हमारी फिल्म ‘बिटवीन माउंटेंस” में जुबिन नौटियाल द्वारा स्वरबद्ध अमरीकन शैली के गीत को सुनकर किसी को यकीन ही नहीं हो रहा कि जुबिन नॉन अमरीकन हैं-अमित सरीन

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“पवित्र रिश्ता” फेम अभिनेता अमित सरीन अपनी हॉलीवुड फिल्म ‘‘बिटवीन माउंटेंस’’ को लेकर उत्साहित हैं, जो कि आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित है। अमित सरीन की पत्नी विनीशा अरोड़ा सरीन निर्देशित इस फिल्म में जुबिन नौटियाल ने एक गाना गाया है।

यू इस संबंध में अमित सरीन ने कहा- “विनीशा ने खुद जुबिन से संपर्क किया, क्योंकि वह फिल्म में मेरे चरित्र जॉनी मॉरिस का एक नरम पक्ष दिखाना चाहती थीं, जो अपने जीवन में नुकसान के कारण दर्द में है। जुबिन को लगभग तुरंत कहानी पसंद आई और वह फिल्म से जुड़ गया। इस गीत के लेखक व संगीतकार नैशविले के एक स्वतंत्र संगीतकार स्कॉट ट्यूरेक हैं, जिन्होंने इस फिल्म के साथ हॉलीवुड में भी प्रवेश किया है। ‘व्हील्स ऑफ कर्मा’ नामक यह गीत एक अमरीकी लोक, प्रेरणादायक शैली का है। इस गीत को सुनकर लोगों को यकीन ही नहीं होता कि इसे किसी गैर अमरीकी गायक ने गाया है। जुबिन नौटियाल ने बहुत खूबसूरती से इसे स्वरबद्ध किया है।”

तो जुलाई माह में लॉस एंजिल्स में जब इसका विश्व प्रीमियर हुआ था, तब लोगों ने इसे काफी सराहा था। इस संबंध में अमित सरीन कहते हैं- “यह जबरदस्त अनुभव था। हमारे लिए राहत की बात थी कि सभी लोगों ने हमारी फिल्म की प्रशंसा की। सभी फिल्म और फिल्म के संदेश को समझकर उछल पड़े। इस फिल्म को देखने के लिए हॉलीवुड की कई गणमान्य हस्तियां मौजूद थीं। कुछ लोगों ने फिल्म की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘‘यह तो चलचित्र में कविता है। और यह एक ‘दृश्य भावना‘ है, ‘मुख्य अभिनेता ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरी फिल्म को चमका दिया। वगैरह वगैरह”

अपनी फिल्म की विषयवस्तु के महत्व की चर्चा करते हुए अमित सरीन ने कहा- “हम मानसिक स्वास्थ्य को महत्व यह सोचकर न दें कि वह उसका हकदार है। कुछ वर्जनाओं के कारण लोग अपनी वास्तविक मानसिक स्थिति के बारे में बात करने में बहुत असहज होते हैं। हम सबसे चुनौतीपूर्ण समय में जी रहे हैं जिसे हमारी पीढ़ी ने देखा है। किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति अपने दिल की बात कहना ठीक है जिस पर आप भरोसा करते हैं और जिसकी आप परवाह करते हैं। अपनी सच्ची भावनाओं के बारे में बात करना ही चाहिए। हर किसी को अपनी आंतरिक भावनाओं को पहले से कहीं अधिक साझा करना चाहिए, ताकि वह अवसाद के उस बिंदु पर न आएं जो कुछ मामलों में आत्महत्या का कारण बन सकता है। और यह सब निवारक है। यह फिल्म के मुख्य टेकअवे में से एक है।”

कान्स, फ्रांस में आयोजित वार्षिक कार्ल बर्दोश सेलफोन मानवतावादी पुरस्कार तथा 9 वें वार्षिक एएफआई वर्ल्ड पीस इनीशिएटिव में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार भी जीत चुके अमित सरीन, अपनी पत्नी विनीशा के निर्देशन में इस फिल्म में अभिनय करने के संदर्भ में कहा- “एक दूसरे को जानने के तरीके से हमें अभिनेता और निर्देशक के घातक और अद्वितीय संयोजन का निर्माण करने में मदद मिली, जो सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे के दिमाग को पढ़ सकते हैं। वह बेहद प्रतिभाशाली हैं और जीत हासिल कर रही हैं। इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ कथा फीचर फिल्म का पुरस्कार अपने लिए बोलता है। वह एक शानदार कहानीकार हैं, जिसमें संगीत की उत्कृष्ट भावना के साथ दृश्य उपचार के लिए एक आंख है।”

अमित सरीन आगे कहते हैं- “फिल्म के प्रीमियर के दौरान हमारे मुख्य अतिथियों में से एक सेल फोन सिनेमा और पुरस्कारों के संस्थापक प्रोफेसर कार्ल बर्दोश ने प्रीमियर की रात कहा कि विनीशा ने उन्हें ‘एल मारियाची’ के लेखक, निर्माता, एडीटर और निर्देशक रॉबर्ट रोड्रिगेज की याद दिला दी। उन्होंने विनीशा को एक ‘पावरहाउस’ की संज्ञा दी। इस फिल्म को ‘वन ओमन आर्मी’ ने गढ़ा है। इसलिए मुझे लगता है कि यह बहुत कुछ कहती है।”

विनीशा ने इस फिल्म की शूटिंग, लेखन और निर्देशन पिछले  साल उस वक्त किया, जब कोरोना महामारी चरम सीमा पर थी। लोग लॉस एंजिल्स में सख्त तालाबंदी का सामना कर रहे थे। खुद अमित सरीन बताते हैं-‘‘इसका निर्माण योजना बनाकर नहीं किया गया। हम बस एक पारिवारिक छुट्टी पर गए थे, जो एक फिल्म में बदल गई! इसलिए कोई पूर्व-योजना, स्थान स्काउटिंग या यहां तक कि स्क्रिप्टिंग भी पहले से नहीं की गई थी। विनीशा को पता था कि वह मेरे साथ यादृच्छिक दृश्यों की शूटिंग के बाद क्या शूट करना चाहती थी। यह एक सहज फिल्म थी अगर कभी हो सकती है। लेकिन हमने इसे प्रबंधित किया, उसने अपने फोन पर शॉट्स लिए क्योंकि छुट्टी पर कोई वास्तविक उपकरण नहीं था। उसने प्रकृति का यथासंभव उपयोग किया, जैसे कि प्रचुर मात्रा में सूरज की रोशनी जिसे हम कभी-कभी मान लेते हैं। वह प्राकृतिक प्रकाश स्रोत बन गया। एक भी अन्य चालक दल के सदस्य के बिना शूटिंग करना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन हमने इसे खींच लिया। उसने मुझे निर्देशित किया, मैंने अभिनय किया। यह वही है जो चरित्र में कच्चापन लाता है। यहां तक कि मैं उन सभी भावनाओं के स्तर पर आश्चर्य चकित था, जिन्हें मैं बिना अतिरिक्त उपकरण और योजना के छू सकता था। यह वास्तव में काफी मुक्तिदायक था। और यही इस फिल्म का आकर्षण है।’’

विनिशा ने पहली बार किसी फीचर फिल्म का निर्देशन जरुर किया है, मगर इससे पहले वह कई शोर्ट फिल्मों का निर्देशन कर चुकी हैं।

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Mayapuri