Exclusive: जानिए सलमान खान के विवादित इंटरव्यू की वास्तविकता

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लिपिका वर्मा 

सही मायने में क्या जॉर्निलिस्म का कोई अचार -विचार होता है या नही? क्या हमे तथ्यों को जैसे के तैसा रखने की जिम्मेदारी है या नही?? कलम की कीमत आज के दिनों में घटती  ही जा रही है-ऐसा क्यों हो रहा है ? केवल इसलिए कि मीडिया हाउसेस भी अपनी रोटी सेकने में लगे रहते  है। और तो और,” ब्रेकिंग -न्यूज़

“और अवल रहने की होड में आज की पत्रकारिता ओछी हो गयी है। बिना मतलब  किसी भी बयान से बवाल मच जाए क्या उसको लिखना जरूरी है ? वो भी जब एक स्टार उस शब्द को बोलकर अपनी गलती का एहसास कर लेता है और  दूसरे शब्दों में दोबारा अपनी पीड़ा  का वर्णन करता   है –

जी हाँ! यहाँ हम  सलमान खान के – “रेप ” शब्द से जुडे  ब्यान की बात से जो बवाल मचा  है  उसकी बात कर  रहे- खेर अब तक जो आप लोगो  ने पढ़ा ,उससे आप लोग सब   वाकिफ ही है। किंतु जो कुछ  असलियत में हुआ हम उस दृश्य को पेश कर है।  हम भी उस वक़्त  वहां मौजूद थे सो आपको अपने शब्दों में उस दृश्य को पेश करना   चाहते है-

यह ,”रीजनल प्रिंट इंटरव्यू”  के तहत सलमान हम से बातचीत  करने महबूब स्टूडियो पहुंचे थे। और  प्रिंट मीडिया का एक नियम होता है यदि जवाब देने  वाला एक्टर या कोई भी जानी मानी हस्ती  बोलचाल करते वक़्त किसी अपशब्द का उपयोग कर जाये, और  तुरन्त अपनी  गलती का एहसास कर लेता है तो हमारे लिए इशारा ही काफी होता है, जो उसका फाइनल वक्तव्य है, तात्पर्य है उसको ही हम अपने शब्दों में बिरोते है।

सवाल जवाब का दौर चल रहा था, और कई वेबसाइट जर्नलिस्ट भी इस प्रिंट ग्रुप में शामिल हो गए-सब बारी बारी सवाल कर रहे थे।

एक महिला पत्रकार  ने सलमान से बड़ा ही सीधा सा  सवाल किया

पहलवान का किरदार करने में किन दिक्कतो  का सामना करना पड़ा?

बड़े ही मनोरंजक हाव भाव  में सलमान हम सब को समाझाने लगे कि उन्हें कितनी मशक्त करनी पड़ी और किरदार पर्दे पर फ्रॉड न लगे तो अपने पैरो और  शरीर को उस मुकाबले फिट रखने के लिए उन्होंने क्या कुछ किया। बीच बीच में वो निर्देशक अली अब्बास  के बारे में भी कुछ चुस्की मार कर बोले  तो कभी अमीर खान के बारे  में, और  हम सब उनकी बातो पर हंस पडते  अभी कुछ लोगो की हंसी जारी ही थी की उनकी जुबान से निकल  गया, “रिंग से शॉट देने  के बाद  जब मै  निकला तो मेरी चाल  एक, “रेप  वुमन” की तरह थी “

Salman khan
Salman khan

हम सब जो उनके करीब बैठे हुए थे तुरंत अचंभित हो गए। औऱ  इस समय तक सलमान ने भी अपनी गलती का एहसास कर लिया था-तुरंत बोले -“अई शुड हैव नॉट सेड थिस।” तुरंत अपने शब्दों को वापस लेते हुए बोले,” इट  वास वेरी डिफिकल्ट टू  वाक बहुत मुश्किल से चलना हो पाता  था आप सभी  ने अब तक टेप सुन  ही लिया होगा? सो हम सिर्फ, ‘रेप’ पर उनकी टिपणी का उल्लेख कर रहे है।  ऐसा नही है कि  हम पत्रकारों  ने उनके इस शब्द बोलने पर कोई रिएक्शन नही किया। हम सभी उनको अचंभित होकर देखने लगे-इस  वक़्त सलमान ने भी अपने आप को संभाला।

यह गलत  है अपने शारीरिक दर्द  को रेप से तुलना करना  यह हम सभी जानते है मानते है। किंतु सलमान ने भी जानबूझ कर यह शब्द नही कहा, इसका उनके हाव भाव  से भी हम सब को एहसास हो रहा था। और यह  भी कि एक 50 साल के व्यस्क उपर से जानी- मानी  हस्ती क्या ऐसा बोलना उन्हें शोभा देता है? यह अलग बहस  का मुद्दा है।

एक महिला पत्रकार होने के नाते मेरी आंखे  फ़टी की फ़टी रह गई, लेकिन अपनी जिमेदारी के तहत जैसे ही सलमान ने अपने शब्दों को अपनी गलती का एहसास किया और अपने वक्तव्य को  सही तरह पेश करने की कोशिश की तो हम सब वापस से नार्मल हो गये।

किंतु चैनल और अन्य मीडिया हाउस जो वहां  मौजूद भी नही थे सुनी सुनाई बात पर  हम सभी पर कीचड़ उछाल रहे थे। जो हंस रहे थे वो सलमान के पिछले जोक पर हंस रहे थे। अभी उनकी हंसी के फुव्वारे थमे   ही नही  थे कि  अचानक यह घट गया।

सलमान ने ,”फिलिंग” शब्द का उपयोग  ही नही किया था। ऐसे मर्म मुधो में शब्दों को जैसे का तैसा ही लिखना चाहिए जिस से  पाठक की सोच विकृत न हो।

क्या संवेदनात्मक पत्रकारिता को महत्व देना चाहिए ?? या फिर नैतिक पत्रिकारिता को ? यह एक बड़ा सवाल है ?


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Mayapuri

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