मरहूम आई ए एस ऑफिसर रवि ने चर्चित किया,मरहूम आई ए एस ऑफिसर ‘मंजूनाथ’की भूमिका निभाने वाले कलाकार ‘शाशो’को

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इन दिनों पूरे देश में एक आई ए एस ऑफिसर रवि की संदिग्ध मौत को लेकर बवाल मचा हुआ है । रवि कुछ अरसे से कर्नाटका के रेती माफिया के पीछे हाथ धो कर लगे हुये थे । उन्हें लगातार धमकीयां भी मिल रही थी। ऐसे में उनका आत्महत्या करना लोगों के गले से नहीं उतर रहा। इस खबर ने पिछले साल आई एक फिल्म ‘मंजूनाथ’ के आई ए एस आफिसर मंजूनाथ यानि शाशो को एक बार फिर चर्चित कर दिया है। फिल्म की लीड भूमिका निभाने वाले कलाकार शाशो ने फिल्म में इतना सजीव अभिनय किया था कि मीडिया और दर्शको न खुल कर तारीफ की थी ।
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परन्तु मंजूनाथ लोकप्रिय हुये लेकिन मंजूनाथ की भूमिका निभाने वाला कलाकार शाशो गुमनाम ही रहा।इसलिये फिल्म के बाद शाशो फिर किसी फिल्म में नजर नहीं आये । मरहूम आई ए एस आफिसर रवि से भला मंजूनाथ या उस रोल को निभाने वाले कलाकार शाशो का क्या संबन्ध है? दरअसल मंजूनाथ और रवि, दोनो ऑफिसर्स की कहानी में अद्भुत समानता है। मंजूनाथ भी रवि की तरह एक आम परिवार से यहां तक पहुंचे एक बेहद ईमानदार आई ए एस ऑफिसर थे । दोनो ही साउथ से थे। रवि की तरह उन्होंने भी रोड़ माफियाओं की जगह इतनी तंग कर दी थी कि उनसे पीछा छुड़वाने के लिये मजबूरन उन्हें उनका कत्ल करवाना पड़ा । इस सत्य घटना के आरोपीयों को पिछले दिनों ही सुप्रिम कोर्ट ने सजा सुनाई है ।

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हम बात कर रहे हैं शाशो की, जिसने इस फिल्म से बॉलीवुड में शानदार डेब्यु किया था लेकिन बाद में वह क्यों किसी फिल्म में नजर नही आये। मिलने पर शाशो ने पहले तो अपने बारे में बताया कि मेरा जन्म और कालेज तक की पढ़ाई चेन्नई में हुई । उसके बाद एम बीए जयपुर से किया । फिर मैं थोड़ा थोड़ा अरसा बंगलुरू और हैदराबाद में रहा । इसके बाद फाइनली मुबंई आ गया । मैं शुरू से कॉरपोरेट शोज करता रहा हूं। मुबंई आने के बाद भी शोज का सिलसिला बरकरार रहा । उन्हीं दिनों म्युजिक कंपनी मेगना सांउड ने मेरी एक तमिल एलबम भी रिलीज की थी। दरअसल मैं आठ भाषाओं में गाता रहा हूं । जैसे तमिल, तेलगू, मलयालम, कन्नड़,इंगलिश, हिन्दी , पंजाबी और आजकल बंगाली में भी गा रहा हूं ।

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अभी तक मैं पंदरह सो शोज कर चुका हूं और इन दिनो मैं कर्नाटिक म्यूजिक सीख रहा हूं । अगर फिल्म ‘मंजूनाथ’ की बात की जाये तो उन दिनों मैं बंगलुरू में एक शो कर रहा था वहीं पता चला कि फिल्म के निर्देशक संदीप वर्मा वहां ऑडिशन ले रहे हैं तो मैं भी उनसे मिला और मैने ऑडिशन दिया । उन्हें मेरा काम पंसद आया लेकिन उन्होंने उस वक्त मुझे यस नहीं कहा बल्कि मुझे मुंबई आने के लिये कहा । मैने उन्हें बताया कि मैं मुबंई में ही सैटल हूं। मुंबई आने के बाद संदीप जी ने मेरे कई ऑडिशन लिये । इसके बाद हमने छे महिने की वर्कशॉप की। उस वक्त तक मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं यह फिल्म कर रहा हूं ।क्योंकि इससे पहले मैं नब्बे प्रतिशत ऑडिशंस में फेल रहा हूं, इसलिये मेरा कांफिडेंस बुरी तरह से हिला हुआ था । खैर इसके बाद मेरे अलावा कुछ अन्य आर्टिस्ट साइन किये गये । मेरी मां के किरदार में सीमा विश्वास थी और नगेटिव रोल में यशपाल शर्मा थे, तथा मेरे बास बने थे राजेश खट्टर। मेरे डायरेक्टर ने महसूस किया कि मैं थोड़ा हिला हुआ हूं, तो उन्होंने मुझे बुलाकर कहा कि दूसरे लोग तुम्हें कुछ भी कहें कैसे भी देखें। तुम्हें ये सोचना है कि मैंने तुम्हें इस रोल के लिये सलैक्ट किया है और इसलिये सलैक्ट किया है क्योंकि तुम लीड कॅरेक्टर के लिये पूरी तरह से फिट हो। उनकी बातों से मेरे भीतर नई अनुभूति का संचार हुआ। इसके बाद मैने पूरी फिल्म की और सारे समय अपने कोआर्टिस्टों और डायरेक्टर से तारीफ हासिल करता रहा ।

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उन दिनों फिल्म को लेकर कितनी दफा मीडिया से सामना हुआ लेकिन शाशो को कभी सामने नहीं लाया गया। वो फिल्म के लिये तो ठीक था कि एक्टर नहीं किरदार को हाईलाईट करना था यानि शाशो नहीं बल्कि मंजूनाथ को सामने लाना था। लेकिन इससे शाशो को भारी नुकसान हुआ। क्योंकि फिल्म को पब्लिसिटी हासिल हुई लेकिन शाशो को नहीं । इसलिये फिल्म की रिलीज के बाद भी उसे कोई नहीं जानता था । दूसरे खुद शाशो को भी यहां के तौर तरीके नहीं पता थे, कि अपने आपको कैसे आगे लाना चाहिये । लिहाजा वो एक बार फिर अपने कारपोरेट शोज में चले गये। लेकिन कर्नाटका के रहने वाले आईए एस ऑफिसर रवि जो वहां के रेती माफियाओं के खिलाफ लड़ रहे थे, अपनी जान साउथ इंडियन आई ए एस मंजूनाथ यानि शाशो को एक बार फिर चर्चित कर गये। आज कुछ जर्नलिस्ट शाशो को तलाश कर रहे हैं उसके साक्षात्कार के लिये ।

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Mayapuri