आगे वाले रौ में फिल्म देखा करता था तब से मेरा दिल, जिगर, गुर्दा सब बेबो का दिवाना गया था।“ चच्चा अपनी दम तौड़ती उखड़ी सांसो को इकट्ठा करके पिनपिनाए।

“चच्चा अल्लाह को जान देनी है। कुछ तो खौफ खाओ.. कहां तुम 80 साल की आखिरी सीढ़ी पर झूल रहे हो और कहां उसने अभी तीस बसंत भी नही देखें हे। तुम्हारे बचपन में तो वो क्या उसकी मां भी पैदा नही हुई थी।“ मैनें चच्चा की फड़फड़ाती रग पर नमक छिड़का।

“लाहौल विला कुव्वत.. मेरी उम्र पर मत जाना राइटर.. दिल की कोई उम्र नही होती। दिल जवान तो चच्चा महान.. अरे करीना जैसा कोई मियां नहीं है मियां.. वो तो मैं था जो कलेजे पर वुलडोजर रख कर सैफ को दिया। वर्ना आज वो तुम्हारी चौथी चच्ची जान होती। पूरा कपूर परिवार मेरे को पसंद करता था। वो तो शर्मिला ने कहा कि सैफ के हाथ पर ‘’करीना’’ खुद गया है सो मैनें यह कुर्बानी दे दी।“ चच्चा पैरों तले आये चीटें की तरह फड़फड़ा के बिलबिलाए।

“चच्चा, कैसी बातें करते हो? शर्मिला टैगोर तुम्हें कब से जानने लगी ?” मैं हकबका के बोला।

“लो कर लो बात.. अरे तुम्हें याद नहीं क्या.. अमर प्रेम में मेरी किश्ती उधार लेकर उसमें बैठ कर उसने और राजेश खन्ना ने गाना गाया था। चिंगारी कोई भड़के.. तब से हम दोनों में दोस्ती की चिंगारी भड़की थी पर वो पुरानी बात थी। मैं भूल गया पर वो नही भूली। उसी दोस्ती का वास्ता देकर करीना का हाथ मांग लिया। अब क्या करूं.. तुम्हारे चच्चा का दिल ही ऐसा है.. ना नहीं कहा जाता।“ चच्चा आंखे बंद करके करीना की अलमारी पर लगी फोटो देखते देखते वो सपनों में खो गये।

मैं सोचने लगा कि चच्चा फिल्मी जैसे कितने लोग है जो अपनी हसरतों और कल्पनाओं की खुशफहमी में ही जीते रहते है। बस ख्याली ताना बाना बुन कर जिंदगी को घसीटते रहते हैं। सपने जिंदगी में आने चाहिए पर यदि जिंदगी सपनों की होकर रह जाये तो फिर तो अल्लाह ही मालिक है।

                                                                          (लेखक हरविन्द्र मांकड़)

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