स्व. मेहबूब खां स्वस्थ सामाजिक फिल्मों के निर्माता

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मायापुरी अंक, 57, 1975

स्व. मेहबूब खान की फिल्मों की विशेषता यह थी कि उनकी अपनी फिल्मों की कहानी वास्तविक घटनाओं पर आधारित होती थी। फिल्म बनाने से पूर्व कहानी पर काफी विचार करते थे। फिर उसके बाद ही उसका फिल्मीकरण करते थे।

उनकी फिल्म मदर इंडिया इंडिया सफल फिल्मों में से एक थी साथ ही उनकी एक सफल फिल्म ‘औरत’ मूल कहानी पर आधारित थी। उसमें समय के हिसाब से उन्होंने काफी परिवर्तन किये थे। औरत के फिल्मीकरण से पहले उन्होंने अपनी मौसी के गांव काशीपुर (बड़ौदा) में जाकर वहां के रहन-सहन और नारी जीवन का गहन दृष्टि से निरीक्षण किया ग्रमीण युवतियों का स्वाभिमान, उनकी सहनशीलता आदि को निकट से देखा और फिर मुंबई आकर फिल्म की योजना बनाई।

नरगिस उस समय अपनी चरम पर पहुंच रही थी। स्व. महबूब खान ने ‘मदर इंडिया’ में नरगिस की मां की भूमिका सौंपी तो एक प्रकार की सनसनी सी फैल गई और नरगिस के अन्य निर्माता दबाब डालने लगे कि उन्हें ‘मदर इंडिया’ में मां की भूमिका अस्वीकार कर देनी चाहिए इतनी सुंदर यौवना होकर मां की भूमिका तो मेहबूब खान उसकी इमेज को नष्ट कर देंगे।

नरगिस को ही महबूब खान ने फिल्म तकदीर में पहली बार हीरोइन बना कर पेश किया था। इसलिए नरगिस को स्व. महबूब खान पर बड़ा अंधविश्वास था। उन्होंने भड़काने वालों से स्पष्ट कह दिया, महबूब खान ही मेरे भाग्य विधाता हैं। वह मुझे जो भूमिका देंगे उसे स्वीकार करना मेरा कर्तव्य है। मेरा हित उनके हाथों में सुरक्षित है।

और ‘मदर इंडिया’ बनकर जब रिलीज हुई तो स्व. महबूब ने नरगिस की श्रृद्धा को साकार कर दिखाया। ‘मदर इंडिया’ में नरगिस का अभिनय इतना जीवंत था कि उसकी प्रशंसा देश-विदेश में हर कही हुई देश में नरगिस को सर्वप्रथम ‘पद्म श्री’ की उपाधि से अलंकृत किया गया और विदेश में (शायद कारलोवेरी में) सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला।


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Mayapuri

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