मूवी रिव्यू: भारतीय दर्शक के लिये कन्फयूजन भरा मनोरजंन साबित होती है ‘कुंग फू योगा’

1 min


रेटिंग***

भारतीय और चीन की पब्लिक के टेस्ट में काफी फर्क है क्योंकि वहां जैकी चेन के साथ भारतीय कलाकारों से सुसज्जित निर्देशक स्टेनली टॉन्ग की फिल्म ‘कुंग फू योगा’ सुपर हिट हो जाती है जबकि यहां के दर्शकों के कुछ भी पल्ले नहीं पड़ता। बस जैकी चेन की मौजूदगी ही दर्शकों को फिल्म देखने के लिये मजबूर करती है।

फिल्म शुरू होती है इसा से तीन सो साल पहले के एक युद्ध से, जिसमें टैंग सामराज्य मगध सामराज्य की हेल्प करते हुये शैतान अरूणासवा पर धावा बोलता है। इसके बाद कहानी वर्तमान में आते हुये चीन के पुरातत्वविद प्रोफेसर जैक यानि जैकी चेन को लेकर शुरू होती हैं जहा जैक अपने स्टूडेंटस को इतिहास पढ़ा रहे हैं। उसी दौरान उनसे मिलने के लिये राजस्थान के एक राज्य की प्रिंसेस और पुरातत्वविद प्रोफेसर अश्मिता यानि दिशा पटानी मिलने आती हैं अपनी बहन अमायरा दस्तूर के साथ। वो जैक को एक कई सो साल पुराना नक्शा देते हुये उनसे अपने राज्य का खजाना तलाश करने का आग्रह करती है। उसका आग्रह स्वीकार करते हुए जैक अपनी टीम के साथ उस खजाने की खोज में लग जाते हैं। बेशक उनके काम में काफी मुश्किलें पेश आती हैं। उसी दौरान रेंडल यानि सोनू सूद इनके बीच आ जाता है, वो भी खजाना हथियाना चाहता है। दरअसल सोनू भी राजस्थान के राज घराने से ताल्लूक रखता हैं जो दिशा पटानी के घराने से दुश्मनी रखता है। इस तरह इन तीन महत्वपूर्ण किरदारों को लेकर कई ट्वीस्ट दर्शाती कहानी आगे बढ़ती हैं और अंत में अपने अंजाम तक पहुंचती है।ful

स्टैनली टॉन्ग इससे पहले जैकी के साथ कितनी ही हिट फिल्में दे चुके हैं। इस बार उन्होंने चाइना और इंडिया कोलोब्रेशन के तहत कहानी चुनी, जिसमें भारतीय कलाकारों का भी चयन किया। चूंकि जैकी एक विश्वप्रसिद्ध मार्शल आर्ट तथा कुंग फू के ज्ञाता  बड़े और सफल एक्टर हैं लिहाजा उनके सामने सोनू सूद और लगभग नई अभिनेत्रीयां दिशा पटानी और अमायरा बौने साबित होते हैं। एक्शन में भी और चुस्ती फुर्ती में भी, जबकि जैकी चेन सिक्सटी प्लस हैं। फिल्म की कहानी बच्चों को सुनाई जाने वाली काल्पनिक कहानीयों की तरह लगती है जो चाइना में तो पंसद की जा सकती है लेकिन उसे देखते हुए यहां दर्शक कन्फयूज सा बना रहता है। फिल्म की लोकेशंस बेहद लुभावनी हैं चाहे वे चाइना की बर्फ से ढकी पर्वतमालायें हों या दुबई की अट्टलाकियें या राजस्थान के किले। कुछ दृश्यों का वीएफएक्स कमाल का है। इसके अलावा फिल्म के एक्शन सीक्वेंस उसी स्तर के हैं जैसे अक्सर जैकी की फिल्मों में देखे जाते रहे हैं। जिन्हें फिल्म का बैंकग्राउंड म्यूजिक और ज्यादा सशक्त बनाता है। वैसे तो पूरी फिल्म में ही कन्फयूजन हैं लेकिन क्लाईमेक्स में दर्शक उस वक्त हैरान रह जाता है जब फिल्म का ग्रे मैन सोनू सूद जैकी से लड़ता हुआ अचानक पॉजिटिव हो एक गाने पर सबके साथ नाचने लगता है। इस गाने में जैकी की नृत्य प्रतिभा भी सामने आती है।kung

किरदारों की बात की जाये तो जैकी इस उम्र में भी काफी फुर्तीले और चुस्त दुरूस्त हैं। वे एक पुरातत्वविद प्रोफेसर के तौर पर जमते हैं। उनकी टीम में मियॉ तथा कुछ अन्य किरदारों ने बहुत बढ़िया एक्शन पेश किया, उनके एक्शन में जैकी की फिल्मों में दिखाई जाने वाली एक्शन कॉमेडी भी झलकती है। सोनू सूद फिल्म में एक तरह से नेगेटिव किरदार में हैं लेकिन वे जैकी के सामने हमेशा कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं। दिशा पटानी राजस्थानी क्वीन के तौर पर काफी खूबसूरत लगी है, इसके अलावा जमीनी एक्शन में उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है। उसकी बहन के रोल में अमायरा दस्तूर भी अच्छी लगी है।

अगर कंपलीट फिल्म की बात की जाये तो ये भी जैकी चेन की अन्य एक्शन फिल्मों से एक है परन्तु उनकी अन्य फिल्मों से थोड़ी कमजोर, लेकिन सोनू सूद तथा दिशा पटानी और अमायरा के लिये विदेशी फिल्म के तौर पर अच्छा मौका साबित हुई है।

फिल्म जैकी चेन के अलावा सोनू सूद और दिशा पटानी तथा बढ़िया एक्शन के लिये देखी जा सकती है।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये