INTERVIEW: अपनी माँ को मैं इसका श्रेय देना चाहूँगी – आशा पारेख

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लिपिका वर्मा

आशा पारेख  गोल्डन एरा की एक ऐसी अभिनेत्री रही जिन्हें न केवल अपने फैंस से ढेर सारा प्यार मिला किन्तु  फिल्मी पर्दे पर अपने डांस से सबके दिलों को जीतने वाली आशा पारेख की फिल्में एक के बाद एक हिट होती गयी। ….इसीलिए तो  उन्होंने अपनी  किताब का नाम भी ‘दी  हिट गर्ल’ रखा है। हाल ही में उनकी पुस्तक सलमान खान द्वारा मुंबई में लांच की गयी। हर बॉलीवुड एक्टर अपनी किताब को मुंबई एवं दिल्ली में  लांच करता है -इसी सिलसिले में आशा जी की किताब 30 अप्रैल को आमिर खान के कर  कमलों द्वारा दिल्ली में लांच होने  की तैयारी  भी कर रहे हैं। ‘‘जी  हाँ मेरी किताब ‘दी हिट गर्ल’ दिल्ली में आमिर खान  लांच कर रहे है। इस में कोई राजनेता शामिल नहीं हो रहे है। कुछ पब्लिशर्स की और से उनके कुछ मेहमान आने वाले है और यहाँ फिल्मी दुनिया   से भी हमारे कई दोस्त वाह पधार रहे हैं।’’

पेश है आशा पारेख से लिपिका वर्मा की बातचीत के कुछ अंश

आज भी आपको लोग जानते हैं। आप अपने फैंस  के साथ फोटो भी खिंचवाने में  कभी हिचकिचाती नहीं है कभी कोई सनकी फैंस से भेंट हुई है।?

मुझे बहुत खुशी है कि  आज भी मेरे फैंस मुझ से जुड़े हुए हैं। एक मेरी फैन तो आज भी मेरे लिये  खाने की चीजे घर पर भेजती है। यह मेरा  सौभाग्य है। मुझे आज भी  याद  एक  चाइनीज फैंस कुछ आरसे पहले मेरे घर के दरवाजे से हट ही नहीं रहा था, तब मुझे पुलिस बुला कर उसे वहाँ से हटवाना पड़ा।

अपनी बहुत ही स्वतंत्र विचार की खुददार  महिला रही, आप ने अपना जीवन बहुत सलीके से चलाया  है। इसका श्रेय किसे देना चाहेगी आप ?

मेरी माँ को मैं इसका श्रेय देना चाहूँगी। उन्होंने मुझे लड़की की तरह नहीं पाला  है। अपने समय की बहुत ही सशक्त स्ट्रांग, महिला रही है मेरी माताजी। जब कभी  भी कोई भी निर्णय लेना होता तो -यदि उनकी हाँ होती तो वह हाँ कभी ना में नहीं बदलती। मैं भी बहुत ही अनुशासन प्रिय हूँ। मुझे बहुत काम मिला लेकिन मैंने अपनी पसंद से ही हमेशा काम चुना है। आज भी मुझे गर्व है अपनी माँ पर , जिन्होंने मुझे नृत्यः सीखने की अनुमति दी और मुझे फिल्मों में काम करने के लिए भी कभी नहीं रोका। बस आज उन्हें मिस करती हूँ-क्योंकि घर का सारा काम वही देखती यहाँ तक की मेरा प्रोफेशन भी अच्छी तरह से संभाल लिया करती थी। जब में अपने माता -पिता के बारे में इस किताब में लिख रही थी, वो पल मेरे लिए बहुत ही इमोशनल पल था। बीते समय को याद करके गमगीन सी हो गयी थी मै।Asha-Parekh

आपके माता पिता ने आपकी शादी भी करनी चाही, पर शादी क्यों नहीं हुई?

देखिये कौन से माँ-बाप अपने बच्चे की शादी नहीं करना चाहते हैं? मेरी शादी भी करनी चाही उन्होंने, लेकिन शादी मेरी किस्मत में नहीं थी सो नहीं हुई। किस्मत के आगे कुछ नहीं हो सकता।

आपने बच्चा गोद  क्यों नहीं लिया ?

