खुदा की खुदाई की सबसे खूबसूरत मिसाल है कोई शायर जो मधुबाला पर सबसे बेहतरीन गजल या शायरी कह सके?

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मधुबाला

शुक्र है भगवान का, जो सबसे असाधारण भारतीयों की नियति को भी तय और परिभाषित करते हैं, कभी-कभी सही निर्णय भी लेते हैं। वे ज्यादातर मामलों में अपना काफी समय भी लेते हैं, लेकिन ये शक्तिशाली लोग और क्या कर सकते हैं? क्योंकि वे खुद इतने सारे अन्य बुरे और नीचतापूर्ण और तुच्छ मुद्दों और समस्याओं से निपटने में बहुत व्यस्त हैं। –अली पीटर जाॅन

मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूं कि इस चमत्कार के लिए क्रेडिट का एक बड़ा हिस्सा मीडिया को जाता है
मधुबाला

अब, मधुबाला के मामले को ही देख लीजिए, जिन्हें बिना किसी विवाद के भारत में फिल्म के दृश्य को रोशन करने वाली सबसे खूबसूरत महिला के रूप में स्वीकार किया गया था। उनके पास एक शानदार कैरियर था लेकिन कुछ वक्त के लिए ही जिसके दौरान उन्होंने यह साबित कर दिखाया था कि वह अमरता के लिए बनाई गई थी। 1969 में मधुबाला की मृत्यु हो गई जब वह सिर्फ 36 साल की थीं और उनकी मृत्यु के लगभग चालीस साल बाद, भारतीय डाक विभाग ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी करने का फैसला किया। मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूं कि इस चमत्कार के लिए क्रेडिट का एक बड़ा हिस्सा मीडिया को जाता है, विशेष रूप से उन विभिन्न टेलीविजन चैनलों को, जो उनकी कुछ सर्वश्रेष्ठ फिल्मों का प्रसारण करते रहते हैं। वह मधुबाला कि फिल्मे जैसे ‘चलती का नाम गाड़ी’, ‘महल’ और आल-टाइम क्लासिक ‘मुगल-ए-आजम’ दिखाते हैं और सभी उम्र के लोग, यहां तक कि आज के किशोर भी अपने सोफे पर बैठे अराम से मधुबाला को देखते हैं, मधुबाला का अभिनय और सुंदरता उन्हें उनको दीवाना बना देती हैं और उनकी फिल्में उनका मनोरंजन ऐसे करती जैसे बहुत कम अभिनेत्रियां कर पाती है।

इस बात में कोई शक नहीं है की मधुबाला सबसे खूबसूरत हिंदी फिल्म हीरोईन थीं

मधुबाला

आज, उनकी फिल्मों की पहले से ज्यादा डीवीडी विक्रेता देश के हर कोने और यहां तक कि पाकिस्तान और खाड़ी के कई देशों में सबसे ज्यादा हैं। उनकी तस्वीरों की भी भारी मांग है, जो युवाओं द्वारा सभी हाई-फाई दुकानों में बेची जाती हैं। ‘मुगल-ए-आजम’ (जिसमें वह पृथ्वीराज कपूर और दिलीप कुमार जैसे अभिनेताओं के साथ नजर आई थी) के कलर वर्शन के बाद से उनकी अधिकांश फिल्मों की डीवीडी, उनकी तस्वीरों और ऑडियो कैसेटों की बिक्री दोगुनी हो गई थी। उनके सभी गाने, विशेष रूप से ‘महल’, ‘हावड़ा ब्रिज’, ‘चलती का नाम गाड़ी’ और इन में सबसे ऊपर ‘मुगल-ए-आजम’ के गाने सभी पीढ़ियों के लोगों को पसंद आते हैं। मधुबाला वह अभिनेत्री थी जिनके पास वो रेयर पॉवर थी जो डायरेक्टर्स को अपने बेस्ट सिनिमटागा्रफर के साथ काम करने के लिए प्रेरित करती थी, ताकि वह उनकी सुंदरता को अच्छी तरह से कैप्चर कर सके, और वह पॉवर दिव्य संगीत का निर्माण करने के लिए अपने बेस्ट, म्यूजिक डायरेक्टर्स और साॅग राइटर्स को लेने के लिए भी प्रेरित करती थी, ताकि यह गीत अमर हो सके। वह अपने सभी मेल स्टार्स को एक मेजर कॉम्प्लेक्स देने की शक्ति भी रखती थी। ऐसी कई महिलाएं हैं जो फिल्मों में आई और खुद को मधुबाला की तरह बनाने की कोशिश की, लेकिन उनमें से एक भी उनकी सुंदर आँखों की भौंह (आइब्राउ) तक भी नहीं पहुँच पाई।

इस फिल्म का मशहूर गीत “आएगा आनेवाला” आज तक उनका सिग्नेचर साॅग हैं!

