‘‘सभी सूफी गायक ईश्वर के बंदे हैं.’’ आबिदा परवीन

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‘कलर्स’ व ‘सहारा वन’ चैनल पर प्रसारित हो रहे रियालिटी शो ‘सुरक्षेत्र’ में जज की भूमिका में मशहूर पाकिस्तानी सूफी गायिका आबिदा परवीन जज के रूप में नजर आ रही हैं। उन्होंने भारत व पाकिस्तान दोनों देशों की संगीत प्रतिभाओं को एक साथ जज करने की चुनौती स्वीकार की है। यूं तो ‘सुरक्षेत्र’ का फिल्मांकन दुबई में किया गया है। लेकिन इसके प्रमोशन के लिए पाकिस्तान से आबिदा परवीन खास तौर पर मुंबई आयीं थी, तब उनसे हुई बातचीत इस प्रकार रही..

॰ आपका भारत आना काफी कम होता है?

– जी हाँ! मेरा आना बहुत कम होता है. क्योंकि मैं पूरा विश्व घूमती रहती हूँ।

॰ ‘सुरक्षेत्र’ से जुड़ने का फैसला करते समय आपके दिमाग में क्या था?

-मुझे तो संगीत के कार्यक्रम ने जुड़ने के लिए तैयार कर दिया। मेरा मानना है कि संगीत भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के लोगों को आपस में जोड़ता है। संगीत को किसी भी भाषा या देश की सरहदों की सीमा में नहीं बांधा जा सकता. जब जी टीवी पर ‘छोटे उस्ताद’ प्रसारित हुआ था, तब भी इस शो के साथ कुछ पाकिस्तानी कलाकार जुडे़ थे और इसे लोगो ने भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी बहुत पसंद किया था। मुझे पूरा यकीन है कि ‘सुरक्षेत्र’ को पूरी पाकिस्तानी आवाम इस शो को देखना चाहेगी। क्योंकि संगीत को लेकर भारतीय व पाकिस्तानी आवाम में हमेशा उत्साह नजर आया है। यह संगीत से जुड़ा कार्यक्रम है। इस कारण मैं इस कार्यक्रम के साथ जुड़ी। मुझे लगा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से मैं भारत व पाकिस्तान के अपने तमाम प्रशंसकों के बीच पहुंच सकती हूँ. दूसरी बात मुझे इसका फार्मेट बहुत पसंद आया। मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के बीच प्यार, मोहब्बत और शांति का पैगाम पहुंचाना चाहती हूँ।

॰ लेकिन ‘सुरक्षेत्र’ तो भारत और पाकिस्तान दोनों देशों की प्रतिस्पर्धी टीम से युक्त संगीतमय रियालिटी शो है?

– हर कोई एक जैसा है। हम एक जैसे दिखायी देते हैं। इसलिए मुझे कुछ भी अजीब सा नहीं लगा। अब तक हमें अच्छी प्रतिक्रियाएं ही मिल रही हैं. इस शो के साथ तमाम पाकिस्तानी म्यूजिशियन भी जुडे़ हुए हैं. मशहूर पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम पाकिस्तानी टीम के मेंटर हैं. लेकिन कहीं न कहीं प्रतिस्पर्धा भी है. जब से यह शो बनना शुरू हुआ है, तब से लोग मुझसे पूछते आ रहे हैं कि किसकी जीत होगी?

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॰ इस शो की प्रतिभाओं को जज करते समय किन बातों पर ध्यान दे रही है?

– सुर, लय और अल्फाजों की अदायगी के आधार पर ही मैं जजमेंट कर रही हूँ। मेरा मानना है कि एक गायक के लिए शब्दों को उसके महत्व के साथ उच्चारित करना बहुत आवश्यक होता है।

॰ इस षो की शूटिंग के लिए भारत या पाकिस्तान की बजाय दुबई को क्यों चुना गया?