एक बारी कोशिश की थी एक बच्चे को गोद  ही लेना चाहा था। लेकिन  कुछ कारण वश में उसे गोद नहीं ले पायी. आज जब बच्चों को देखती  हूँ , वो अपने माता पिता का ख्याल नहीं रखते है और आज के बच्चे समझ नहीं आते है मुझे, तो सोचती हूँ – अच्छा हुआ  मैंने एक बारी के बाद किसी  बच्चे को गोद लेने की बात दोबारा सोची ही नहीं।

वहीदा रहमान और हेलेन दिवंगत नंदा एवं साधना और सलीम खान परिवार की आपसे दोस्ती फिल्मी दुनिया में मशहूर है। क्या कहना चाहेंगी आप?

हां हम सब बहुत समय से और बहुत अच्छे दोस्त हैं। मैं कई मर्तबा  हेलन के घर खाना खाने जाती हूं वह हमारे लिए अक्सर ‘खाओसे’ एक बर्मी डिश है बनाती है और हम लोग उसे बहुत चाव से खाते भी है।  मैं हेलन और वहीदा एक दूसरे के घर में खाने पर जाते हैं हम सब दोस्त मिलकर बाहर घूमने भी जाते हैं। मेरे यहाँ सब लोग  खासकर के चाट और पानी पूरी खाने के लिए अक्सर आया करते है।  हम सभी को पढ़ने का बहुत शौक है।  कहानियां और समाचार सबकुछ पड़ा करती हूँ मैं।  कभी कभी हम साधना और नंदा को बहुत मिस करते हैं, अब वो हमारे बीच नहीं रही है इस से अक्सर दुखी भी महसूस करते है हम सब।

दिलीप साहब के साथ काम नहीं करने का-आपको  मलाल है क्या?

जी हाँ , मुझे दिलीप साहब बहुत अच्छे लगते थे।  मेरा मन बहुत था उनके साथ काम करने का।  एक फिल्म हम लोग साथ में कर भी रहे थे लेकिन वो फिल्म बीच में ही बंद हो गई। बस इसके बाद चाह  के भी हमें साथ में फिल्म करने का मौका ही नहीं मिला। मैं आज भी दिलीप साहब और सायराजी से मिलती हूं।wahida-rehman

हम आपकी फिल्मों में वापसी कब देख सकते है?

दरअसल में , मैं अपने सोशल वर्क में इतनी व्यस्त  हूं कि फिल्मों में काम करने का समय ही नहीं निकाल पाती हूं। कोई  भी छोटे -मोटे  रोल में -मैं काम नहीं करना चाहती हूं कोई अच्छा रोल हो तो मैं कर लूंगी- फिर चाहे वह भाभी, बहन इत्यादि हो।  मां का रोल करने का मेरा मन नहीं करता क्योंकि उसमें कुछ करने को नहीं होता है और मैं माँ का रोल कभी भी नहीं करुँगी ??.

आज के दौर की अभिनेत्रियां आप लोग से कुछ सीख सकती है जैसा कि सलमान ने बुक लाँच में कहा था ?

आजकल की अभिनेत्रियों पर बहुत स्ट्रेस है।  उनके सामने बहुत सारी मीडिया है। वो बहुत ग्राउंडेड भी है।  उनको प्रमोशन्स के लिए जाना पड़ता है , और वह यह सब भी कर लेती है। हमारे समय में तो ये सब होता ही नहीं था।  मीडिया बहुत बड़ा हो गया है, मुझे तो तरस आता है इन लड़कियों पर ये कितने तनाव से गुजरती हैं। हर समय तैयार हो कर बैठे रहो। आज के समय में भी बहुत सारी अभिनेत्रियों की दोस्ती होती होंगी लेकिन उनके पास अपनी फिल्म के अलावा समय नहीं है कि वो दोस्ती को निभाए। जब काम कम करेंगी तो दोस्ती आगे बढ़ाने का भी समय मिल जाएगा उन्हें।  मेरे हिसाब से आजकल की अभिनेत्रियों में इंसिक्योरिटी की भावना थोड़ी बढ़ गई है , क्योंकि कई सारी लड़कियां अब फिल्मों में आने लगी है। फिर हमारे समय में हम तीन तीन चार चार फिल्में करते थे। एक हिट नहीं हुई तो दूसरी हो जाती थी, लेकिन ये लड़कियां एक ही फिल्म पर काम करती हैं ताकि कॉंसेन्ट्रेशन रहे। ऐसा नहीं है वो लोग ही अपने काम में ही रहती है सो समय के आभाव के कारण मिलना जुलना नहीं हो पाता  है उनका।

अपने करियर की पहली फिल्म आपने शम्मी जी के साथ की थी। आपका उन पर क्रश भी था क्या ?

