किशोर कुमार

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चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना-किशोर कुमार का ये गीत जैसे उनकी कमी को आज भी अहसास करता है

किशोर कुमार इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की वो हवा जो जहाँ चलि वही के रंग मे रस बस गई किशोर कुमार का जन्म मध्‍यप्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त, 1929 हुआ पिता कुंजीलाल गांगुली मशहूर वकील थे. बचपन से ही किशोर को संगीत का शौक था व किशोर कुमार को सिर्फ गायक कह कर हम उनके इंडियन सिनेमा मे दिए गए योगदान को अनदेखा कर देंगे। बहुमुखी प्रतिभा का धनी यह शख्‍स- अभिनेता, गायक, निर्देशक, निर्माता, गीतकार सब कुछ थे। यह भी कहा जा सकता है कि हिंदी सिनेमा की गायकी के आसमान पर चकाचौंध बिखेरने के बाद अभिनेता किशोर को लगभग अनदेखा कर दिया गया। अभिनेता किशोर को वह श्रेय नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। 60-70 के दशक में किशोर की गायकी का आलम यह था कि वे राजेश खन्‍ना, देवानंद और अमिताभ बच्‍चन जैसे बड़े सितारों की ‘आवाज’ बन चुके थे।

कुंदनलाल (केएल) सहगल को वे आदर्श मानते थे और उन्‍हीं की तर्ज में गाया करते थे। इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में उन्‍होंने पढ़ाई की व स्कूल टाइम से ही मनमौजी किशोर को गाने उल्‍टे करके गाने का शौक था। नाम पूछने पर कहते थे- ‘रशोकि रमाकु’. पढ़ाई में अपने प्रश्‍नों के जवाब भी वे गाने के लहजे में याद किया करते थे। चूंकि बड़े भाई अशोक कुमार हिंदी फिल्‍म जगत में सक्रिय थे, ऐसे में किशोर भी फिल्‍मों में किस्‍मत आजमाने बंबई (अब मुंबई) आ गए।

शुरू में किशोर कुमार को एस डी बर्मन और अन्य संगीतकारों ने अधिक गंभीरता से नहीं लिया और उनसे हल्के स्तर के गीत गवाए गए, लेकिन किशोर कुमार ने 1957 में बनी फ़िल्म “फंटूस” में दुखी मन मेरे गीत अपनी ऐसी धाक जमाई कि जाने माने संगीतकारों को किशोर कुमार की प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा। इसके बाद एस डी बर्मन ने किशोर कुमार को अपने संगीत निर्देशन में कई गीत गाने का मौका दिया। आर डी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने ‘मुनीम जी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘फंटूश’, ‘नौ दो ग्यारह’, ‘पेइंग गेस्ट’, ‘गाईड’, ‘ज्वेल थीफ़’, ‘प्रेमपुजारी’, ‘तेरे मेरे सपने’ जैसी फ़िल्मों में अपनी जादुई आवाज से फ़िल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया। एक अनुमान के किशोर कुमार ने वर्ष 1940 से वर्ष 1980 के बीच के अपने करियर के दौरान करीब 574 से अधिक गाने गाए।

लेकिन क्‍या आप यकीन करेंगे कि आभास कुमार गांगुली यानी फिल्‍मी दुनिया के किशोर कुमार बचपन में ‘बेसुरे’ थे। उनके गले से सही ढंग से आवाज नहीं निकलती थी लेकिन एक हादसे ने उनके गले से इतनी ‘रियाज’ करवाई कि वे सुरीले बन गए. किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि किशोर का पैर एक बार हंसिए पर पड़ गया. इससे पैर में जख्‍म हो गया. दर्द इतना ज्‍यादा था कि किशोर कई दिन तक रोते रहे। इतना रोये कि गला खुल गया और उनकी आवाज में ‘जादुई असर’ आ गया।

किशोर कुमार ने चार शादियां कीं। पहली शादी रूमा देवी से हुई। उसके बाद अभिनेत्री (स्‍वर्गीय) मधुबाला और योगिता बाली से भी उन्‍होंने विवाह किया। रूमा और योगिता से उनकी शादी ज्‍यादा नहीं चल सकी. किशोर ने 1980 में चौथा विवाह एक अन्‍य अभिनेत्री लीना चंदावरकर से किया, जिससे उनका एक बेटा सुमीत है. 13 अक्टूबर 1987 को 58 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया किशोर कुमार जिंदगीभर कस्बाई चरित्र के भोले मानस बने रहे। मुंबई की भीड़-भाड़, पार्टियाँ और ग्लैमर के चेहरों में वे कभी शामिल नहीं हो पाए। इसलिए उनकी आखिरी इच्छा थी कि खंडवा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाए। इस इच्छा को पूरा किया गया, वे कहा करते थे-‘फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वे खंडवा में ही बस जाएँगे और रोजाना दूध-जलेबी खाएँगे।


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Mayapuri

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