चंचल लक्ष्मी – मैं तो तड़प रही हूं।

1 min


050 B-9 Lakshmi 2

मायापुरी अंक 50,1975

दक्षिण की चंचल अभिनेत्री लक्ष्मी ‘जूली’ क्या बनी है, लगता है भाग्य लक्ष्मी‘जूली’ बन गयी है। यह टिप्पणी थी ‘जूली’ के प्रदर्शन के अवसर पर तमिल के एक फिल्मी पत्र की। यह टिप्पणी कितनी सार्थक रही, हम नहीं जानते, पर इतना अवश्य है कि ‘जूली’ फिल्म की सफलता के साथ ही अभिनेत्री मुंबई की फिल्मी दुनिया में चर्चा का विषय बन गयी है। पर लक्ष्मी ‘जूली’ कैसे बनी?

वस्तुत: लक्ष्मी ने तमिल, तेलगू, मलयालम और कन्नड़ दक्षिण की सभी भाषाओं को 85 से अधिक फिल्मों में कार्य करने के बाद मलयालम फिल्म ‘चितक्कारी’ में मलयाली इंग्लो इंडियन इंजन ड्राइवर की भोली भाली मासूम चंचल जूली का इतना बेहतरीनरोल किया है कि दर्शक उसे जूली कह कर ही पुकारने लगे। यह भी संयोग की बात देखिये कि उसी मलयालम फिल्म का हिंदी रूपांतर भी ‘जूली’ के नाम पर ही हुआ और लक्ष्मी मुंबई की फिल्मी दुनिया में भी जूली कहलाने लगी।

मुंबई में आज कुछ लोग उसे जूली कह कर पुकारते हैं तो कुछ लोग उसे जूनियर जीनू यानी जीनत भी कहने लगे हैं। जब कि उनका कहना है कि मैं न जीनत हूं, न हेमा न रेखा, न परवीन बॉबी-बल्कि मैं स्वयं अपना खास किस्म का इमेज बनाना चाहती हूं।

लक्ष्मी ने मोहक मुस्कुराहट के साथ बड़े आत्मविश्वास से कहा मैं केवल ग्लैमर के लिए ग्लैमर रोल नहीं करना चाहती, सैक्सी रोल करने के लिए सैक्सी रोल नही करूंगी बल्कि ऐसे रोल करूंगी जिनमें लाइफ हो, कैरेक्टर हो।

तो क्या आप यह समझती है कि हिन्दी फिल्मों की नायिकाएं लाइफ लैस होती है?

इस सवाल पर लक्ष्मी थोड़ी देर के लिए खामोश रही। फिर अपनी हथेलियों की उंगलियों को जोड़ कर आंखो की भवें ऊपर चढ़ा कर खास अंदाज से इस तरह कहा जैसे वह किसी सीन में काम कर रही हो मैं इतना ही कहूंगी कि अक्सर हमारी हीरोइनों के रोल सुपर फिसियल होते हैं। कई फिल्मों में केवल उनका एग्जीबिशन होता है। मैं अपना एग्जीबिशन नहीं करना चाहती बल्कि किसी खास कैरेक्टर को पेश करना चाहती हूं।

यदि वह खास कैरेक्टर गूंगी, बहरी, अंधी काली कलूटी लड़की का हो तो?

लक्ष्मी ने मुस्कुरा कर कहा वाह तब तो कहना हो क्या। मैं इस तरह का रोल करने के लिए तो तड़प रही हूं।

पर इन भूमिकाओं में आपका ग्लैमर खत्म हो जायेगा?

नैवर माइंड आई वांट टू लिव फार एक्टिंग ऑनली-यस फॉर एक्टिंग ऑनली…..!

