मूवी रिव्यू: आवाम और राजनीति पर खुलकर कटाक्ष करती है ‘मदारी’

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रेटिंग***

आज जो भी देश में हो रहा है उसे जानते हुये भी आम आदमी उनसे अंजान बना रहने पर मजबूर है और अपने साथ हुये न्याय अन्याय को भाग्य का लिखा मान कर चुप्पी साधे हुये है । निशिकांत कामत निर्देशित फिल्म ‘मदारी’ में ये सारे सवाल एक हादसे का शिकार हुये आम आदमी द्धारा सरकार और उसके नुमाईंदों से मांगने की हिम्मत दिखाई गई है।

कहानी

एक आम आदमी निर्मल कुमार यानि इरफान अपने सात वर्षीय बेटे के साथ संतोष भरी जिन्दगी गुजार रहा है। देश में हो रहे भ्रष्टाचार या बदअमनी को नजरअंदाज करते हुये वो अपने बेटे के साथ खुश है। अचानक उसका बेटा एक पुल के नीचे आकर मारा जाता है। इसके बाद वो देश के ग्रह मंत्री के बेटे को अगुआ कर कुछ सवाल करने के लिये सरकारी नुमाइंदों को अपने घर पर आने के लिये मजबूर करता है। इसके बाद एक चैनल के जरिये उन सभी सवालों के जवाब एक कान्ट्रेक्टर, ठेकेदार, उस हादसे के लिये जिम्मेदार मंत्री तथा ग्रहमंत्री से करता है जिन्हें पूरा देश सुनता है।

Madaari stills

निर्देशक

चूजे पर बाज झपटता है सच है लेकिन देखने में बुरा लगता है। बाज पर पलटवार होता है सुनने में अविश्वसनीय लगता है लेकिन भला लगता है। ये वाक्य आम आदमी निर्मल कुमार के मुंह से सुने जाते हैं। अपने साथ हुये हादसे के बाद वो बाज पर पटलवार वाले कथन को सार्थक करते हुये अपने कमरे में सारे अरोपियों को आने पर मजबूर करता है। और वहां उसके द्धारा किये गये सवालों के जवाब में जो असिलयत सामने आती है वह भयावह है। वहां ग्रह मंत्री का कहना है कि सच इतना डरावना है कि पूरा देश दहल जायेगा। सरकार भ्रष्ट है ये सच नहीं लेकिन सरकार के लिये भ्रष्टाचार है ये सच है। सरकार में जो सच्चे हैं उन्हें एक तरफ बैठा दिया जाता है और जो कमाकर दे सकते हैं उन्हें ही कुर्सियां सौपी जाती हैं आप कहते हो कि हम एक सो बीस करोड़ है। गलत यहां आपका गणित ही गलत हैं आप धर्म जाति के नाम पर बंटे हुये हो टुकड़ों टुकड़ों में। उसी का फायदा हम लोग उठाते हैं। तभी तो हम इतनी भारी संख्या वाले देश को अपने पैरो तले रौंद सकने में सफल हैं। क्लाईमैक्स का ये सीन रौंगटे खडे़ कर देने वाली सच्चाई से दर्शक को परिचित करवाता है। इसके अलावा फिल्म में कुछ और भी नया दिखाई देता है जैसे निर्मल कुमार द्धारा आज के हालात के बारे में नई पीढ़ी को जताना कि इसे समझने के लिये दस पंद्ररह साल लगेंगे लेकिन अंत में छोटा बच्चा उससे कहता है इतना वक्त नहीं लगेगा क्योंकि मैं ये सब आज ही समझ गया हूं।

madaari 9

निशिकांत ने धीमी रफ्तार से चलती इस फिल्म में सिनेमाई लिबर्टी का फायदा उठाते हुये और भी काफी कुछ कहने की कोशिश की है। इस तरह की बातें पहले भी कुछ फिल्में कहती पाई गई हैं लेकिन यहां ये सब बताने के लिये एक हद तक नये तरीके का इस्तेमाल किया गया है। जो प्रभावशाली न होते होते हुये सच्चा लगता है। फिल्म कुल दो पात्रों को लेकर शुरू से अंत तक चलती है। इनमें एक बच्चा है और एक व्यस्क। इनके बाद कई पात्र और आ जाते हैं। इरफान एक बहुत बड़ी रेंज का अभिनेता है निशि उनकी रेंज का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते। वरना उनका किरदार और ज्यादा उभरकर आ सकता था। बावजूद इसके फिल्म राजनैतिक सोच पर आधारित ऐसी फिल्म हैं जो आवाम और राजनीति पर खुलकर कटाक्ष करती है।

अभिनय

जैसा कि पता है इरफान बहुत बड़ी रेंज के अभिनेता हैं यहां उनकी रेंज के कुछ ही हिस्से का इस्तेमाल किया गया है। बावजूद पूरी फिल्म वे अकेले अपने कंधों पर ढोकर ले जाते हैं। जिम्मी शेरगिल एक पुलिस ऑफिसर के किरदार में हैं जो पहले से जाना पहचाना किरदार है लेकिन वे इतने अच्छे अभिनेता हैं कि उस बासी किरदार में भी रंग भरने में सफल साबित हुये हैं। मास्टर विशाल बंसल ने किडनैप हुये बच्चे को बढ़िया तरीके से निभाया है। ग्रहमंत्री की भूमिका में तुषार दलवी प्रभावी रहे।

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संगीत

बेशक फिल्म में विशाल भारद्वाज और इन्दर बावरा सनी बावरा का म्यूजिक है लेकिन फिल्म में दम दमा दम गीत ही आकर्षित करता है।

क्यों देखें

हम किस तरह के समाज में जी रहे हैं अगर उसकी सच्चाई जाननी हैं तो फिल्म अवश्य देखें।


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Mayapuri

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