जर्मनी के न्यूवेइड शहर के मेट्रोपोलिस सिनेमाघर में अपनी फिल्म ‘कॉन अनिमा’ के प्रदर्शन के साथ पहले भारतीय निर्देशक का गौरव हासिल कर मनोज मौर्य ने रचा नया इतिहास

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पेंटर तथा  फिल्म निर्माता, लेखक व निर्देशक मनोज मौर्य ने भारतीय होते हुए भी जर्मन भाषा में फीचर फिल्म ‘कॉन अनिमा’ का निर्माण करने के साथ ही 14 जुलाई को भारतीय सिनेमा जगत में एक नया इतिहास रच डाला। जी हॉ! जब फिल्म ‘कॉन अनिमा’ के निर्माताओं ने 14 जुलाई को जर्मनी के न्यूवेइड शहर के प्रसिद्ध मेट्रोपेालिस सिनेमाघर में जर्मनी  के समय के अनुसार सुबह साढ़े नौ बजे  पहला बड़ा प्रिव्यू शो किया गया, तो मनौज मौर्या पहले भारतीय फिल्म निर्देशक बन गए, जिनकी जर्मन भाषा में बनी फिल्म ‘‘कॉन अनिमा’’ का जर्मनी के न्यूवेइड शहर के मेट्रोपोलिस सिनेमाघर में प्रदर्शित हुई हो। इस अवसर पर फिल्म के कलाकारों, चालक दल, फिल्म समीक्षकों, पत्रकारों, वितरकों और फिल्म पारखी सहित 200 मेहमानों ने पूरी तरह से भरे हुए थिएटर में फिल्म देखी। फिल्म के निर्देशक मनोज मौर्या स्वयं कोविड संबंधी प्रतिबंधों के कारण पूर्वावलोकन में शामिल नहीं हो सके। मगर मनोज मौर्या ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से थिएटर में मौजूद दर्शकों के साथ बातचीत की।

फिल्म ‘‘कॉन अनिमा’’ देखने के बाद कलाकारों व पत्रकारो से जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे भारतीय फिल्मकार मनोज मौर्या के साथ ही भारत का भी सीना चौड़ा हो गया। इन प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में मनोज मौर्या बताते हैं-‘‘हमारी फिल्म ‘कॉन अनिमा’ देखने के बाद अभिनेताओं में से एक अभिनेत्री अनके ने कहा, ‘‘यह फिल्म मेरी कल्पना से परे है….मैंने शूटिंग के दौरान कभी नहीं सोचा था कि मैं इस समृद्ध संगीतमय नाटक का हिस्सा बनने जा रहा हूं।” जबकि एक फिल्म आलोचक ने कहा- “मुझे फिल्म में और संगीत की उम्मीद थी। यह फिल्म एक स्टीरियोटाइप यूरोपीय फिल्म नहीं है। इसकी कहानी कहने की एक अलग शैली है।”

फिल्म ‘कॉन अनिमा’ की कहानी एक ऐसी लड़की की है, जो कि सोलविस्ट है।सोलविस्ट वह होता है, जो कि ऑर्केस्ट्रा में सिंगल प्ले करता है और उसी को पूरा ओर्केस्ट्रा ‘फॉलो’करता है। यह एक कंडक्टर फ्रैंक शुबर्ट (विनफ्रेंड वोगेले) का ऑर्केस्ट्रा है। एम्मा (जना सोफी) एक सोलविस्ट है, जो इसमें वायलिन बजा रही हैं। हेमा का टकराव एक ऐसे लड़के वाल्टर (फेलिप लुडेस) से होती है, जो कि ‘प्रोडगी’ है यानी कि जिसके रग रग में संगीत है, जबकि उसने कहीं से संगीत सीखा नहीं है। तो वह चाहती है कि वाल्टर मेरी जगह ले ले, तो अच्छी बात होगी. मगर वाल्टर को किसी भी सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा में बजाने में कोई रूचि नहीं हैं। वह कैसे उस लड़के को उस मुकाम तक लेकर जाती है, उसी की कहानी है।

फिल्म ‘‘कॉन अनिमा’’ के संदर्भ में लेखक व निर्देशक मनोज मौर्या कहते हैं- मेरे दिमाग में एक कहानी लंबे समय से घूम रही थी। उसी पर यह यूरोप में स्थापित म्यूजिकल ड्रामा वाली फिल्म है। फिल्म की कहानी यूरोप पर आधारित थी और म्यूजिकल ड्रामा थी, तो इसे फिल्माने के लिए मुझे जर्मनी ही बेहतरीन देश समझ में आया। फिल्म का नाम है- ‘कॉन अनिमा’। कॉन अनिमा लेटिन से निकला इटालियन शब्द है, जो संगीत के लिए प्रयोग किया जाता है। यह अंदर की आत्मा का अहसास दिलाता है। इस फिल्म को हमने जर्मन भाषा में ही बनाया है। कहानी की आत्मा संगीत और वह भी खासकर जर्मन की है।

‘कॉन अनिमा’ को जर्मन भाषा में बनाने की चर्चा करते हुए मनोज मौर्या कहते हैं- “देखिए, यह कहानी भी उन्ही की थी और मैंने इसे उन्ही की भाषा में वहीं के कलाकारों को लेकर बनाया। कहानी जिस माहौल व वातावरण की हो, यदि उसे उसी भाषा वहीं के कलाकारों के साथ उसी वातावरण में फिल्माया जाए, तो उसका सौंदर्य कई गुणा बढ़ जाता है। वैसे मेरी राय में सिनेमा को भाषा की बंदिश में नही बांधा जा सकता। भले ही सिनेमा किसी एक भाषा में बनता है, मगर सिनेमा अपने आप में युनिवर्सल भाषा है। मुझे सिनेमा के माध्यम से उसी युनिवर्सल लैंगवेज को एक्सप्लोर करना था। इस हिसाब से देखें तो बतौर फिल्म निर्माता निर्देशक मेरी पहली फिल्म यह जर्मन भाषा की फिल्म ‘कॉन अनिमा’ ही है।”

फिल्म ‘‘कॉन अनिमा’’ को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं- फलवाला के किरदार में बर्लिन के अलेक्जेंड प्लूक्केट, एम्मा के किरदार में जना सोफी, वाल्टर के किरदार में फेलिप लुडेस। फिल्म के संगीतकार विनफ्रेड वोगेले, कैमरामैन एकर्ट रीचल तथ फिल्म के लेखक, निर्माता और निर्देशक मनोज मौर्या हैं, जबकि फिल्म का निर्माण वेस्डम मूवीज ने किया है, जो जर्मनी में स्थित एक स्वतंत्र प्रोडक्शन हाउस है।


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Mayapuri

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