महेश भट्ट

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हमेशा बोल्ड कंटेंट और बोल्ड विचार से ओतपोत रही महेश भट्ट की फिल्मे और लाइफ

 अर्थ, सारांश, जानम, नाम, सड़क, जख्‍म जैसी फिल्मो के निर्देशक महेश भट्ट आज 68  साल के हो गए हैं उनका जन्म आज के ही दिन यानि 20 सितम्बर 1948  को  बॉम्‍बे में हुआ था। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्‍मद अली है। भट्ट के पिता गुजराती ब्राह्मण थे और उनकी मां गुजराती शिया मुस्लिम थीं। उनके भाई मुकेश भट्ट भी भारतीय फिल्‍म निर्माता हैं। उनकी स्‍कूली पढ़ाई डॉन बोस्‍को हाई स्‍कूल, माटुंगा से हुई थी। स्‍कूल के दौरान ही उन्‍होंने पैसा कमाने के लिए समर जॉब्‍स शुरू कर दी थी। उन्‍होंने प्रोडक्‍ट एडवरटीजमेंट्स भी बनाए।

 महेश भट्ट को लोग बॉलीवुड के निर्देशक, निर्माता और स्‍क्रीनराइटर के रूप मए जानते हैं पर वो ज्‍यादातर फिल्‍मों में निर्माता और लेखक की भूमिका निभाते हैं और बॉक्‍स ऑफिस पर कमाई करने वाली फिल्‍मों में काम करते हैं जैसे जिस्‍म, मर्डर, वो लम्‍हे। उनके प्रोडक्‍शन विशेष फिल्‍मस की यह खासियत है कि उनके बैनर तले बनी फिल्‍मों के गाने सुपरहिट होते हैं और उनका संगीत दर्शकों मए काफी पॉपुलर होता हैं। भट्ट हमेशा नए टैलेंट को बढ़ावा देते हैं और उन्होंने कई टैलेंट बॉलीवुड को भी दिए हैं जैसे ,पूजा भट्ट,कंगना रानोवन्त,सनी लीओन,विपाशा बासु,अनु अग्रवाल,सुष्मिता सेन,उदिता गोस्‍वामी आदि ।

 यदि उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वो भी किसी फिल्म से काम नहीं उन्‍होंने किरन भट्ट (लॉरेन ब्राइट) से शादी की थी जिनसे उनकी मुलाकात स्‍कूल के दौरान ही हुई थी। इनके दो बच्‍चे हैं- पूजा भट्ट और राहुल भट्ट। उनके किरन के साथ रोमांस से ही प्रेरित होकर उन्‍होंने फिल्‍म ‘आशिकी’ बनाई लेकिन शुरूआती करियर में आई कठिनाईयों और परवीन बॉबी से चले उनके अफेयर की वजह से यह शादी ज्‍यादा दिनों तक नहीं टिक पाई। बाद में भट्ट अभिनेत्री सोनी राजदान के प्‍यार में पड़ गए और उनसे शादी कर ली। इनके भी दो बच्‍चे हैं- शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट।

26 साल की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशक के तौर पर फिल्‍म ‘मंजिलें और भी हैं’ से अपना डेब्‍यू किया। इसके बाद 1979 में आई ‘लहू के दो रंग’ जिसमें शबाना आजमी और विनोद खन्‍ना मुख्‍य भूमिका में थे, इसने 1980 के फिल्‍मफेयर अवार्ड्स में दो पुरस्‍क‍ार जीते। फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर औसत से ऊपर प्रदर्शन किया।उनकी पहली बड़ी हिट ‘अर्थ’ थी। इसके बाद उनकी ‘जानम’ और ‘नाम’ को भी काफी पसंद किया गया। ऐसा कहा जाता है कि इन फिल्‍मों से उन्‍होंने अपने व्‍यक्तिगत जीवन को पर्दे पर उकेरने की कोशिश की। फिल्‍म ‘सारांश’ को भी लोगों ने काफी पसंद किया और अनुपम खेर के जीवन की भी यह अहम फिल्‍म रही। सारांश को 14वें मॉस्‍को इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में भी एंट्री मिली थी।1987 में वे निर्माता बन गए जब उन्‍होंने अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ मिलकर ‘विशेष फिल्‍मस’ नाम से अपना प्रोडक्‍शन हाऊस शुरू कर दिया। हिन्‍दी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के वे जाने माने निर्देशक बन गए जब उन्‍होंने डैडी, आवारगी, आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, गुमराह जैसी फिल्‍में दीं।इन्होंने इतनी मेहनत के बाद मुकेश भट्ट के साथ फिल्‍म प्रोडक्‍शन हाऊस ‘विशेष फिल्‍मस’ के सह-मालिक बन गए । वे यूएस नानप्राफिट टीचएड्स के सलाहकार मंडल के सदस्‍य भी हैं।

 उनकी कुछ खास फिल्म्स इस प्रकार हैं मंजिलें और भी हैं, लहू के दो रंग, अर्थ, सारांश, नाम, कब्‍जा, डैडी, आवारगी, जुर्म, आशिकी, स्‍वयं, सर, हम हैं राही प्‍यार के, क्रिमिनल, दस्‍तक, तमन्‍ना, डुप्लिकेट, जख्‍म, कारतूस, संघर्ष, राज, मर्डर, रोग, जहर, कलयुग, गैंग्‍सटर, वो लम्‍हे, तुम मिले, जिस्‍म 2,मर्डर ३,खामोशियां,शमिताभ, मिस्‍टर एक्‍स और अभी हल ही मे इनकी फिल्म रीलीज़ हुई “राज रीबूटड ”  और इसी साल इनकी एक और फिल्म “बेगम जान” भी रिलीज़ होने वाली है   ।

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Mayapuri