मैं अपने सामने बैठी रूप लावण्य के साथ तराशी हुई लक्ष्मी को बार बार देख रहा था। क्या वही लक्ष्मी है जो एक बच्चे की मां होते हुए भी कुवारी की तरह लग रही है। यह सोचते ही लक्ष्मी के जीवन के साथ जुड़ी अनेक बातें आंखो के सामने उभर आयी। वह दक्षिण की पहली हीरोइन है जिसने तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम आदि सभी भाषाओं की फिल्मों में विभिन्न तरह की भूमिकाएं कर अभिनय का रिकॉर्ड स्थापित किया है। उसने तमिल फिल्म ‘दिक्कतारा’ पार्वती में त्यागमयी पत्नी का अत्यंत ह्रदय स्पर्शी रोल किया गया जिस पर उसे 1963 में रिजनल फिल्म का अवार्ड मिला। दक्षिण की वह पहली हीरोइन है जिसे एक ही साल में तमिल और मलयालम दोनों भाषा की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रीके दो-दो फिल्म फेयर अवार्ड मिल चुके हैं। उससे कथानुसार इस स्थिति तक पहुंचने के लिए उसे जीवन में विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उसने बताया कि मुझे एक्टिंग का शौक मुझे बचपन से ही रहा है क्योंकि मेरी मां रूक्मिणी स्वंय दक्षिण की टॉप हीरोइन रही हैं, पर आश्चर्य इस बात का था कि कई दिनों तक मेरी ही मां ने मुझे फिल्मों में काम करने से रोका! फिल्मी माहौल का उनके जीवन पर शायद अच्छा असर नहीं पड़ा। इसीलिए जब भी मैं फिल्मों में काम करने की बात उनसे करती तो ऐसी झड़प पड़ती कि कई दिनों तक वह बात मेरे मुंह से नही निकल पाती। मां के विरोध के सामने मैं कुछ न बोल सकी और मन मसोस कर एक बड़ी फर्म में रिसेप्शनिस्ट बन गयी। अचानक एक दिन किसी पार्टी में मेरी मुलाकात दक्षिण फिल्मों से संबधित दो बड़े महारथियों मलयाम राजगोपाल और एस.बी. सहरमनायम से हुई। उन दोनों ने उन दोनों ने मुझे देखते ही पूछा, फिल्मों में काम करना चाहती हो? मैं क्या बोलती। मैंने सीधा उत्तर दिये बिना कहा, आप मेरी मां रूक्मिणी से मिलिये! वे दोनों चौंक पड़े तुम रूक्मिणी की बेटी होकर भी फिल्मों से अछुती… नो नैवर इम पॉशिबल कहते हुए वे चले गए और मैं खड़ी सोचती रही और मन ही मन मुस्कुराती रही कि जब वे मेरी मां के पास जायेंगे तब उन्हें क्या-क्या सुनना पड़ेगा? इस पार्टी के कुछ ही दिनों बाद वे दोनों मेरी मां से मिले पर उन्हें बराबर ना.. ना.. ना मिलता रहा। पर वे बार-बार आते रहे, पर वे भी खूब थे कि हताश नही हुए। पहले पिताजी ने हां भरी और तब मां भी उनके दबाव के सामने झुक गयी मैं तो फिल्मों में काम करने के लिए जैसे पहले से ही तड़प रही थी।

पहली फिल्म कौन-सी थी?

राजगोपाल की मलयालम फिल्म ‘जीवनामासम’ जिसमें मैंने टिनेजर लड़की की भूमिका की थी। वही से फिल्म जिंदगी की शुरूआत हुई और 1963 तक मैं फिल्मों में बस काम करती रही। रोल मिलते रहे और जैसा भी मिलता रहा। कभी मलयालम फिल्मों की हीरोइन बनती तो कभी कन्नड़ फिल्मों की, तो कभी तेलगू की। पर मुझे ऐसा कभी महसूस नही हुआ कि मैं किसी फिल्म मैं एक्टिंग कर रही हूं। लक्ष्मी अपनी बात पूरी भी नही कर पायी कि मैंने पूछा तो कौन-सी फिल्म थी जिससे आपको पहली बार महसूस हुआ हो कि आप एक्टिंग कर रही हैं।

वह फिल्म तमिल फिल्म थी ‘दिक्कतारा पार्वती’ जिसमें मैंने पहली बार महसूस किया, किसी कैरेक्टर की लाइफ मेरे जिस्म को छू रही है। जिस तरह बिजली के तार छूते ही शरीर में झनझनाहट होती है उसी तरह झनझनाहट मुझे इस रोल से हुई। इस फिल्म के बाद ही मेरे अभिनय जीवन में नया मोड़ आया।

मैंने पूछा करीब 85 दक्षिण भाषाओं की फिल्मों में कार्य करने के बाद हिंदी फिल्म ‘जूली’ में काम करने का ऑफर मिला उस वक्त आपको कैसा महसूस हुआ?

लक्ष्मी ने धीरे-धीरे बड़ी सावधानी से हिंदी के सही उच्चारण के साथ कहा हिंदी फिल्म में एक्टिंग करने का जब ऑफर मिला तो खुशी शरीर में दौड़ गयी। पर हां थोड़ी-सी झिझक थी। हिंदी सही न बोल सकने की यह। झिझक कुछ इसलिए भी थी कि दक्षिण की बहुत कम हीरोइनें मुंबई जाकर कामयाब हुई है। फिल्मी जीवन में तो कामयाबी पहली चीज है। कामयाबी से विश्वास-फेथ मजबूत होता है। पर इस फिल्म के निर्माता नागीरेड्डी ने मेरा हौसला बढ़ाया यदि वे मेरा हौसला नहीं बढ़ाते तो शायद में डगमगा जाती। पर ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं,हिंदी फिल्म में काम करने के लिए मैंने हिंदी भी खूब जम कर सीखी है और आपको यह पता ही है कि ‘जूली’ फिल्म मेरी हिट मलयालम फिल्म का ही रूपांतर थी एक यानी मैं अपना वही रोल पहले मलयालम फिल्म में कर चुकी थी इस वजह से भी मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई।

