मूवी रिव्यू: ब्लड माफिया को उजागर करती है फिल्म – ‘लाल रंग’

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रेटिंग***

मेडिकल वर्ल्ड में किस कदर करप्शन है जिसके एक अंग ब्लड माफिया की बदौलत कितने ही अच्छे लोग एचआईवी या ऐसी ही बीमारीयों के शिकार बन जाते हैं। निर्देशक सैयद अहमद अफजल कि फिल्म ‘लाल रंग’ ब्लड  स्मगलिंग को उजागर करती है।

कहानी

रणदीप हुड्डा हरियाणा के करनाल शहर में लैबोरेट्री स्टूडेंट की आड़ में ब्लड की स्मगलिंग का धंधा करते हैं। इस धंधे में उसने प्राइवेट अस्पतालों तथा अन्य कस्टमर्स पकड़े हुये हैं। कॉलेज में उसकी मुलाकात एक और स्टूडेन्ट अक्षय ऑबेराय से होती है। अक्षय एक गरीब रिटायर चपरासी का इकलौता बेटा है इसलिये वो खूब पैसा कमाना चाहता है लिहाजा वो भी रणदीप का सहयोगी बन जाता है। इस बीच उसे एक स्टूडेंट पिया बाजपेयी से प्यार हो जाता है। धीरे धीरे अक्षय को रणदीप के बारे में पता चलता है कि वो भी मीनाक्षी दीक्षित को प्यार करता है लेकिन एक दिन मीनाक्षी रणदीप के खिलाफ अपने मां बाप की दुहाई देते हुये उससे ब्रेकअप कर लेती है। दूसरी तरफ अक्षय पैसे की भूख के चलते रणदीप को अवाइड कर अकेले काम करना शुरू कर देता है लेकिन गलत खून देने की एवज में उसके कस्टमर को एड्स हो जाता है और वो सुसाइड कर लेता है। एसपी रजनीश दुग्गल उसे दो दिन का टाइम देता है कि वो असली सरगना का नाम बता दे तो वो उसे छोड़ देगा। पिया से उसकी शादी होने वाली है। अक्षय को पता है कि रणदीप की पहुंच काफी दूर तक है इसलिये अगर वो उसका नाम लेता है तो वो उसे लंबा फंसा सकता है। इसी बीच उसे पता चलता है कि रणदीप ने सरेंडर करते हुये सारा जुर्म अपने सर लेते हुये अपने सभी साथियों को बरी करवा दिया है। पांच साल बाद एक बार फिर अक्षय और रणदीप का सामना होता है। इस बीच दोनों गलत काम छोड़ चुके हैं ओर नये सिरे से अपनी जिन्दगी शुरु कर रहे हैं।

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निर्देशन

निर्देशक ने मेडिकल करप्शन के सबसे अहम् मुद्दे ब्लड स्मगलिंग को उठाया है और उसके बारे में बारीकी से बताने की कोशिश की है। परन्तु उसने इस इशू को दिखाने के लिये हरियाणा के करनाल जैसे शहर को लिया। जबकि ब्लड की स्मगलिंग देश के हर शहर में हो रही है। ब्लड माफिया गरीब तबके के लोगों को कुछ सौ रूपये देकर उनके पूरे शरीर से खून निचौड़ लेते हैं। साथ ही कहानी में दोस्ती, प्यार और इमोशन भी है।

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अभिनय

रणदीप हुड्डा बहुत बढि़या अदाकार हैं और यहां तो उन्हे अपनी मदरटंग के साथ काम करना था। उन्होंने ब्लड माफिया के अलावा एक प्रेमी और दोस्त की भूमिका को असरदार ढंग से निभाया है। अक्षय ऑबेराय ने अति महत्वाकांक्षी युवक को सहजता से अभिनीत किया है। पिया बाजपेयी अक्षय के सामने है उसने पहली फिल्म के मुताबिक ठीक ठाक काम किया है। मीनाक्षी दीक्षित, श्रेया नारायण आदि छोटी छोटी भूमिकाओं में ठीक काम कर गई। एस पी के रोल में रजनीश दुग्गल के करने के लिये कोई खास काम नहीं था लेकिन जितना भी था उसने ईमानदारी से निभाया। पुष्कर आनंद तथा राजेन्द्र सेठी भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं।

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संगीत

फिल्म का संगीत कहानी में पूरी तरह से शामिल है इसलिये वो कहानी के साथ साथ चलता है।

क्यों देखें

रणदीप हुड्डा के फैन उनकी अदाकारी के लिये फिल्म देख सकते हैं।

 


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Mayapuri

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