किशोर कुमार का बदला

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Kishore_Kumar_Distraught

मायापुरी अंक.9.1974
किशोर कुमार शुरू से ही बड़ी अदभुत ‘वस्तु’ रहा है। उसने अभिनेता बनने के लिए बड़े पापड़ बेले थे। उन कड़वों अनुभवों का बदला उसने गिन-गिन कर लिया है, और लोगों को उसने इसकी पहले ही चेतावनी दे दी थी।
बी. आर. चोपड़ा से गांगुली परिवार के बड़े मैत्री पूर्ण संबंध रहे है। अशोक कुमार और चोपड़ा का बहुत शुरू में ही साथ हो गया थाष। इसी संबंध से किशोर कुमार चोपड़ा के पास ‘ब्रेक लेने के लिए गया। चोपड़ा ने काम देने की हामी तो भरी किन्तु साथ ही कुछ शर्त भी रख दी। किशोर को यह बात बहुत बुरी लगी। उसने वह शर्ते मानने से इन्कार कर दिया और चोपड़ा से कहा, “ठीक है, आज मैं काम मांगने आया हुं आप काम न दे। किन्तु कल जब भी मेरा समय आएगा और आप कभी जरूरत पड़ने पर मेरे पास आ गए तो मेरी मर्जी के मुताबिक आजिजी करेंगे तभी आपकी फिल्म स्वीकार करूंगा।
बात आई गई हो गई। चोपड़ा के दिमाग से यह बातें मिट गई, किन्तु किशोर भूला नही। अपनी एक फिल्म के लिए चोपड़ा को किशोर की जरूरत पड़ गई। चोपड़ा ने किशोर को साइन करना चाहा तो किशोर कुमार ने अपनी शर्ते रख दी। उसे याद था कि 34 चोपड़ा ने किस प्रकार उसके बुरे दिनों में हेंकड़ी दिखाई थी। चोपड़ा ने सीधी अशोक कुमार के घर की राह ली।
अशोक कुमार चोपड़ा जी को पसीने से शराबोर देखकर हैरान रह गया। पूछा “क्या बात है ? यह क्या हालत बना रखी है ?
“जरा दम तो लेने दो” चोपड़ा ने तेज सांस लेते हुए कहा। मैं अपनी नई फिल्म में किशोर कुमार को लेना चाहता हूं.”
“हां-हां तुमने मुझसे इसका जिक्र किया था। मैने किशोर से तुम्हारे लिए बात कर ली है। वह काम करने के लिए राजी है। अशोक कुमार ने कहा।
“हां वह राजी तो है, किन्तु उसके साथ ही उसने कुछ शर्ते रखी है। चोपड़ा ने घबराये हुए स्वर में कहा।
और फिर चोपड़ा जी ने अशोक कुमार को किशोर को शर्ते सुनाई, तो दादा मुनी हंस पड़े और तुरंत किशोर को फोन पर बुलाया।
“क्यों क्या तुम्हें चोपड़ा जी की फिल्म में काम नही करना ?
“मना किसने किया है ? किशोर ने कहा।
“तो फिर विचित्र शर्ते रख कर उन्हें परेशान क्यों कर रहे हो ? दादा मुनी ने प्यार में डांटा।
“इस में परेशानी की क्या बात है ? हर निर्माता कलाकारों के सामने शर्ते रखा करता है। तो हम क्यों शर्ते नही रख सकते ? किशोर ने सहज स्वर में कहा।
“लेकिन ऐसी विचित्र शर्ते ? दादा मुनी ने कहा।
“अपनी-अपनी मर्जी है। अगर चोपड़ा जी को शर्ते मंजूर हो, तो मेरे पास भेज दे, मैं एग्रीमेन्ट साइन कर दूंगा” और फोन रख दिया। दादा मुनी किशोर कुमार के स्वभाव से परिचित थे उन्होंने चोपड़ा जी से कहा। “क्या वाकई किशोर क साइन करने के सिलसिले में संजीदा है ?
“अरे इतना कि उसके बिना फिल्म नही बन सकती” चोपड़ा जी ने कहा। “तब तो किशोर कुमार की शर्ते माननी ही पड़ेगी। मेरा कहा वह मान लेगा ऐसा नही लगता।” दादा मुनी ने हथियार डालते हुए कहा।
आप वह शर्ते जानने के लिए उत्सुक होगें, है ना। शर्ते यह थी चोपड़ा जी को धोती पहनने के पश्चात पैरों में मोजे और जूते पहनने थे। और पान इस तरह खाना था कि राल टपकी हुई हो जिससे मुंह लाल नजर आए।
चोपड़ा जी ने कभी धोती नही पहनी थी और धोती पर मोजे और बूट तो शोभा देते ही नही। यही नही चोपड़ा जी कभी पान नही खाते और यहां पान खाकर मुहं से राल भी टपकानी थी। और फिर टेबल पर खड़े होकर किशोर से हाथ जोड़कर फिल्म साइन करने की विनती करनी थी।
चोपड़ा जी ने किशोर को साइन करने के लिए यह कुछ मैकअप के सहारे किया और तब किशोर का इंतकाम पूरा हुआ।

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Mayapuri