लक्ष्मी को सबसे बड़ी घबराहट है प्रैस के स्कैण्डलों की। स्कैण्डल की बात सुनते ही वह हाथ से मुंह छुपा लेती है। उसका कहना है कि हिंदी फिल्में प्रैस की तरह तामिल फिल्म प्रेस सनसनीखेज स्कैंडल्स से भरा रहता है।

लक्ष्मी चाहे मुंह छुपाये या बिगाड़े दक्षिण के सभी अखबारों में यह खबर बड़ी सुर्खियों के साथ छप चुकी है और बार-बार छप भी रही है कि लक्ष्मी तलाक लेकर पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से आये मोहन से नाता जोड़ रही है। इस खबर पर लक्ष्मी बहुत परेशान है। मैंने जब जानबूझ कर इस समाचार की ओर ध्यान दिलाया तो ओह माई गॉड कह कर उसने सिर पकड़े लिया जैसे सिर में दर्द की तेज लहर उठी हो उसके बाद उसने धीरे से कहा मोहन मेरे साथ एक नही, अनेक मलयालम फिल्मों के हीरो है मैं उनके साथ रोल करती हूं, घूमती हूं और कभी-कभी उछालते हैं। यह बड़ी गंदी बात है। कह कर इस बात का खण्डन तो कर दिया। पर फिल्मी अंचलो में यह तेजी से गुना जा रहा है कि ज्यों-ज्यों फिल्मों में उसे सफलता मिलती जा रही है, उसकी गृहस्थी में दीवार खड़ी होती जा रही है। स्कैण्डल्स की चर्चा से लक्ष्मी का चेहरा कुछ-कुछ मायूस हो गया। इसीलिए वातावरण को बदलने के लिए मैंने पूछा हिंदी फिल्मों में कौन-सा हीरो पसंद है?

लक्ष्मी ने मुस्कुरा कर कहा अभी तो मैं हिंदी फिल्मों में आयी हूं। अभी से बड़ी बातें करूंगी तो लोग क्या कहेंगे? मैं तो केवल इतना हो कह सकती हूं कि अच्छे निर्देशक के साथ अच्छी भूमिका करने का मौका मिले। डायरेक्टर और रोल पावरफुल होंगे तो सब ठीक हो जायेगा। मैंने फिर एक नाजुक सवाल किया क्या मुंबई की फिल्मी दुनिया में पब्लिसिटी से अपनी जगह बनाने के लिए न्यूड पोज देना पसंद करेंगी जैसा कि आजकल की नयी हीरोइनें कर रही है, लक्ष्मी ने तमक कर कहा नहीं नो नैवर जूली की कामयाबी ने मेरी पहले से खूब पब्लिसिटी कर दी है। मैं अपने रोल से जगह बनाना चाहती हूं यह कह कर लक्ष्मी कुर्सी से उठ खड़ी हुई और उसी के साथ तेज लैवेण्डर को महक फैल गयी। मैं ध्यान से उसके रूप लावण्य की ओर देखता रहा। वह हेमा की तरह सुंदर नहीं है, नही जीनत की तरह उसमें मादकता है, न परवीन बॉबी की तरह वह सैक्सी है, न रेखा को तरह वह चंचल और उद्दाम है, न नीतू सिंह की तरह उसमें बांकापन है, न व शर्मिला टैगोर है, न लीना चंदावरकर, न सुलक्षणा पंडित और न वह मौसमी चटर्जी है फिर भी दक्षिणी नाक-नक्श तराशा हुआ है और लगता है जैसे वह अजंता ऐलोरा की कोई प्रतिमा है। विवाहित होते हुए भी उसके रूप लावण्यमें किसी तरह की खरोंच नही आयी है। उसकी आंखो में अब भी कुंआरापन झलकता है और जब वह भरे पूरे मादकता के साथ हंसती है तो लगता है जैसे समुद्र तट पर लहरें बिफर बिफर कर मुस्कुरा रही हैं। दक्षिण के निर्माताओं का कहना है कि वहां सुंदर से सुंदर और मादक से मादक अभिनेत्रियों का उदय हुआ पर लक्ष्मी की तरह चंचल और मासूम हीरोइन अब तक देखने में नहीं आयी। उनका कथन कहां तक सही है यह उनकी आगे आने वाली हिंदी फिल्में ही बतायेंगी?


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये