मल्लिका साराभाई को हुआ ‘अंगूर की बेटी’ से प्यार

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मायापुरी अंक 47,1975

मल्लिका साराभाई विहस्की पीती हैं, यह तो मुझे पता था। कई बार पार्टियों में हाथ में ‘अंगूर की बेटी’ को लिए, बड़े अंदाज से इधर-उधर की बातें करते देखा था। हमारी सोसायटी में अगर किसी पार्टी में किसी लड़की के हाथ में गिलास नहीं है (चाहे उसमें औरेंज जूस ही हो) तो उसे ‘बोर’ समझा जाता है और मैं अच्छी तरह जानता था कि मल्लिका कुछ भी हो ‘बोर’ नहीं हैं। लेकिन यह नहीं मालूम था कि उन्होंने सिगरेट पीना भी शुरू कर दिया है, वह भी बड़े जोर शोर के साथ।

दो दिन पहले मैंने उन्हें ताजमहल होटल में देखा। उनके सिगरेट पीने के अंदाज से यही लग रहा था कि वह इस काम में नई नहीं हैं। वह एक महाशय के साथ बैठी, चारो तरफ हंसी बिखेर रही थी। सच जानिये इन दोनों की जोड़ी को देखकर मुझे बार-बार ‘हूर की गोद में लंगूर’ वाली कहावत याद आ रही थी। न जाने क्यों शायद उन महाशय का चेहरा देखकर?खैर, चेहरे मोहरों को छोडिये, बात मल्लिका साराभाई के सिगरेट पीने की हो रही थी, शायद उन्होंने इसलिए (कम से कम पब्लिक में) पीना शुरू कर दिया है कि स्टार बनने के लिए यह सब जरूरी है। मुझसे अगर पूछती तो मैं यही कहता नहीं बैबी स्टार बनने के लिए विहस्की या सिगरेट पीना जरूरी नहीं है बल्कि किस्मत का झटका चाहिए फिल्म का हिट होना जरूरी है और‘हिमालय से ऊंचा’ की ऊंचाई धरती पर से भी ऊपर नहीं उठ पाई है।


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Mayapuri

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