किशोर कुमार और योगिता बाली की शादी अब अफवाह नही

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मायापुरी अंक 51,1975

श्रावण 26 , शक संवत 1897, 17, अगस्त 1975, रविवार, सुबह साढ़े ग्यारह बजे शुभ घड़ी!

कोजी होम पाली हिल स्थित योगिता बाली के फ्लैट में सिख धर्म की शास्त्रीय-विधि के अनुसार गुरूग्रंथ साहिब के समक्ष योगिता बाली और किशोर कुमार का शुभ विवाह सम्पन्न हुआ।

अब यह कोरी अफवाह नही है। न है यह किसी फिल्म का सीन है यह सब सच है!

घड़ी ने ठीक सवा दस बजे कि किशोर कुमार अपने बराती महमूद को लेकर फूलों की मालाओं से महकते फ्लैट में आये और उनके आते ही सिर पर पीली पग बांधे योगिता के भाई योगेश ने उनके गले लिपट कर भावभीना स्वागत किया।

योगेश वर को पूजा कक्ष में ले गये।

पीछे-पीछे.. होले-होले…सपनों में सिमटी.. अपनी मां से लिपटी योगिता भी सारा वातावरण भावपूर्ण ही उठा था स्नेह की गंगा में प्लाविस योगिता की मां ने अपनी बेटी को चूमा और सजल वाणी से वर को आशीर्वाद दिया। योगिता के चाचा ने वर को पीला चमचमाता झरीवाला चोगा ओढ़ा दिया…

एक ओर फूलों की महक थी तो दूसरी ओर प्यार की सुगंध और इसी महक के बीच स्वागत कक्ष में गुरूग्रंथ साहिब की वाणी स्वर लहर गूंज उठी…

जाका प्रित को बिंद से आ लागी..

और तब तक आ गये योगिता के मौसाजी शम्मी कपूर (स्वं गीता बाली के पिता) उनकी पत्नी और बच्चे!

महंत जी ने योगेश को बुलाया और कहा वर वधू को ले आइये। मैंने घड़ी की ओर देखा और साढ़े दस बजने को थे। वर-वधू की जोड़ी पूजा घर से माथा टेक कर ज्योंही वर वधू की जोड़ी ने स्वागत-कक्ष में कदम रखा, टेलीविजन कैमरा के साथ फोटोग्राफर जगमोहन, योगिता जी के निजी फोटोग्राफर और ‘मायापुरी’ के फोटोग्राफर सुरेश के कैमरे की फ्लैश लाइट चम चमा उठी!

एक ओर गुरूग्रंथ साहिब की वाणी की स्वरलहरी गूंज रही थी, दूसरी ओर फूल-मालाओं की महक फैल रही थी तो तीसरी ओर फोटो लेने की फ्लैश लाइट की चमचमाती ‘बिजलिया’ चमक रही थी।

और चौथी ओर से दो मन थे जो जिंदगी के सपनों में खोये गुनगुा रहे थे, महक रहे थे और कुछ-कुछ धड़क भी रहे थे।

आगे-आगे किशोर कुमार जिनके कंधो पर हाथ रखे हुए थे महमूद भैया। पीछे-पीछे वधू योगिता जिनके कंधो पर हाथ रखे हुए थे उनके भाई गणेश ज्योंहि योगिता ने अपने वर देव किशोर कुमार के साथ उस स्वागत कक्ष में कदम रखा त्योंहि उनकी गोल-मटोल बड़ी-बड़ी आंखे डबडबा आयी। यह वही तो कक्ष था जिसे योगिता जी ने अपने हाथों सजाया था वह वही तो कक्ष था जहां बैठकर उन्होंने फिल्में अनुबंधित की यह वही तो कक्ष था जहां उन्होंने अपनी गुनगुनाती हुई तरूणाई के साल गुजारे। यह वही तो कक्ष था जहां उन्होंने फिल्मी-जीवन के सपने सजाये थे। और वही तो कक्ष था जहां किशोर कुमार ने अपनी फिल्म ’शबाश डैडी’ की कहानी सुनायी थी और कहानी सुनते-सुनते योगिता जी को याद आया कि ये वही तो किशोर कुमार हैं न जिन्होंने कुछ ही साल पहले भी कहा था मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। और यह शब्द सुनते ही वे बच्चों की तरह किलकारिया भरती हुई भाग गयी थी। यह वही कक्ष है न…. वर-वधू ने गुरूग्रंथ साहिब के आगे मथा टेका और बैठ गये। महंत जी ने दोनों को आशीर्वाद देते हुए कहा किशोर जी और योगिता जी अब तक आप निर्देशन के इशारों पर काम करते रहे हैं, अब आप आज मेरा निर्देशन मानिये और जैसा में बताऊं, वैसा करते जाइये..