– इसका सही जवाब तो कार्यक्रम के निर्माता दे सकते हैं। यदि मुझे शूटिंग के लिए मुंबई बुलाया जाता, तो मैं मुंबई आती। आज भी मैं आपके सामने मुंबई में ही हूँ।

॰ आपके अनुसार इन दिनों सबसे अच्छा सूफी गायक कौन है?

– इसका निर्णायक करने वाली मैं कौन होती हूँ? सभी सूफी गायक ईश्वर के बंदे हैं. सूफी गायन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सीधे ईश्वर से जुड़ा होता हैं. इसमें दर्द भी होता है, बंदगी भी होती है।

॰ क्या आप बॉलीवुड की फिल्मों में गाना पसंद करेंगी?

– क्यों नहीं? मुझे पहले भी कई आफर मिल चुके हैं, मगर अपनी दूसरी शाहरुख खान ने मुझसे फिल्म ‘रा वन’ में गाने के लिए संपर्क किया था। लेकिन उस वक्त मैं अपने कुछ दूसरे कार्यक्रमों में इस कदर व्यस्त थी कि उनके इस ऑफर को स्वीकार नहीं कर पायी थी। बीच में एक बार ए आर रहमान ने भी एक फिल्म में गाने का ऑफर दिया था। उस वक्त भी मैं अपनी व्यस्तताओं के चलते नहीं गा पायी थी। पर जब भी सही समय आएगा, मैं निश्चित रूप से फिल्मों में गाना पसंद करूंगी।

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॰ कोई नया एलबम आ रहा है?

– बहुत जल्द मेरा एक नया एलबम ‘या अली बू’ दिल्ली में एक समारोह के दौरान बाजार में आएगा, जिसमें ज्यादा तर परसीयन कलाम हैं।

॰ क्या वर्तमान समय में लोगो को परसीयन भाषा का यह एलबम पसंद आएगा?

– अल्लाह का दर्द को समझने के लिए आपके पास दिल चाहिए, भाषा की जरूरत नहीं पड़ती है। भजन या ईश्वर या अल्लाह की बंदगी की जरूरत के लिए जुड़ाव जरूरी हैं। शब्द मायने नहीं रखते। मेरा मुझमें कुछ नहीं, जो कुछ है सब तेरा है।

॰ आपको नहीं लगता कि पिछले कुछ समय में सूफी गायन के साथ साथ पूरी गायकी में काफी बदलाव आ गया हैं?

– मुझे तो इन दिनों पूरा बॉलीवुड सूफीयाना गायकों से प्रभावित नज़र आता है। मुझे अच्छी तरह से याद है, काफी समय पहले राबी शेरगिल मेरे पास आए थे, और उन्होंने मुझसे कहा था कि मेरी वजह से आज बॉलीवुड में सूफी गायकी बहुत नज़र आ रही है। मुझे यह सुनकर बड़ा अच्छा लगा था। मुझे खुशी भी हुई थी। दूसरी बात वक्त के साथ सिर्फ संगीत ही नहीं हर बात में बदलाव आता जाता रहता है।

॰ जब भी पाकिस्तान से कलाकार भारत आते हैं, तो कुछ न कुछ तनाव पैदा हो जाता हैं?

– मुझे नहीं लगता कि भारत व पाकिस्तान के कलाकारों के बीच कोई तनाव है। मेरा अनुभव तो यह है कि दोनों देशों के कलाकारों के बीच प्यार के साथ-साथ अपनापन है। कुछ समय पहले ही अलका याज्ञनिक और कुमार सानू पाकिस्तान आए थे।

बाक्स आयटम:

आबिदा परवीन को गायन की शिक्षा सबसे पहले उनके पिता ने दी। बाद में उन्होंने उस्ताद सलामत अली खान से संगीत सीखा। फिर वह दरगाही संगीत से जुड़ गयी। ‘जश्न ए खुशरू’ जैसे संगीत समारोहों में गाते गाते वह सूफी गायक के रूप में लोकप्रिय हो गयी।


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Mayapuri

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