INTERVIEW!! “ट्रैफिक पुलिस मैन मानवीय रिश्ते भी बखूबी निभाता है” – मनोज वाजपेयी

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लिपिका वर्मा

एक्टर मनोज वाजपेयी को फिल्म, “अलीगढ” में अपने, “समलैंगिक” कैरेक्टर के लिए ढ़ेर सारी सराहना तो मिली ही है किन्तु अब वह एक और अनूठे किरदार में नजर आने वाले हैं। ट्रैफिक पुलिस मैन बन कर मनोज को कैसा  लगा और मनोज ने ढ़ेर सारी बातें हमसे की। हाल ही में कुछ मिनटों का ‘ट्रैफिक पुलिस’ फिल्म का ट्रेलर दिखाया गया। निर्देशक राजेश पिल्लई की कमी सब को महसूस हुई फरवरी माह में उनका 41 वर्ष में देहांत हो गया

“ट्रैफिक पुलिस” को किस तरह प्रमोट किया जायेगा ?

मनोज वाजपेयी ने राजेश पिल्लई के बारे में दुःखी हो कर कहा, चलिए अब हमारी फिल्म “ट्रैफिक पुलिस” का ट्रेलर तो लांच हुआ है। प्रोमोशन्स के बारे में हम ज्यादा कुछ नहीं कह सकते, “फॉक्स प्रोडक्शन” हाउस है सो प्रोमोशन्स की रणनीति उन्हें ही तय करनी होगी। राजेश हमारे बीच नहीं रहे सो इस वजह से कुछ समय लग गया है। किन्तु अब प्रोमोशन्स का सारा बोझ हम अभिनेताओं पर है और हम हर तरह से इस फिल्म को सिनेमा घरों तक पहुँचाने की कोशिश करेंगे। दुःख है कि इतनी छोटी उम्र में हमारे निर्देशक जिन्होंने इस फिल्म के लिए कड़ी मेहनत की है, हमारे बीच नहीं रहे यह कहते हुए भी बुरा लग रहा है। उम्मीद है फिल्म बॉक्स ऑफिस पर एक अलग तरह से सराही जाएगी।

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ट्रैफिक पुलिस का किरदार करने में किन दिक्कतों का सामना करना पड़ा ?

अक्सर ट्रैफिक पुलिसमैन मुंबईकर नहीं होते हैं वह महाराष्ट्र से बिलोंग करते हैं, सतारा, मराठवाड़ा इत्यादि अन्य गावों से निकल कर मुंबई आते हैं। तो इस किरदार को करने के लिए मैंने उनकी बॉडी लैंग्वेज और बहस पर वर्क किया है। दरअसल में मुझे कोई दिक्क्त नहीं आई क्योंकि हमारे साथ जितने पुलिसकर्मी अभिनय कर रहे थे वह सब भी महाराष्ट्र से ही आते हैं सो मैंने उनके साथ मिलजुल कर भाषा को बेहतरीन तरह से सीख ही लिया।

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ट्रैफिक पुलिस की दिक्कतों के बारे में क्या कहना चाहेंगे आप ?

बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों ही दिक्कतों को झेल कर बेचारे आगे बढ़ते है और एक चीज़ भी देखी है मैंने कि ट्रैफिक पुलिसमैन मानवता को भी अपनी तरह से निभाते हैं। जब कभी एम्बुलेंस कोई ऑर्गन्स लेकर आती है या फिर किसी मरीज को रास्ता देना हो तब भी बहुत मशक्कत करके वह एम्बुलेंस के लिए क्लियर रास्ता करते हैं। ऐसा नहीं है कि ट्रैफिक पुलिस मानवीय रिश्ते नहीं निभाती है, उल्टा अच्छी तरह से मानवीय भावनाओं को पूरा करने में सक्षम होती है।

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आप हमेशा कुछ अलग फ़िल्में ही करते हैं ऐसा क्यों ?

देखिये, रियलिज्म मुझे कुछ ज्यादा भाता है और अब तो मुख्य सिनेमा में भी अच्छी रियलिज्म कहानियों को जगह मिल रही है। यह जरूर है कि मुझे हमेशा से अलग अलग किरदार करने को मिले हैं। अभिनेता होने की वजह से मेरी यह इच्छा भी पूरी हुई है और यह एक अच्छी बात ही है न ?

अन्ततः यह बतायें कि आपने कभी किसी ट्रैफिक पुलिस को रिश्वत दी है क्या ?

जी अक्सर कभी जब मेरा ड्राइवर सिग्नल तोड़ता है या कुछ अन्य चूक करता है ट्रैफिक सिग्नल को लेकर और जब ट्रैफिक पुलिस हमारी गाड़ी के पास आ कर उसे डांटता है तो मैं अपना मुंह छिपा रहा होता हूँ। ट्रैफिक पुलिस मैन दो – तीन बारी मुझे देखता है और फिर थोड़ा पहचान कर मुझे भी कहता है अपने ड्राइवर को समझाते क्यों नहीं ? मैंने कभी रिश्वत नहीं दी है और न ही दूंगा, हाँ इतना जरूर है कि ड्राइवर की गलती होने पर पैसे जरूर भर देता हूँ। मैं रिश्वत देने के खिलाफ हूँ। हर व्यक्ति को उसकी गलती का एहसास होना चाहिए ताकि दोबारा वह उस गलती को न दोहराये।

 

 


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