मनमोहन देसाई

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मनमोहन देसाई के जन्मदिन पर उन्हें श्रदांजलि

कॉमर्शियल सिनेमा को नई रवानी और बुलंदी देने वाले मनमोहन देसाई को फ़िल्मी माहौल विरासत में मिला था। उनका जन्म 26 फरवरी 1936 को गुजरात के वलसाड शहर में हुआ था। पिता किक्कू देसाई फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े पारामाउंट स्टूडियो के मालिक भी थे।मनमोहन देसाई की शादी जीवनप्रभा देसाई के साथ हुई, लेकिन सन् 1979 में उनका निधन हो गया। इसके बाद फिल्म अभिनेत्री नंदा के साथ उनकी सगाई हुई लेकिन कुछ समय बाद ही मनमोहन की मृत्यु हो गई ।

मशहूर फिल्मकार मनमोहन देसाई ने 29 वर्ष के फिल्मी कॅरियर में 20 फिल्में बनाईं, जिसमें से 13 सुपरहिट रहीं। घर में फिल्मी माहौल रहने के कारण मनमोहन देसाई का रूझान बचपन के दिनों से ही फ़िल्मों में था। बतौर निर्देशक मनमोहन देसाई की पहली फ़िल्म ‘छलिया’ 1960 में रिलीज हुई। यह बात और है कि राजकपूर और नूतन जैसे कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर रंग नहीं जमा सकी लेकिन फ़िल्म के गीत काफी लोकप्रिय हुए। इसके बाद मनमोहन देसाई ने अभिनेता शम्मी कपूर की ‘ब्लफ मास्टर’ और ‘बदतमीज’ को निर्देशित किया, लेकिन इस बार भी देसाई के हाथों में निराशा ही आई। यह असफलता तो महज भूमिका थी उस फ़िल्मकार के पैदा होने की, जिसे कामयाबी के नए-नए मुकाम हासिल करने थे।

हुआ यूँ कि 1964 में मनमोहन देसाई को फ़िल्म ‘राजकुमार’निर्देशित करने का मौक़ा मिला। हीरो थे—शम्मी कपूर। इस बार मेहनत ने अपना रंग जमा ही लिया और फ़िल्म की सफलता ने देसाई को बतौर निर्देशक एक पहचान दी। फिर मनमोहन देसाई निर्देशित और 1970 में प्रदर्शित ‘सच्चा झूठा’ भी करियर के लिए अहम फ़िल्म साबित हुई। इस फ़िल्म के हीरो थे—उस जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना। ‘सच्चा झूठा’बॉक्स आफिस पर सुपरहिट रही। इसी बीच मनमोहन देसाई ने ‘भाई हो तो ऐसा’ (1972), ‘रामपुर का लक्ष्मण’ (1972), ‘आ गले लग जा’ (1973), और‘रोटी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया, जिसे दर्शको ने ख़ूब सराहा। 1977 में बनी फ़िल्म ‘अमर अकबर एंथनी’ मनमोहन देसाई के करियर में न सिर्फ सबसे सफल फिल्म साबित हुई, बल्कि उसने अभिनेता अमिताभ बच्चन को ‘वन मैन इंडस्ट्री’ के रूप में भी स्थापित कर दिया।अमिताभ के साथ उन्होंने सुहाग (1979) नसीब (1981), देशप्रेमी (1982), कुली (1983) में काम किया। कुली की शूटिंग के दौरान अमिताभ के घायल होने के बाद लोगों ने ये भी कहा कि शायद ये जोड़ी आगे साथ काम ना करें पर मर्द (1985) और गंगा जुमुना सरस्वती 1988 तक ये जोड़ी जमी रही। इसके बाद उनकी अगली फिल्म तूफान को उनके पुत्र केतन देसाई ने निर्देशित किया।इससे पहले कि वे और सुपरहिट फिल्में बना पाते, नियति को कुछ और ही मंजूर था।पीठ के भयानक दर्द से पीड़ित मनमोहन देसाई ने  वर्ष 1994 में मुंबई के ग्रांट रोड स्थित अपनी इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। आज बॉलीवुड के कई निर्देशक मनमोहन देसाई के फिल्म फॉमरूला का अनुसरण कर रहे हैं और फिल्मों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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Mayapuri