मैं शादी करके रहूंगी – लीना चंदावरकर

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bolly_leena
मायापुरी अंक 53,1975
फिल्मिस्तान स्टूडियो में रंगीला के सैट पर लीना चंदावरकर से भेंट हो गई। हमने कहा
आप जिस रफ्तार से फिल्में साइन कर रही हैं, उससे लोगों के दिलों में आपकी शादी के बारे में शंका होने लगी है। क्योंकि हमने सुना था कि आप मार्च या जून में शादी कर लेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। क्या वाकई शादी खटाई में पड़ गई है?
आप अखबार वाले सिर्फ एक और एक दो के उसूलों पर चलते हैं। एक और एक ग्यारह भी तो हो सकते है। मैंने नई फिल्में साइन कर लीं तो आपने यह कैसे सोच लिया कि मेरी शादी खटाई में पड़ गई है, साइन की हुई फिल्मों का आपको पता है किंतु मैंने इस बीच लगभग छ: फिल्में छोड़ी हैं, उनकी आप को खबर नहीं। मैंने जब मंगनी का फैसला किया था तो किसी को नहीं बताया था और मंगनी कर ली थी। इसी तरह अब जबकि शादी निश्चित हो चुकी है तो वह भी होकर रहेगी। मुझे शादी करने से कोई नहीं रोक सकता। लीना चंदावरकर ने दृढ़ता के साथ कहा।
लेकिन सवाल यह है कि इतनी सारी फिल्में लेने के बाद आप शादी का समय निकालेंगी कब? यह सारी फिल्म 76-77 तक पूरी होंगी। हमने पूछा।
जी नहीं फिल्में अपनी जगह हैं और शादी अपनी जगह मैं उसी वर्ष दिसम्बर 75 में शादी कर लूंगी। लीना ने शादी की फिर एक नई तारीख बताते हुए कहा।
इसका मतलब है आप शादी के बाद भी फिल्मों में काम करती रहेंगी। क्या इससे आपकी गृहस्थी प्रभावित नहीं होगी? हमने पूछा।
सवाल ही पैदा नहीं होता सिद्धार्थ एक बिजनेस मैन हैं उनका एक पांव गोवा और एक मुंबई में रहता है। इससे मैं घर में अकेली रह जाऊंगी। अकेली मैं घर में बोर होंने से फिल्मों में काम करने की प्राथमिकता देती हूं। शादी के बाद दो-तीन फिल्में करने में कोई हानि नहीं है। इससे मेरा घरेलू जीवन भी प्रभावित नहीं होगा और दिल भी लगा रहेगा। मेरी इस बात से सिद्धार्थ सहमत हैं। इसलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे विवाहित जीवन में शांति और संतोष का वातावरण बना रहेगा लीना चंदावरकर ने बताते हुए कहा।
लगाम के सैट पर फिल्म के निर्माता एस.पी. मल्होत्रा मिल गए। हमने पूछा लगाम आपकी पहली फिल्म है या इससे पूर्व भी कोई फिल्म बना चुके हैं?
1963 में पंजाबी में एक फिल्म ‘मामा जी’ बनाई थी। जिससे इंद्रा बिल्ली और गोपाल, सहगल ने काम किया था। मल्होत्रा साहब ने बताया शायद उसी में यह गाना था तेरी दो टकिया दी नौकरी में मेरा लाखों दा सावन जाए। उसी को मनोज कुमार की फिल्म में धुन समेत रख दिया गया है। क्या आपने उस पर कोई आपत्ति नहीं उठाई? हमने पूछा।
हम छोटे लोग कुछ नहीं कर सकते करेंगे तो बड़े लोग हमी पर उंगलियां उठाने लगेंगे। इसलिए सब्र किया है यह सोचकर कि लड़ाई-झगड़े के लिए समय भी कहां है? 12 वर्ष बाद पुन: फिल्मों में आने का ख्याल कैसे आया? हमने पूछा।
पटियाला में मैं और निर्देशक देश गौतम साथ-साथ पढ़ते थे। हम साथ में ड्रामे भी स्टेज पर किया करते थे। मैं झगड़े करने में बड़ा एक्सपर्ट था देश प्ले डायरेक्ट किया करते थे। तभी हमारी आपस में बातचीत हुई थी। मामा जी मुझे काफी नुकसान हो गया था मैंने देश से कहा था कि मैं निर्माता बन गया तो उसे डायरेक्टर का चांस दूंगा और देश ने कहा था कि मैं निर्देशक बन गया तो तुम्हारे लिए फिल्म जरूर डायरेक्ट करूंगा। और आज हम उसी बात को निभा रहे हैं। मल्होत्रा जी ने बताया।
आपका किस उद्देश्य से फिल्में बनाना चाहते हैं? हमने पूछा।


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Mayapuri

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