संगीतकार मदन मोहन जिंदगी की कड़वाहट भी प्यार से सहते रहे!

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madanmohan1

मायापुरी अंक 52,1975

गजलों के सम्राट मदन मोहन मेरी भी एक फिल्म का संगीत दे रहे थे। उसकी मृत्यु के बाद मुझे उन्हीं के तरह अगर संगीत के माहिर दिखाई दिये तो वह जयदेव हैं। इसलिए उन्हें अपनी फिल्म के लिए अनुबंध करने के लिए मिला तो मदन मोहन जी के बारे में बातें चल पड़ी क्योंकि वे दोनों घनिष्ट मित्र थे।

बातों ही बातों में तीन दिन पहले, मदन मोहन जी की याद में टेलीविजन पर दिये गये प्रोग्राम के बारे में बातें चल पड़ी। इस प्रोग्राम को कैरेक्टर आर्टिस्ट मनमोहन कृष्ण ने पेश किया था और बोलने वाले थे गीतकार राजेन्द्र कृष्ण, निर्माता-निर्देशक राज खोसला और राजेन्द्र सिंह बेदी, तीनों ने उनकी याद में कुछ-न-कुछ कहा और आंसू बहाये।

जयदेव जी ने इनके बारे में बड़ी दिलचस्प बातें बताई। उन्होंने बताया, यह तीनों मदन मोहन जी के सच्चे प्रेमी बिल्कुल नहीं थे। राजेन्द्र कृष्ण, निर्माता निर्देशक राज खोसला और राजेन्द्र सिंह बेदी, तीनों ने उन याद में कुछ न कुछ कहा और आंसू बहाये।

जयदेव जी ने इनके बारे में बड़ी दिलचस्प बातें बताई। उन्होंने बताया, यह तीनों मदन मोहन जी के सच्चे प्रेमी बिल्कुल नहीं थे। राजेन्द्र कृष्ण के साथ तो उनके संबंध बहुत पहले ही टूट गए थे। राजेन्द्र कृष्ण की पीठ पर निंदा करने की आदत है। उन्होंने कहना शुरू कर दिया था कि उनके गाने उसकी वजह से हिट होते हैं। जब मदन मोहन जी को इस बात का पता चला तो दोनों ने इकट्ठे काम करना बंद कर दिया।

यह सब को अच्छी तरह मालूम है कि राज खोसला की कई फिल्में मदन मोहन जी के अच्छे संगीत के कारण ही हिट हुई हैं, जिनमें से ‘वह कौन थी’ ‘मेरा साया’ प्रमुख थी ‘चिराग’ भले न चली हो लेकिन संगीत हिट था। आज भी उसका गाना ‘तेरी आंखो के सिवा दुनिया’ में रखा क्या है भुलाया नही जा सकता। लेकिन जब मदन मोहन जी ने अपनी कीमत बढ़ाने के लिए राज खोसला से अनुरोध किया तो उन्होंने झट से दूसरा संगीत निर्देशक ले लिया।

राजेन्द्र सिंह बेदी की फिल्म ‘दस्तक’ में भी मदन मोहन जी ने हिट म्यूजिक दिया। फिल्म जब लगभग बन गई। तो संगीतकार मदन मोहन जी ने राजेन्द्र सिंह बेदी से कोई पंद्रह हजार रूपये लेने थे। उन्हें रूपयों की सख्त जरूरत थी क्योंकि वे लीनावाला में बंगाला बनवा रहे थे। राजेन्द्र सिंह बेदी ने कहना भेजा कि पैसे की बहुत तंगी है। छोटी पिक्चर हैं, वह दे नहीं पायेंगे। इसलिए भूल जाओ। मदन जी ने भी हालात को देखते हुए दुबारा मांग नहीं की। ‘दस्तक’ प्रदर्शित हो जाने के बाद चल निकली और सभी गाने हिट हुए। मदन जी चिट्टी भेजी कि अब तो उन्हें उनके बकाया पैसे मिल जाने चाहिए, लीजिए! अपना हक भी मांगना जैसे गुनाह हो गया। राजेन्द्र सिंह बेदी को यह अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अगली फिल्म के लिए एस.डी. बर्मन को ले लिया। यह सब सुनते हुए मेरे मन में प्रश्न उठा

तो क्या इन लोगों के आंसू मगरमच्छ के आंसू थे?

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Mayapuri