धर्मेन्द्र एक सच्चा इन्सान

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actgal1639

 

मायापुरी अंक 01.1974

आप किसी हीरो को फोन करें तो पता चलेगा कि साहब बाथरूम में है और संयोग से आप उन्हें कही पकड़ ले तो उनके पास समय नही होगा। यदि बात करेंगे तो ऐसा दिखायेंगे जैसे कोई बहुत बड़ा अहसान कर रहे है। घरवालों को विशेष रूप से इस बात की ताकीद करेंगे कि यदि किसी लड़की का फोन आये तो उसे बता दिया जाए कि वह कहां शूटिंग कर रहे है। इस तरह उस हीरो के सैट पर लड़कियों की भीड़ लग जाएगी। हीरो एक समय पर लड़कियों से हंसकर बातें कर सकता है। लेकिन यूनिट के किसी अदना दर्जे के आदमी से बात करना वह अपनी शान के विरुद्ध समझता है। जब कभी उसे सैट पर भूख लगेगी तो वह किसी प्रसिद्ध चायनीज होटल से ही खाना मंगवाकर खायेगा। उसकी सेवा और प्रचार व प्रसारण के लिए खुशामदी टट्टू पीछे लगे रहेंगे।

इन स्टार्स और नायकों की भीड़ में एक अभिनेता धर्मेन्द्र भी है जो अपने को केवल इंसान समझते है शायद इसीलिए उसमें वह तमाम बातें नही है जो कि आज के नायकों या स्टार्स में पाई जाती है।

पिछले दिनों ‘मायापुरी परिवार को फिल्म ‘मैं आशिक हूं बहारों का’ के मुहूर्त पर बुलाया गया था। यह फिल्म राजेश खन्ना के सगे मामा के.के. तलवाड़ राजेश के एक दोस्त के साथ मिलकर फिल्म बना रहे है रविवार को दस बजे मुहूर्त रखा गया था। लेकिन दस बजे तक न ही फिल्म का हीरो राजेश खन्ना आए थे और न ही फिल्म की हीरोइन जीनत अमान सैट पर निर्माता-मामाजी के अतिरिक्त निर्देशक जे. ओम प्रकाश और धर्मेन्द्र ठीक समय पर पहुंच गए थे। हालांकि धर्मेन्द्र को केवल क्लैप देने थे लेकिन हीरो उसे कहते है जो कभी समय पर न आये और ऐसे समय पर जनता को अपनी अहमियत जताने के लिए प्रतीक्षा की आग में जलाए, मगर, धर्मेन्द्र में यह बात नही है।

धर्मेन्द्र तो ऐसा अजीब एक्टर है कि सन.एण्ड सैन्ड होटल में उनकी फिल्म ‘लोफर’ की सिल्वर जुबली का समारोह था और वह मोहन स्टूडियो में विमल राय प्रोडक्शन की फिल्म ‘चैताली’ की शूटिंग कर रहें थे। उन्होंने निर्माता से साफ-साफ कह दिया था कि वह साढ़े दस बजे से पूर्व समारोह में न आ सकेगों क्योंकि दस बजे फिल्म की शूटिंग खत्म होगी और उसके बाद ही वह पार्टी में आयेगा।

धर्मेन्द्र असल में बड़े भावुक हीरो है। विमल राय ने शुरू में उन्हें ‘बन्दिनी’ में चांस दिया था। उस एहसान को वह भूलें नही। अब जब कि विमल राय परिवार की फिल्म पूरी करवा रहें है। उनके भाई अजीत ने ‘लोफर’ की पार्टी में ही बताया था कि भाई साहब बहुत भावुक है। विमल राय प्रोडक्शन की शूटिंग के समय वे किसी से समझौता नही करते। पिछले दिनों मेरी फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ का बड़ा भव्य सैट लगा हुआ था किन्तु किसी कारणवश काम पूरा न हो सका था। एक दो दिन धर्म भाई साहब और मिल जाते तो काम हो जाता किन्तु भाई साहब ने आगे डेट देने से इंकार कर दिया और अगले दिन ‘चैताली’ कि शूटिंग की कौन है जो दूसरों के लिए अपने पैसे का नुकसान करे।

धर्मेन्द्र के घर पर फोन करें तो आपको ठीक-ठीक जवाब मिलेगा। कभी यह नही पता चलेगा कि हीरो पिछले तीन घंटे से बाथरूम में ही बन्द है (जैसे कि आमतौर पर दूसरों के साथ होता है) वह जब आपसे मिलेगें तो इस अन्दाज से मिलेगें जैसे आपको बरसों से जानते है। आपको अजनबीपन का अहसास नही होने देगें। सैट पर हो या घर पर आपकी पूरी इज्जत करेगा। एक बार तो ऐसा हुआ कि वह कही आउटडोर शूटिंग कर रहा थे। अवकाश के समय में वह दूसरे साथियों के साथ बैठा ताश खेल रहे था। लोकेशन पर भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस भीड़ को हटाने में लगी हुई थी और इसी चक्कर में वह दो कॉलेज के लड़कों को पकड़ कर लें जो रही थी। धर्मेन्द्र को पता चला तो वह इंस्पैक्टर के पास गया और लड़कों को छुड़ाया। उनसे क्षमा याचना की कि उसके कारण उन्हें यह तकलीफ उठानी पड़ी।

धर्मेन्द्र शो बिजनेस में विश्वास नही रखते। यही वजह है कि उनके इर्द गिर्द चमचों की भीड़ आपको नजर नही आयेगी। उनका कोई पी.आर.ओ. नही है जो उनकी पब्लिसिटी के लिए नित नए स्कैन्डल छेड़ता रहे। आज वह नम्बर वन के हीरो है, सुपर स्टार है। मगर वह न अपने मुंह से कभी कहते है और न ही इसकी पब्लिसिटी करते है। हद तो यह है कि लोग एक फिल्म के हिट होते ही अपनी कीमत बढ़ा लेते है किन्तु धर्मेन्द्र सुपर स्टार होने पर भी वही कीमत ले रहें है जो आजसे तीन साल पहले लेते थे।

धर्मेन्द्र की सादगी और भलमनसाहत का यह आलम है कि वह जिस फिल्म में काम करते है, वहां फेमिली मेंम्बर की तरह काम करता है। निर्माता-निर्देशक देवेन्द्र गोयल की फिल्म ‘एक महल हो सपनों का’ की शूटिंग गोयल साहब के बंगले पर हो रही थी। शाम को शूटिंग समाप्त होते-होते उन्हें भूख लगने लगी तो वह सीधा किचन रूम में घुस गये और अण्डे का आमलेट बना कर खाने लगें।

अब आप ही बताइये कि क्या धर्मेन्द्र को हीरो कह सकते है? कौन इन बातों को देखकर विश्वास करेगा कि वह भी सुपर स्टार है? यही सादगी असल में धर्मेन्द्र को बनाये हुए है वरना उनके सामने कितने ही सुपर स्टार आये और देखते-देखते गायब हो गए। लेकिन धर्मेन्द्र आज भी किसी चट्टान की तरह जमे हुए है।


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Mayapuri

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