शम्मी कपूर मेरे चाचा थे सो उन पर मेरा कोई क्रश नहीं था। उनके साथ ‘मैंने दिल देके देखो’ पहली फिल्म की थी और फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ भी मैंने की है।  जब हम कैमरे  के सामने होते थे तो हम केवल अभिनय करते थे। रोमांटिक सीन करने में हमें कभी कोई दिक्कत नहीं पेश आई।  रोमैंटिक सीन करते समय में भी हमें यह एहसास था  कि हम ऐक्टिंग कर रहे हैं। रियल लाइफ में तो मैं उन्हें चाचा ही कह कर पुकारती थी। बहुत मजा आता था उनके साथ काम करने में चाचाजी का सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा था.

अपने समय में आप अपने डांस के लिए जानी जाती थीं

मुझे डांस का बहुत शौक है। मैंने कत्थक, भरतनाट्यम, कत्थकली सीखा है। आज के समय में कहां ऐसे डांस देखने मिलते हैं। वो तो भला हो संजय लीला भंसाली का जिनकी फिल्मों में ऐसे क्लासिकल वाले एक आध गाने देखने को मिल जाते हैं।salman-khan-and-asha-parekh

इन दिनों कौनसी फिल्म आपने देखी है?

इन दिनों में मैंने ‘रंगून’ देखी थी। ठीक है फिल्म लेकिन मुझे ये फिल्म खास अच्छी नहीं लगी। मैं विशाल भारद्वाज से कुछ और भी उम्मीद लगाए हुए थी। हालांकि मुझे कंगना बड़ी अच्छी लगती है वो बहुत बेबाकी से अपनी बातें कह देती है।

आप सेंसरबोर्ड में अध्यक्षा रह चुकी हैं कभी कोई विरोध का सामना करना पड़ा आपको- जैसा कि आज पहलाज निहलानी को करना पड़ता है? इस बारे में क्या कहना चाहेंगी  ?

सेंसरशिप में हमें गाइडलाइन्स फॉलों करने होते थे। मैं जब सेंसर बोर्ड  में थी तो मुझे अपशब्द पसंद नहीं थे। मैं उस पर आपत्ति जताती थीं। जिन फिल्मों को ए सर्टिफिकेट देते हैं, वो सारे निर्देशक और निर्माता कहते हैं कि सेंसरशिप – होनी ही नहीं चाहिए हैं।  और मुझे लगता है कि -संसोरबोर्ड सर्टिफिकेशन होनी चाहिए और वो घर से शुरु हो।  जो (ए) वाली फिल्में हो वो बच्चों को ना दिखाएँ। मां बाप को ही निर्धारित करना होगा ऐसी फिल्मां। के बारे में।  ऐसी फिल्में आप बच्चों के साथ देखने मत जाइये। पहलाजजी भी जो कर रहे हैं वो गाइडलाइंस के हिसाब से चलते होंगे।  ‘ए’ फिल्म में अगर कोई कट लगा दो तो बहुत बुरा लगता है इन बड़ी फिल्मों के निर्माताओं को।  हम बी और सी ग्रेड की फिल्मों की तो बात ही नहीं कर सकते वहां तो सेंसरशिप बहुत जरूरी है। मेरे समय में फिल्म ‘एलिजाबेथ’ नाम की जो फिल्म थी उसके साथ कुछ विवाद हुए थे।  एक बार हमें किसी ने कहा था- कि मंडी में जाइये ऐसी गालियां तो सब एक  दूसरे को देते हैं।  अब बताइये कि क्या वो गालियां आप घर पर ले आना चाहते हैं ? अपशब्द होना ही नहीं चाहिए। हम बहुत कूल हो गए हैं ना तो इन सब बातों को कूल मानने लग गए हैं।

उस समय बॉलिवुड पार्टीज का रंग कैसा जमता था?

पहले बॉलिवुड में पार्टीज भी बहुत कम होती थी. वक्त ही नहीं होता था हमें। सारा समय हम शूट करते रहते थे। फिर जब धर्मेंद्र जी आए तो उन्होंने फिल्म में काम करने की शिफ्ट्स बना दीं। वो बहुत सारी फिल्में कर रहे थे तो उन्होंने 10 से 2, 2 से 10 और फिर रात में 10 से 2 की शिफ्ट लगा दी थीं। धर्मेन्द्र और शशि कपूर दोनों ने मिल कर शिफ्ट्स बनाई हैं. उसके पहले तो हमने कभी शिफ्ट मे काम नहीं किया है।


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Mayapuri

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