एक वो भी दिवाली थी, एक ये भी दिवाली है कृति सैनन की

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  • सुलेना मजुमदार अरोरा

कृति सैनन  लंदन तो रवाना हो गई अपनी नवीनतम फ़िल्म ‘ गनपथ, की शूटिंग के लिए और  इस बार की दीपावली वो फ़िल्म की टीम और हीरो टाइगर श्रॉफ के साथ ही मनाएगी लेकिन उन्हें शिद्दत से याद आ रही है अपने घर की दीवाली। बचपन की दीवाली , दिल्ली की दीवाली। दीवाली पर बातचीत के दौरान कृति ने बताया था, “बैक होम, मुझे वो सारी दिवालियाँ याद है जो मैंने अपने पेरेंट्स सिबलिंग्स, रिश्तेदारों और स्कूल, कॉलेज के फ्रेंड्स और पास पड़ोसियों के साथ मनाया था। उन दिनों दीवाली का मतलब होता था फुल ऑन जश्न, आनंद , रौनक, उल्लास, पटाखों के धमाके, फुलझड़ियों के बड़े बड़े डिब्बे और किचन से आती तरह तरह की मिठाइयाँ और माउथ वाटरिंग गुझिये। वो माहौल ही डिवाइन होता था। हमारे बड़े, हमें खूब सारा पॉकेट मनी देते थे, बड़ों के पाँव छूने पर ढेर सारा उपहार भी मिलते थे। हम सब बच्चे दीवाली से कई दिन पहले ही उत्सव के मूड में आ जाते थे। पटाखों से भरे डिब्बों की लाइन लग जाती थी, कौन किससे ज्यादा पटाखें खरीद रहें हैं, कम्पटीशन सा लग जाता था।  नए नए कपड़ों के ढेर लग जाते थे, घर की सफाई, रँगाई, रिनोवेशन सब देखकर दीपावली नज़दीक आने का एहसास हो जाता था।  दिवाली के दिन सुबह से घर में मेहमानों की रौनक लग जाती थी, फ़िज़ा में मिठाइयों की खुशबू उड़ती थी, सबके घरों में मिठाइयाँ बन रही होती। शाम होते ही पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती थी और घर आंगन जगमगाते दीपों से सज जाते।

मैं भी कतार में दिए जलाती थी, सुंदर कपड़ों में, पूरी सजधज के साथ। रात को पूजा के बाद आतिशबाज़ी का सिलसिला शुरू होता, भागते दौड़ते, उछलते कूदते, शोर मचाते, मिठाइयों पर हाथ साफ करते, कब आधी रात बीत जाती, पता ही नहीं चलता। मुंबई शिफ्ट होने के बाद शुरू शुरू में किसी से ज्यादा पहचान ना होने के कारण, दिवाली के दिन वो पहले वाला माहौल नहीं मिलता था तो बहुत उदास हो जाती थी, लेकिन अक्सर मेरी मॉम, बहन मेरे साथ दीवाली मनाने मुंबई आ जाते और मॉम मेरे लिए दिवाली की मिठाइयाँ, गुझियां ढेर सारा बना कर ले आती थी तो दिल बाग बाग हो जाता था।  लेकिन धीरे धीरे मुंबई में भी बहुत सारे फ़िल्म मेकर्स और कलीग्स से जब दोस्ती हुई तो यहां भी मन लगने लगा और यहाँ की दीवाली भी मैं खूब एन्जॉय करने लगी, यहाँ मेरे सीनियर्स और साथी स्टार्स के निमंत्रण पर भव्य बॉलीवुड दीपावली पार्टियों को भी बहुत एंजॉय किया। सब कुछ मस्त चल रहा था कि अचानक कोविड के प्रकोप ने हम सबसे हमारी खुशी, आज़ादी , रौनक, मस्ती और धूम धड़ाका छीन लिया। लास्ट ईयर तो घर की चार दिवारी में मनाई थी रिस्ट्रिक्टेड दिवाली। थैंक गॉड, मेरी फैमिली मेरे साथ थी। इस बार तो शूटिंग में व्यस्त रहूँगी।  उत्सव भी मनाऊंगी, शूटिंग भी करूंगी। कर्म करते रहना है। हाँ, एक बात बता दूँ कि अब मैं पटाखे नही फोड़ती। बस आप सबको हैपी दीपावली कहने के साथ साथ सेफ एंड हेल्दी रहने की विशेश दे रहीं हूं मेरे लाखों शुभचिंतकों को और लाखों पाठकों को।”

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Mayapuri