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पर्दे से गायब होते जा रहे हैं कृष्ण कान्हा रे कान्हा…!

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पौराणिक कथाओं के पसंदीदा चरित्र हैं कृष्ण! कृष्ण हमारी दिन-प्रतिदिन की जिन्दगी के नायक हैं। जब भी न्यायालय की बात होती है कसम ‘गीता’ की ही खाई जाती है। और तो और, जब कश्मीर पर सरकार 370/35ए हटाने के लिए काम करती है तब सोशल मीडिया पर मोदी-अमित शाह की तुलना कृष्ण-अर्जुन से किए जाने की भरमार लग जाती है। इस महान चरित्र कृष्ण से सिनेमा-संसार कैसे दूर रह सकता है? कृष्ण-जन्मोत्सव सामयिक है। इस उत्सव में भी भजन-कीर्तन में फिल्मों के गीत ही बजते सुनाई दिये हैं- ‘गोविन्दा आला रे आला’, ‘मच गया शोर सारी नगरी में’, ‘यशोमति मैया से बोले नंदलाला…’, ‘मोहे छेड़ो ना’, ‘आया गोकुल का चोर’, ‘बड़ा नटखट है’, ‘गो गो गोविन्दा’… वगैरह वगैरह गीत बाॅलीवुड सितारों के घर में भी बजे हैं। पर्दे पर ‘कृष्ण’ (ओ माई गाॅड) बनने वाले अक्षय कुमार के घर पर ट्विंकल और बच्चों को कृष्णा से बहुत लगाव है। सचमुच यह कृष्ण भक्ति ही तो है बाॅलीवुड की- जो हर जन्माष्टमी पर कृष्ण को याद करने के लिए फिल्मी गाने बजा करते हैं (वर्ना-सूर और मीरा के भजनों पर आज का डांस भी नहीं हो पाता)। कृष्ण को पर्दे पर पहली बार कौन ले आया, बता पाना मुश्किल है। दक्षिण भारत की फिल्मों में एन.टी. रामाराव 17 बार कृष्ण बन कर पर्दे पर आये थे। सन 1962 में बनी तेलुगु फिल्म ‘श्री कृष्णार्जुना युद्धम’ एक बेहद सफल फिल्म थीं हिन्दी फिल्मों में बताते हैं शाहू मोडक 30 फिल्मों में कृष्ण बने थे मगर उनको दक्षिण के नायकों एन टी आर या शिवाजी गणेशन के कृष्ण रूप की तुलना में कम कामयाबी मिली थी। शम्मी कपूर अभिनीत फिल्म ‘ब्लफ मास्टर’ (संगीत कल्याण जी आनंद जी) का गीत- ‘गोविन्दा आला रे आला’ को पहला फिल्मी कृष्ण-सांग कहा जा सकता है। इस गीत की कामयाबी के बाद ही फिल्मों में गोविन्दा गीत का चलन शुरू हुआ था। सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माए गये गीत- ‘गो गो गोविन्दा को भी आज के यूथ की पसंदगी में शामिल किया गया है। हां, फुल फ्लेजेड कृष्ण कथा में कृष्ण की स्थिति पर्दे पर कभी बहुत अच्छी नहीं रही सिवाय धारावाहिक ‘महाभारत’ के। लेकिन, कृष्ण पात्र- जो ‘महाभारत’ (नितिश भारद्वाज) और ‘कृष्णा’ (सर्वदमन बनर्जी) में थे, आज कहां हैं? स्वप्नील जोशी, सौरभ राज जैन तथा कुछ और कलाकार जो टीवी या नाटकों में दिखाई दिये, उन पर बड़े निर्माताओं की नजर नहीं पड़ी। ‘रामायण’ के सर्वप्रिय पात्र राम (अरूण गोविल) की तरह पर्दे के कृष्ण भी सिनेमा की अंधी दौड़ में अपना अस्तित्व बचाये नहीं रख पाते। यह जरूर विचारणीय सवाल है। कान्हा रे कान्हा…!

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