क्या करेंगे हम सोने, चांदी में बंधे रिश्तों का- अली पीटर जॉन

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क्या बांधोगे रिश्ते रेशम की डोरी से…
हवा का एक झोंका ही काफी है इसे तोड़ने को…
मोहब्बत के धागों में बांध के देखो,
उसके आगे आंधियां भी कमजोर पड़ जाएंगी।

क्या बांधोगे रिश्ते चांदी की डोरी से…
एक पानी का घड़ा ही काफी है इसे तोड़ने को…
वादों के धागे से बांध के तो देखो,
उसके आगे पूरी दुनिया भी कमजोर पड़ जाएंगी।

क्या बांधोगे रिश्ते पीतल की डोरी से…
एक पत्थर ही काफी है इसे तोड़ने को…
गौरव के धागे से बांध के देखो,
उसके आगे बड़े-बड़े पर्वत भी कमजोर पड़ जाएंगी।

रेशम, सोना, चांदी, पीतल ये सब क्या करेंगे उस कलाई पर…
बस एक मोहब्बत का धागा एक दूसरे के दिल में बांध दो।

वक्त के आगे तो इतिहास की भी कोई औकात नहीं…
मगर इस बंधन के आगे तो वक्त भी झुकता है,
बस इन रस्मों रिवाजों को जाने दो।

आरती मिश्रा

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