महंत जी ने सत्तगुरू का नाम स्मरण कर विधिवत कार्यवाही प्रारम्भ की वर के पास बैठे थे शम्मीकपूर और पीछे बैठे थे महमूद वधू के पास बैठे थे उनके भाई योगेश जो सजल भाव से अपनी बहन को बार महंत जी वर-वधू को निर्देशन दे रहे थे और मैं देख रहा कौन-कौन आये है इस विवाह समारोह में? सामने दृष्टि गयी तो देखा दारा सिंह शम्मी कपूर के पीछे बैठे हैं। कोने में योगिता की सहेली (रेखा नहीं) कमला लक्ष्मी छाया की छोटी बहन बैठी है। और कोई खास चेहरे नहीं आये। केवल योगिता जी के निकटतम रिश्तेदार आमंत्रित थे। प्रेसवालों को भी नहीं बुलाया गया। पर ‘मायापुरी’ के दिल्ली स्थित संपादक जे.एन.कुमार और मुंबई स्थित प्रतिनिधि जैड.जौहर और पन्नालाल व्यास इस समारोह में आमंत्रित थे। योगिता बाली के पी.आरओ. दीप सागर ने इसी समारोह में हमें बताया कि विवाह स्वागत समारोह 31 अगस्त को ताजमहल में आयोजित किया गया है।

और फिर मेरी दृष्टि गई वर-वधू की ओर गई। दोनों एक दूसरे को कनखियों से देखते थे, हल्का-सा मुस्कुराते थे और फिर भाव भाव विभोर होकर पुललकित भी हो उठते थे।

बनारसी रेशम की साड़ी में योगिता की मादक देह बिजली के फूल की तरह लग रही थी। लाल लाल सोने की चूड़िया जब हल्का-सा खनखनाती तो किशोर कुमार उस महीन आवाज़ को सुनकर ही स्पन्दित हो उठते थे।

महंत जी ने विधि पूर्वक ग्रंथ वाणी का पाठ कर केसरिया दुपट्टा किशोर कुमार के गले में डाल दिया और योगिता जी के भाई को उस दुपट्टे के साथ बहन के आंचल से गांठ बांध देने को कहा। गांठ बंध जाने के बाद महंत जी के इशारे पर दोनों खड़े होते, और गुरू ग्रंथ साहिब का फेरा लेते फेरा काटने के बाद गुरू ग्रंथ साहिब को माथा टैक कर बैठ जाते, फिर लामा पढ़ा जाता, वे फिर खड़े होते और फिर फेरी लेते। इस तरह किशोर कुमार आगे-आगे, योगिता जी पीछे-पीछे एक दूसरे के साथ केसरिया दुपट्टे से जुड़े उन्होंने चार बार गुरू ग्रंथ साहिब की फेरियां ली। और एक दूसरे के जीवन साथी बन गये। उपस्थित सभी लोगों ने वर-वधू पर फूलों की वर्षो की ओर बड़े जनों ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया। महंत जी ने दोनों को आशीर्वाद देते हुए कह गुरू जी की कृपा से आप दोनों सुखी रहें, दोनों में प्रेम बना रहे। दोनों में सहयोग रहे, दोनों में सच्चे सुख की कामना बनी रहे।

इस तरह साढ़े ग्यारह बजते-बजते योगिता बाली और किशोर कुमार दोनों विवाहित हो गये और दोनों के संबधो को लेकर उड़ रही अफवाहों का तूफान सदा के लिए अपने आप शांत हो गया।

इसी विवाह समारोह के ठीक दो दिन पहले ही जब हमने योगिता जी से उनके विवाह को लेकर फैली चर्चा के संबध में स्पष्टीकरण के लिए संपर्क किया तो काफी देर तक वे खामोश रही। हमारे लिए बड़ी उलझन हो गयी थी क्योंकि विशेष सूत्रों से हमें समाचार मिल रहे थे कि किशोर कुमार के साथ उनकी साधी हो रही है पर स्वयं उन्होंने अपने लैटर पैड पर अपने दस्तखतों से उस समाचार का खंडन लिख कर हमारे पास भेज दिया था। इतना ही नही, मुंबई से प्रकाशित फिल्मी साप्ताहिक अंग्रेजी के ‘स्क्रीन’ में उस समाचार की पुष्टि भी हो गयी थी। आखिर माजरा क्या है? मामला क्या है? सच्चाई क्या है? हमने योगिता जी को उस दिन बातों ही बातों में खूब टटोला तो आखिर उन्होंने स्वीकार किया कि ‘स्क्रीन’ में उनकी शादी का जो समाचार छपा है वह सही है। इतना ही नही, उन्होंने यह भी बताया कि किशोर कुमार ने दुबारा उन्हें प्रपोज किया है। कुछ साल पहले भी वे उनसे शादी करना चाहते थे पर बात आगे बढ़ी नहीं। इतना हो नही, उन दोनों की उस समय बनने वाली फिल्म का प्रस्ताव भी समाप्त हो गया और सम्पर्क-संबंध भी टूट गया। पर जब उन्होंने ‘शाबास डैडी’ में हीरोइन बनने का प्रस्ताव रखा तो पुरानी बातें भी याद आ गयी और किशोर कुमार ने दुबारा इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही प्रपोज कर दिया।

हमने पूछा तो फिर आपने खंडन क्यों किया?

योगिता जी इस सवाल पर अपने पी.आर.ओ. दीपसागर को ओर देखते हुए खामोश हो गयी। बाद में खोज करने पर पता चला कि योगिता बाली की मां हरदर्शन कौर पहले इस शादी के लिए राज़ी नही हुई थी। पर बाद में यह अहसास करते हुए कि उनकी बेटी को किशोर कुमार भगा भी ले जा सकते हैं। वे इस शादी के लिए राज़ी हो गयी।

योगित-किशोर कुमार की शादी से योगिता बाली की निर्माणधीन और प्रस्तावित फिल्मों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। इस बारे में स्वयं योगिता बाली फिलहाल कुछ नहीं बता सकती।

फिल्मी अंचलों में बस इतना ही सुना जा रहा है कि अब वह शादी के बाद कोई भी नयी फिल्म साइन नहीं करेंगी।

देखें क्या होता है?

फिलहाल हम ‘मायापुरी’ की ओर से वर-वधू को बधाई देते हैं।


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Mayapuri

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