अपुन को इश्टोरी फिश्टोरी नही मांगता

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k-p-saxena

 

मायापुरी अंक 12.1974

हाहाकारी फिल्म प्रोड्यूसर छोला भाई भठूरा भाई कैन्टीन वाला की दोनों आंखे गैस के हंडों जैसी भक से जल उठती थी और वह पास बैठी साइड हीरोईन गुलबन्फशा के गुदगुदे कन्धे पर घौल मार कर पीक से सने दांत निपोर देता था

‘खन्जर भाई, तुम मेरे को साला सीन सुनाओ इश्टोरी-फिश्टोरी अपुन पीछू देखेंगा सीन साला कड़क हो और इश्टोरी खलास भी होवे तब भी चलेगा

‘पन सेठ, अबी इश्टोरी नई होयेगां तो फिल्मं का स्क्रीनप्ले कैसे माफक चलेगा कथाकार ‘खन्जर’ बिजनौरी ने अपने तेल से चिकने लम्बे बालों में यों अंगुलियां घुमाई जैसे बालों में जुएं और स्टोरी साथ-साथ ढूंढ रहा हो।

‘भाड़ में गई इश्टोरी गुलबन्फशा की जान कसम, सीन कड़क होवे तो अपुन पन्द्रह वीक का रन बिना पब्लिसिटी के निकाल देगा पीछू, देखो, हम देवर भाभी’ बनाया समाजिक माने सोशल फिल्म थी बीस हफ्ते बिना लंगलड़ाए निकाल ले गई गंगा जी कसम अपनी गुलबन्फशा का ए-वन धांसू काम था पट्ठी ने ऐसा माफिक पोज दियेला था कि सुसरा कैमरा गरम होके दहकने लगा और अक्खी पब्लिक को मारे मस्ती के छींके आने लगी थी कही कोई इश्टोरी पब्लिक सुसरी ढाई रुपया इश्टोरी वास्ते नही देती बस छोकरी थोड़ी फड़क जाए और कैमरा कड़क जाए बस लो जी डिश्टरीब्यूटर बच्चा ऐसे माफिक गिरेगा जैसे पब्लिक डालडे की दुकान पे थोड़ी बहुत इश्टोरी भी होवे तो कोई हरज नई पन मेन चीज सुसरी सैक्स है सीन सुनाओ मेरे को खन्जर भाई

‘लो जी, सुनो आगे स्टोरी मोड़ लेती है……

‘फिर वह स्टोरी अपुन बोलता कि मोड़ हिरोईन लेती है इश्टोरी फेंको गटर में…

‘लो जी, फेंक दी राइटर ‘खंजर’ बिजनौरी ने नोटों के नशे की झोंक में स्टोरी की स्क्रिप्ट पीकदान में ठूंस दी और बिना लगाम चालू हो गया

हीरोईन कॉलेज से लौटी है बाप ऑफिस गया है, मां मन्दिर हीरोईन के मन में प्रेम का वोल्टेज हाई हो रहा है…

‘हीयां पे एक गाना डाल दो सेठ उचक कर उकडूं बैठ गया।

‘थोड़ा ठहरो, सेठ अबी सिच्चुएशन आने दो अकेले क्या अपने तोते या कुत्ते के साथ आयेगी गाने में इश्टोरी आई मीन सीन आगे बढ़ता है हीरोईन कपड़े बदल रही है धोखे से खिड़की खुली रह गई है..’

‘अभी वह बेचारी आधे-अधूरे कपड़ों में ही है कि धड़ाम से रोशनदान के रास्ते विलेन आ गिरता है धर-पकड़ करता है हीरोईन रोती गिड़गिड़ाती है और विलेन दांत निपोर कर डॉयलाग मारता है

‘कहां है तेरा भगवान अब मेरा भगवान भी तुझे नही बचा सकता गुलबन्फशा ने तुरंत डॉयलाग जोड़ दिया

हें हें हें देखो बेबी, अबी यह डायलाग बहुत पुराना हो गया तीन सौ सत्ताइस फिल्मों में रिपीट हो गया अपुन डायलाग राइटर ‘जख्मी’ मुरादावादी को बोलेगा कि इदर में कोई नवा फड़कदार डायलाग दे मारे

‘आगे बोलो….आगे बोलो…अपुन तेरे को अब्बी ऐडवांस रोकड़ का चेक काटने को मांगता सेठ ने मूड में आकर गुलबन्फशा की अखियों में अखियां डाल कर कहा।

‘आगू छीना झपटी…लप्पा डुग्गी होती है हीरोइन खुद को बचाने के लिए 60 किलोमीटर की रफ्तार से कमरे मे भाग रही है विलेन 80 किलोमीटर की स्पीड से उसका पीछा कर रहा है और कैमरा 100 किलोमीटर स्पीड से धायं धायं क्लोज अप ले रहा है एक रील निकल जाती है कभी हीरोईन आगे…कभी विलेन आगे तभी हीरो धड़ाम से खिड़की से कूदता है और पैंट की बैल्ट पर दोनों हाथ टेक कर डायलाग मारता है..

‘कमीने…कुत्ते तेरी यह मजाल बेसहारा लड़की पर हाथ उठा रहा है गुलबन्फशा ने अंगड़ाई लेकर डायलाग जोड़ा।

‘नही बेबी यह डायलाग भी पुराना होके खल्लास हो चुका अपुन इदर मे कोई नया डायलाग देने की मांगता खन्जर ने आंखों ही आंखों में बेबी को चुमकर कर कहा।

‘वाह खन्जर साहब, वाह बॉक्स ऑफिस अबी इदर में तगड़ी ढिशुम ढिशुम फाइट डालो हीरोईन के फटे कपड़ो को क्लोज अप दो दो रील निकल गई बाकी सुनाना मुनीम जी से अपने एडवांस का 10 हजार का चेक ले लो धासू सीन लिखेला है अबी अपुन गुलबन्फशा से थोड़ा सीन के बारे में डिस्कस करने को मांगता

खन्जर बिजनौरी चेक लेकर बाहर आ गया उधर सेठ छोला जी भठूरा जी कैन्टीन वाला साइड हीरोईन को बिना कैमरे के सीन समझा रहा था और उधर ‘खन्जर’ के सीने में वह स्टोरी रह रह कर खन्जर जैसी चुभ रही थी जिसे उसने पूरे तीन महीने के मेहनत से लिखा था और पीकदान में ठूंस आया था


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Mayapuri

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