वचन के पक्के –केदार शर्मा

1 min


kedar sharma

 

मायापुरी अंक 41,1975

आज जैसे फिल्मों में हीरो हीरोइन का कोई ठोस कैरेक्टर नही होता। वैसा ही फिल्म निर्माताओं का हाल है। उनके कहने करने में जमीन-आसमान का फर्क होता है। हर नई लड़की और लड़के से वह वादा कर लेते हैं कि वह उसे अपनी फिल्म में चांस देंगे। इस बीच अगर उन्हें कहीं और काम मिल जाता है और वह कलाकार हो जाता है तो हर कोई लेने को तैयार हो जाता है वरना वह अपने सारे वादे भूल जाते हैं। और इस प्रकार कभी कभार करियर बनने से पहले ही खत्म हो जाता है। किन्तु पहले जमाने में लोग अगर जुबान देते थे तो उसे पूरा करते थे चाहे उसके लिए उन्हें नुकसान ही क्यों न उठाना पड़े। लेखक निर्माता निर्देशक केदार शर्मा ऐसे ही लोगों में एक हैं।

बेबी मुमताज से उन्होंने वादा किया था कि वह उन्हें अपनी फिल्म ‘नील कमल’ में हीरोइन बनाऐंगे। उसमें राज कपूर को वह बतौर हीरो पेश कर रहे थे और बेबी मुमताज को मधुबाला के नाम से हीरोइन बनाने वाले थे। उनके फायनेंसार को जब जब इस बात का पता चला तो उसने पैसे लगाने से इंकार कर दिया और जोर दिया किकोई नाम वाली बड़ी हीरोइन लेकर फिल्म बनाएं, उसी सूरत में वह पैसे देगा।

मधुबाला और उनका बाप यह सुनकर घबरा गए। मगर शर्मा जी को अपने वचन के पकके थे और जिम्मेदारी का अहसास भी। उन्होंने फायनेंनसर की पेशकश ठुकरा दी। और अपने घर का सोना बेचकर फायनेंन्सर से लिया 25000 (पच्चीस हजार) रुपया जो कि पेशगी ही लिया था उसे वापस कर दिया। और जैसे तैसे करके फिल्म पूरी की। अगर शर्मा जी उस समय थोड़ी सी कमजोरी दिखाते तो मधुबाला भी हीरोइन बनने से वंचित रह जाती। ‘नीलकमल’ बॉक्स ऑफिस पर असफल रही किन्तु ‘नीलकमल’ से मधुबाला बन गई। उस वक्त रखा हुआ सोना वह छुड़ा न सके किन्तु उन्हें उसका अफसोस नही हुआ। बल्कि उन्हें खुशी थी कि वह अपना वादा निभा गए।

कई साल बाद पी.एन.अरोड़ा ने मधुबाला को अपनी एक फिल्म ‘पारस’ की सफलता पर एक कीमती फाउंटैनपैन इनाम में देते हुए उन्होंने कहा “अभी तुम्हारी अदाकारी ‘नीलकमल’ से आगे नही बढ़ी है”

जाहिर है यह केदार शर्मा को एक बहुत बड़ा कम्पलिमेन्ट था। अब कहां हैं ऐसे लोग?


Mayapuri