INTERVIEW: अपनी  माँ के कंधे पर सर रख कर दुःख दर्द मिटाने का बहुत आनंद आता  है – कैटरीना कैफ

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लिपिका वर्मा

कैटरीना कैफ ने बॉलीवुड में लगभग 10 साल पूरे कर लिए है। भले ही उनकी पहली फिल्म, “बूम” से उन्हें कुछ फायदा नहीं हुआ हो ,किन्तु धीरे धीरे  कैटरीना ने फ़िल्मी दुनिया में बखूबी अपने पैर जमा लिए है। कैटरीना अपने आप को लकी मानती है और यह भी मानती है कि हो सकता है कुछ पिछली फिल्मों में उन्होंने काम को प्राथमिकता न दी हो, किन्तु फिर भी उनकी फिल्मों को पसन्द किया है उनके फैंस द्वारा । यह उनके लिए बहुत बड़ी बात है। किन्तु अतीत  में यदि कैटरीना ने दिल से कोई निर्णय लिया हो जो उल्टा पड़  गया हो-तब भी इस बात का कोई गम नहीं है उन्हें।

पेश है लिपिका वर्मा के साथ कैटरीना कैफ की  बातचीत के कुछ अंश

फिल्म बार बार देखो की कहानी के बारे में क्या कहना है आपको?

इस फिल्म की कहानी  से चाहे वह महिला हो या फिर पुरुष हर किसी के जीवन से जुडी घटना का होने का एहसास इन्हें भी हो सकता है।  अपने जीवन  में हर कोई उतार और चढ़ाव  से गुजर कर ही आगे बढ़ता है। सो इस फिल्म में भी अभिनय करते समय कहानी में जो उतार  चढ़ाव  नजर आएगा वह पल हर किसी के दिल को छू  जायेगा।katrina

इस फिल्म में क्या कुछ देखने को मिलेगा?

फिल्म में एक हीरो एवं हीरोइन के  चरित्र चित्रण द्वारा कुछ पांच जन्मों की कहानी  दोहराई जाएगी। सो जाहिर सी बात है हर किसी  को अपने जीवन के बहूमूल्य पल भी दिख जायेगे।

कुछ बीते  हुए पलों में (पास्ट) को कैटरीना किस तरह बदलना चाहेगी?

दरअसल में जो बीत चूके  पल है उन्हें हम कभी वापस नहीं ला सकते है। किन्तु यदि मैं कुछ बीते  पलों में  बदलाव चाहूंगी तो यही कि -मैं  चिंता करना छोड़ दूँ।

हालिया पल में किस तरह का बदलाव चाहेंगी  आप?

अभी (प्रेजेंट) के पल में भी यही  आशा करती हूँ कि मेरी जो बेहद गन्दी आदत है -दुखी होने की और छोटी छोटी बातों से परेशान होने की वह बस मेरे अंदर कभी न आये। कम सोचूँ   और कम परेशान होऊं । दरअसल में यह मुझे बहुत अच्छी  तरह मालूम है कि  चिंता करने से कुछ नहीं बदलने वाला किन्तु हम मनुष्य संवेदनशील प्रकरण की वजह से अपने  आप को कमजोर बना लेते है। और दिमाग के बदले दिल से सोचने लगते है यही  हमारी कमजोरी है।Katrina song

अब लगभग 10 वर्ष हो चले है फ़िल्मी व्यवसाय में अब आपको कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता होगा न?

जी नहीं ,ऐसा नहीं होता है, हम सब नाटकीय प्रकरण का व्यक्तित्व रखते है और जीवन में पrछे  मूड़ कर  देखते है तो लगता है कि  बेकार  ही हमने इतनी चिंता  की ,पर अभी भी यह सब जान कर  भी मैं  बिलकुल नहीं बदली हूँ। जबकि मैं यह बखूबी जानती हूँ -कि  यह सब बेकार लगेगा कुछ और वर्ष बीत जाने के बाद, पर क्या करूँ दिल से मजबूर हूँ।

अंत में किस का सहारा  लेती है आप अपने दुःख दर्द को उड़न छू करने हेतु?

और कौन?

लास्ट में हम,  सब अपनी अपनी माँ का कन्धा ही ढूंढते है क्योंकि वही एक ऐसी प्राणी है जो हमारे दुःख को समझती है और हमें तसल्ली भी देती है। माँ के सहलाने से हर बच्चे को एक सुखद अनुभव होता है। कुछ पल के लिये ही सही बहुत  आनंद आता  है अपनी  माँ के कंधे पर सर रख कर दुःख दर्द मिटाने  का।

जगा जासूस क्या आपकी  डेट्स न होने की वजह से डिले हो रही है?

बिलकुल भी  नहीं। सब जानते है की निर्देशक अनुराग बासु हमेशा से ही अलग ढंग की फ़िल्में बनाते है। ऐसा फिल्म,’ बर्फी ‘के समय भी हुआ था – सब लोग इस बात का ज़िक्र किया करते थे कि बर्फी डिले हो रही है। दरअसल में अनुराग के काम करने का तरीका ही अलग है। पहले वह शूट करते है फिर एडिटिंग और फिर कुछ और लिखते है। इन्ही वजहों से उनकी फिल्मे चैलेंजिंग होती है। फ़िलहाल  मेरी फिल्म, “बार बार” की  प्रोमोशन्स चल रही है फिर उसके बाद करण की फिल्म है और बस   फिर जब भी अनुराग तैयार होंगे, मैं  भी तैयार हो जाउंगी।Katrina in baar baar

क्या आपके फैंस रणबीर और आपकी जोड़ी देखना पसन्द करेंगे?

क्यों नहीं? और यदि फिल्म की कहानी अलग और बेहतरीन हो तो बॉक्स ऑफिस पर झंडा फेरता ही है। अब हम सभी अपनी तरफ से अच्छा काम करते है और जैसा आप को अभी अभी बतलाया है कि अनुराग बहुत बेहतरीन निर्देशक  है और हमेशा कुछ अलग ही करते है सो फिल्म भी अच्छी ही होगी। अब बॉक्स ऑफिस पर क्या असर  होता है यह तो समय ही बतलायेगा ?

रणबीर कपूर के हालिया इंटरव्यू  को लेकर आप परेशान है ऐसा मीडिया में रिपोर्ट्स है ? आप क्या कहना चाहेंगी?

देखिये,आप तो मुझे कई सालो से जानती है। सो आप यह बहुत अच्छी तरह से जानती है – कि मैं अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में किसी से कभी भी बात नहीं करती हूँ। सो इस बारे में, मैं कुछ नहीं कहना चाहती हूँ।


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Mayapuri

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