इस बात में कोई शक नहीं है की मधुबाला सबसे खूबसूरत हिंदी फिल्म हीरोईन थीं और शायद साथ ही में वह अपनी खूबसूरती के साथ सबसे कम उम्र की अभिनेत्री भी थी जो अपने अभिनय और सुंदरता से सबका ध्यान आकर्षित करती थीं। वह कॉमिक टाइमिंग स्पॉट की अपनी समझ के साथ कॉमेडी में भी शानदार थी और वह फिल्म ‘अमर’ (1954) और ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) में हाई ड्रामेटिक कैलिबर के परफॉरमेंस के साथ आई थी।
बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘बसंत’ (1942) जैसी फिल्मों में मधुबाला ने बाल कलाकार ‘बेबी मुमताज’ के रूप में फिल्मी दुनिया में अपने करियर की शुरूआत की थी। यह किदार शर्मा ही थे जिन्होंने उन्हें ‘नील कमल’ (1947) में राज कपूर के साथ नायिका के रूप में ब्रेक दिया था।

मधुबाला

हालांकि यह बॉम्बे टॉकीज की सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘महल’ (1949) थी जिसमें मधुबाला एक स्टार बन गई थीं। इस फिल्म का मशहूर गीत “आएगा आनेवाला” आज तक उनका सिग्नेचर साॅग हैं! उन दिनों के टॉप लीडिंग मेल स्टार अशोक कुमार, रहमान, दिलीप कुमार, देव आनंद के साथ वह फिल्मों में काम किया करती थी, लेकिन 1950 के दशक के मध्य में जब महबूब खान के साथ उनकी फिल्म ‘अमर’ और उनकी अन्य कुछ प्रमुख फिल्में फ्लॉप हुईं, तब देश की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मधुबाला को ‘बॉक्स ऑफिस पोइसन’ घोषित कर दिया गया था। इसके अलावा, वह दिलीप कुमार के साथ जुड़ गई और बाद में वह अपने पिता के विरोध का सामना नहीं कर सकी और फिल्म ‘नया दौर’ के निर्माता ने उन पर कोर्ट केस कर दिया था।

फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में एक क्लब डांसर के रूप में मधुबाला कभी भी इतनी ज्यादा खूबसूरत या आकर्षक नहीं दिखीं
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हालांकि 1958-60 के दौर में उन्होंने कई हिट फिल्मों के साथ वापसी की थी जैसे- ‘फागुन’ (1958), ‘हावड़ा ब्रिज’ (1958), ‘काला पानी’ (1958), ‘चलती का नाम गाड़ी’ (1958) और इन सबसे उपर उनकी सबसे यादगार फिल्म निश्चित रूप से ‘मुगल-ए-आजम’ (1960) हैं।
फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में एक क्लब डांसर के रूप में मधुबाला कभी भी इतनी ज्यादा खूबसूरत या आकर्षक नहीं दिखीं, इस फिल्म के गीत ‘आईये मेहरबान’ में वह बेहद मोहक रूप में नजर आई थी। और उन्होंने ‘चलती का नाम गाड़ी’ फिल्म में किशोर कुमार के साथ कदम से कदम मिलाया था। हालाँकि यह ‘मुगल-ए-आजम’ थी जिसने उनके सबसे महान प्रदर्शन को दासी ‘अनारकली’ के रूप में देखा गया था। फिल्म में उनके अभिनय और सुंदरता को बारीक रूप से दिखाया गया था, यह एक आउटस्टैंडिंग फिल्म में उनका एक आउटस्टैंडिंग परफॉरमेंस था।
दुख की बात थी कि उनके दिल में छेद था और उनकी बीमारी उनकी जान लेने को तैयार थी। उन्होंने किशोर कुमार के साथ शादी की और 1969 में अपनी मृत्यु तक वह नौ साल तक विवाहित जिन्दगी जी।

मधुबाला

उन्होंने इस अवधि में ‘पासपोर्ट’ (1961), ‘हाफ टिकट’ (1962) और ‘शराबी’ (1964) जैसी फिल्मे की, लेकिन वे ज्यादातर पुरानी फिल्में थीं, जो रिलीज होने में सफल रही। वास्तव में, उनकी फिल्म ‘ज्वाला’ 1971 में उनकी मृत्यु के लगभग दो साल बाद रिलीज हुई थी! उन्होंने 1964 में राज कपूर के साथ वापसी करने की कोशिश की, लेकिन शूटिंग के पहले ही दिन सेट पर गिर गई और फिर फिल्म को रोक दिया गया था।

अनु- छवि शर्मा
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Mayapuri