दूर दूर से होली का रस लेती कैटरीना

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कैटरीना को खूब भाता है होली के धूम धड़ाके लेकिन जब खुद उन्हें होली खेलने का न्योता मिलता है तो वह भीगने भिगोने से साफ बचती हुई नज़र आती है, वह कहती है, ‘‘मुझे यह कलरफुल फेस्टिवल बहुत अच्छी लगती है लेकिन दूर दूर से। जब मैं खुले आसमान के नीचे रंगों से नहाये नर नारियों को टोलियों में होली खेलते देखती हूँ तो अदभुत नजारा लगता है, मैं खूब एन्जॉय करती हूँ लेकिन जब मेरे दोस्त लोग मुझ पर रंग डालने के लिए दौड़े आते हैं तो मैं चींखती हुई इधर उधर भागती बचती हूँ। बचपन में मैंने कभी होली नहीं खेली ना देखी है।

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भारत में अब सेटल होने के बाद होली का आनन्द उठा रही हूँ।’’ होली के बहाने जो लोग गन्दा खेल खेलते हैं, छेड़खानी करते हैं, छुपकर बलून फेंकते हैं या एसिड, कोलतार तथा हानिकारक कैमिकल उछालते हैं उनको होली का दुश्मन बताते हुए कैटरीना कहती है, ‘‘ऐसे लोगों के कारण खूबसूरत होली बदसूरत बन जाती है और खेल का मंजर मातम का माहौल बन जाता है। कैटरीना मायापुरी के पाठकों को सेफ होली खेलने की गुजारिश करती है।


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Mayapuri

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