एक आम लव स्टोरी ‘कुछ भीगे अल्फ़ाज़’

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लेखक निर्देशक ओनीर हमेशा से परिपाटी से हटकर फिल्में बनाने के लिये जाने जाते हैं। उनकी फिल्में दर्शकों से कहीं ज्यादा फिल्मी मेलों में पंसद की जाती है। इस बार भी उन्होंने एक मामूली सी लव स्टोरी फिल्म ‘ कुछ भीगे अल्फ़ाज़’ को खास किस्म का जामा पहना कर प्रस्तुत करने की कोशिश की है।

फिल्म की कहानी

गीतांजली थापा यानि आर्ची को एफ एम रेडियो के आर जे अल्फा़ज़ यानि जाईन खान दुर्रानी की शायरी और उसका लहजा बहुत पंसद है। वो उससे फोन पर बात करते हुये एहसास हो जाता है कि वो एक चोट खाया इंसान है क्योंकि उसकी आवाज में उसका दर्द झलकता है। धीरे धीरे वो उसकी तरफ आकर्षित होने लेगी है। एक दिन अल्फाज उसे अपनी आप बीती बताता है कि किस तरह वो बाल अवस्था में ही एक लड़की से प्यार करता था लेकिन उसे अपनी बेवकूफी से खो बैठा। उसकी कहानी सुन आर्ची उसके और ज्यादा नजदीक आ जाती है और एक दिन जब आर्ची और अल्फाज मिलते हैं तो मिलते ही एक दूसरे के हो जाते हैं।

जैसा कि बताया गया है कि ओनीर हमेशा ही अपनी फिल्मों के विषयों को जटिल बनाकर पेश करते हैं। इस बार उन्होंने एक सीधी सादी कहानी को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की है, जो एक खास वर्ग को ही पंसद आती है या फिल्मी मेलों में पुरस्कार बटोरती है। कहानी का बैकड्रॉप वो कोलकाता है जहां पुराने घर मोहल्लों के अलावा ट्राम दिखाई गई है। एवरेज कथा पटकथा तथा संवाद भी उसी के अनुकूल हैं। शास्वत श्रीवास्तव का संगीत कहानी के साथ साथ चलता है।

जाईन खान दुर्रानी आर जे की भूमिका में बढ़िया काम कर गया। वो अपनी उर्दू जबान और पर्सनेलिटी के कारण पाकिस्तानी सीरियलों का एक्टर लगता है। गीतांजली थापा भी अच्छा काम कर गई तथा श्रेय राय तिवारी, मोना अंबेगोनकर तथा चन्द्रयानी घोष अच्छे सहयोगी कलाकार साबित हुये।

इस आम सी लव स्टोरी फिल्म को खास वर्ग ही पंसद करे तो करे।


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Shyam Sharma

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