प्यार रोमांस तथा मौज मस्ती यानि “लवशुदा”

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रेटिंग***

इस बार निर्देशक वैभव मिश्रा ने फिल्म “लवशुदा” में प्यार का नया फंडा बताते हुये कहा कि अगर आप दिल से खुश नहीं हैं तो आपका चेहरा इस बात की खुल कर चुगली करता है। इस सिचुएशन में आप प्यार तो क्या और भी कुछ नहीं कर सकते।

कहानी

गिरीश कुमार यानि गौरव मेहरा बचपन से ही पूरी तरह अपनी बहन गरिमा त्रेहान यानि टिस्का चोपड़ा पर आश्रित है। लिहाजा उसके बड़े होने तक उसे अपनी बहन के इशारों पर ही चलना होता है। इस बात को लेकर वो हमेशा कुढ़ता रहता है लेकिन वो उस वक्त भी कुछ नहीं कह पाता जब उसकी बहन ने ही उसकी शादी तय कर दी है। लड़की को नापसंद करते हुये भी बहन से उसकी ना कहने की हिम्मत नहीं है। सगाई से एक दिन पहले वो अपने दोस्तों के साथ बैचलर पार्टी एंजॉय करने एक पब में जाता है। वहां उसकी मुलाकात नवनीत ढिल्लन यानि पूजा से होती है। शराब के नशे में वो अपने और अपनी होने वाली बीवी के बारे में सब सच बोल जाता है। बाद में दोनों ही भावनाओं के वेग में हम बिस्तर हो जाते हैं। गौरव की शादी हो जाती है लेकिन वो ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाती। इसलिये तलाक हो जाता है। एक बार अपने दोस्तों के साथ गौरव बाहर घूमने जाता है तो एक बार फिर उसकी मुलाकात पूजा से हो जाती है तो पता चलता है कि उसी की तरह पूजा भी उसे नहीं भूल पाई थी। बेशक दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं लेकिन अब देर हो गई कहते हुये पूजा उसे कहती हैं कि वो उसे भूल जाये क्योंकि बहुत जल्द उसकी शादी होने जा रही है। उसके बाद जो कुछ होता है वो सब आप इससे पहले अनगिनत फिल्मों में देख चुके हैं।

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निर्देशन

विज्ञापन फिल्मों से आये निर्देशक वैभव मिश्रा की ये पहली फिल्म है। फॉरन में उसने शादी का माहौल ऐसे दिखाया है जिससे पता चलता है कि फॉरन में रिति रिवाजों को यहां से कहीं ज्यादा वहां रहने वाले लोग फोलो करते हैं। फिल्म में कुछ नई अनदेखी लोकेशन यूज की गई हैं। अपनी पहली फिल्म के हिसाब से वैभव शुरू से अंत तक फिल्म की रफ्तार को एक हद तक बांधे रखते हैं बावजूद इसके फिल्म कई बार बोझिल होने लगती है खासकर उन जाने पहचाने दृश्यों को लेकर जो इससे पहले न जाने कितनी बार फिल्मों में दिखाये जा चुके हैं। फिर भी पहली फिल्म के हिसाब से वैभव ने अच्छा काम किया है।

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अभिनय

अपनी पहली फिल्म से गिरीश कुमार कहीं ज्यादा मैच्योर नजर आये हैं। उन्होंने एक दबे हुये शख्स को काफी बेहतरीन तरीके से निभाया है। इमोशन और कॉमेडी में वे अच्छे लगते हैं। डांस में भी उनकी मेहनत साफ झलकती है। मिस इंडिया नवनीत ढिल्लन जितनी खूबसूरत हैं उतनी ही खूबसूरत उनकी हंसी है शायद इसलिये पूरी फिल्म में उसकी मुस्कुराहट का खूब उपयोग किया गया है। उसके अभिनय में सहजता है। टिस्का चोपड़ा ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया है। गिरीश के दोस्तों में नवीन स्तूरिया तथा सावंत सिंह प्रेमी ठीक रहे। इनके अलावा अपनी छोटी सी भूमिका में सचिन खेडे़कर अच्छे लगे।

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संगीत

फिल्म का संगीत फिल्म की हाइलाईट भी कहा जा सकता है क्योंकि पीने की तमन्ना, दोनों के दोनों सिंगल, टोटल टल्ली, चित्ता कुक्कड़ तथा मर जाये जैसे सभी गाने मौज मस्ती भरे हैं।

क्यों देखें

एक ऐसी फिल्म जिसमें प्यार की परिभाषा एक अलग ढंग से कहने की कोशिश की गई हैं। इसके अलावा डांस म्यूजिक और मौज मस्ती भरी ये फिल्म निराश नहीं करेगी।

 

 

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Mayapuri