‘‘फिल्म ‘जज्बा’ के साथ जुड़ने की कई वजहे हैं..’’

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जीटीवी में बिजनेस हेड के रूप में काम करने तथा ‘जिंदगी’ चैनल को सफलता पूर्वक लांच करने की जिम्मेदारी को निभाने के बाद आकाश चावला अब ‘‘एस्सेल विजन’ के बिजनेस हेड के रूप में फिल्मों को प्रमोट और उनकी मार्केटिंग करने की जिम्मेदारी निभाने की चुनौती को स्वीकार किया है. कई सफल मराठी फिल्मों का निर्माण, वितरण, प्रमोशन आदि करने के बाद अब ‘एस्सेल विजन’ ने संजय गुप्ता के साथ मिलकर फिल्म ‘‘जज्बा’’ का निर्माण करने का फैसला किया है. इसी संदर्भ में आकाश चावला से हुई बातचीत इस प्रकार रही..

akash-chawla

‘एस्सेल विजन’में आप किस ढंग से काम करने वाले हैं?

-यह कंटेंट मेकिंग कंपनी है. एस्सेल विजन, टीवी, फिल्म, डिजिटल मीडियम के लिए कार्यक्रम तैयार करेगी. फिल्मों में किस तरह से माॅर्केटिंग होगी,यह कहना मुष्किल है. लेकिन इस क्षेत्र में आने के बाद मैंने बहुत से लोगों से बहुत सी बातें सुनी. मैं किसी मिथ के अनुसार नहीं चलूॅंगा. मैं यह मानने को तैयार नहीं कि सिर्फ ऐसी ही चीजे होती हैं. क्योंकि जिंदगी हमेशा एक ही प्रकार से नहीं चलती. हर दिन हम बदलते हैं. मीडिया या दर्षक तक हम अपनी तरफ से जो भी संदेष देंगे, वह भी समय के अनुसार ही बदलता रहेगा. मैं यह मानने को कदापि तैयार नहीं हूँ कि ऐसा ही होता है.

बालीवुड में फिल्म की बनिस्बत प्रपोजल बनते हैं? आप क्या मानते हैं?

मैं आपकी बात से सहमत हूँ. पर हमने बदलाव लाने की प्रतिज्ञा नहीं ली है. हमें यह पता है कि हमें किस तरह की फिल्मंे बनानी है. अब हमने ‘व्हाइट फीदर’ के संजय गुप्ता के साथ हाथ मिलाया है.मगर हमने संजय गुप्ता को यह निर्देष नहीं दिया कि वह फिल्म में किस कलाकार को लें. हमने यह भी नहीं कहा कि संजय, हमें तुम्हारे साथ काम करना है. हम कई फिल्ममेकर से मिल रहे हैं.संजय जी ने हमें ‘जज्बा’का सब्जेक्ट बताया. हमें सब्जेक्ट,कहानी,एक एक किरदार के बारे में विस्तार से बताया. फिर उन्होने बताया कि किस किरदार मैं कौन सा कलाकार फिट बैठता है. तो इतनी जानकारी के बाद हम संजय गुप्ता जी के साथ जुड़े. हमारा मिषन सब्जेक्ट के अनुसार बजट आदि पर काम कर अच्छी फिल्म बनाना और अपनी कंपनी के षेअर होल्डर को मुनाफा देना है. हम निवेषकों को फायदा पहुॅचाने के हिसाब से काम करना चाहते है,पर पहली षर्त गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करना है. हम मार्केटिंग में ‘पैकेज’वाले सिस्टम से नहीं चल रहे हैं. और आगे भी नहीं करेंगे.

‘‘जज्बा’’के साथ जुड़ने का निर्णय लेते समय विजनेस हेड की हैसियत से आपने किस बात पर गौर किया?

पहली बात फिल्म मेकर पर हमने ध्यान दिया.संजय गुप्ता ने अतीत मंे कई सफल फिल्में बनायी हैं. उनसे जब मिले, तो हमारी और उनकी सोच काफी हद तक मिल रही थी. दूसरी चीज सब्जेक्ट. जिस तरीके से उन्होने सब्जेक्ट को पकड़ा,वह हमें भा गया. जब फिल्म नरेट की, तो हमें उनका वीजन सही लगा. तीसरा उनका फाइनेंषियल स्टेटस अच्छा है. उन्हे इस बात का अहसास है कि फिल्म के सब्जेक्ट के अनुसार फिल्म का बजट क्या होना चाहिए. इसी वजह से हम ‘जज्बा’ के साथ जुड़े.

फिल्म‘‘जज्बा’’के सब्जेक्ट में आपको क्या पसंद आया?

आज का दर्षक क्या सोच रहा है, आज क्या माहौल है, उसी के अनुरूप यह सब्जेक्ट है. इससे अधिक अभी सब्जेक्ट पर कुछ बताना सही नहीं होगा. मेरे हिसाब से इमोषनल क्राइम थ्रिलर होते हुए आज के दौर की फिल्म है. फिर भारी भरकम कलाकार हैं. फिल्म के सब्जेक्ट पर निर्देषक के तौर पर संजय गुप्ता का वीजन बहुत साफ है.

क्या आप मानते हंै कि फिल्म निर्माण में मार्केटिंग वालों की षुरू से ही दखलंदाजी होनी चाहिए?

जी हाॅ! होनी चाहिए. बिजनेस की दखलंदाजी होनी चाहिए. यदि फिल्म के निर्माण की लागत पर षुरू से ही नही समझा गया, तो रिवेन्यू के बारे में कैसे सोचेंगे. हम ज्यादा फिल्में और लंबे समय तक फिल्में तभी बना सकते हैं, जब हम उसे एक सफल बिजनेस माॅडल में ढालेंगे. रेवेन्यू माॅडल, लागत, किस हद तक की मार्केटिंग करनी है, यह सब षुरूआत में ही तय करना होगा. फिल्म ओवर बजट न हो इसका ख्याल शुरूआत से रखने के लिए बिजनेस व मार्केटिंग वालों की दखलंदाजी जरुरी है.

अब फिल्म के निर्माण से कहीं ज्यादा फिल्म के प्रमोषन पर पैसे खर्च किए जा रहे हैं? ऐसे में आपकी अपनी सोच क्या है?

मेरी अपनी सोच यह है कि पैसा उतना ही लगाना चाहिए, जितना बिजनेस माॅडल मे पहले ही चर्चा की जा चुकी हो.दूसरी बात मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि फिल्म अति महत्वपूर्ण है. हमारी इस फिल्म का इंटरनेशनल बाजार भी काफी बड़ा होगा. जीटीवी से जुड़कर अमरीका, मिडल ईस्ट आदि का भी बाजार खुल गया. जब हम काॅन फिल्म फेस्टिवल में ‘जज्बा’ को पेश करेंगे,तो वहां पर जीटीवी के जो अन्य चैनल मौजूद होंगे,वह भी अहम भूमिका निभाएंगे. मैं इस फिल्म को अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर देख रहा हूं. उसी हिसाब से पूरी योजना बनायी.


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Mayapuri

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