दो रूपये ने मेरी तकदीर बदल दी – महमूद

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मायापुरी अंक 41,1975

आज से लगभग पंद्रह सोलह वर्ष पूर्व की बात है। उस समय मुमताज अली के पास काम न था। उनका बेटा महमूद भी बेकार था जिसके कारण घरेलू हालत बड़ी खराब थी सूरते हाल का यह आलम था कि कभी कभी एक वक्त का भी खाना नसीब न होता था। वह रोजाना निर्माताओं के दफ्तरों के चक्कर लगाया करते। संवाद बोल कर प्रभावित करने की कोशिश किया करते। किन्तु इतना करने पर भी कुछ काम बनता नजर न आता था। मजबूर होकर वह फिल्मिस्तान स्टूडियो के पास आकर खड़े हो जाते थे और बड़े-बड़े अभिनेताओं की नकलें उतारा करते और इस तरह लोगों के मनोरंजन का साधन बन गये। इस प्रकार कोई न कोई खुश होकर उन्हें चाय आदि पिला दिया करता। लोगों से कर्ज ले लेकर वह परेशान हो गये थे। दुकानदार भी कहां तक उधार सामान देता जब कि अदायगी की कोई सूरत ही न थी। हर वक्त दरवाजे पर कोई न कोई लेनदार खड़ा ही रहता। उनकी जिंदगी निराशा का शिकार हो कर रह गई थी। उन्हें कुछ नही सूझता था। उन्हें अपनासमय काटना कठिन हो गया था। ऐसी निराशा की हालत में वह फिल्मिस्तान (गोरे गांव) से अपने घर मलाड़ पैदल जा रहे थे। रास्ते में एक जगह कारों की लाइन लगी हुई थी। वह यह दृश्य रोज देखा करते थे क्योंकि उन्हें मालूम था कि यहां कोई बाबा रहते हैं। और उनके पास श्रद्धा से लोग बड़ी दूरदराज जगहों से आया करते थे। उस दिन महमूद भी अन्दर जाकर बैठ गये। उनका नंबर आया तो बाबा ने मुंह देख कर कहा फिल्मों में काम करने का शौक है। महमूद कुछ बोलने से पूर्व यह सुनकर हैरान रह गये। बोला नही। बाबा ने पूछा तो फिर?मैं तो आपके पास दो रुपये लेने आया हूं।“

बाबा ने उनका सर से पैर तक जायज़ा लिया और बोले मैं तो उधार नही देता।“

“आप चाहे देते हों या न देते हों। लेकिन में उधार लेकर ही जाऊंगा। वरना यही भूखा मर जाऊंगा। महमूद ने बेखटके कहा।

बाबा ने दो रुपये महमूद के हाथ पर रख दिये और पीठ पर हाथ फेर कर पीठ थपथपाते हुए कहा निराशा कुफ्र है। अल्लाह का नाम ले और रोजाना कुरान शरीफ पढ़ा कर। सब ठीक हो जाएगा।

उस दिन बाबा से मिलकर उनकी भूख ना मालूम कहां गायब हो गई? बाबा ने से उन्हें दो रूपये क्या मिले खज़ाना मिल गया। क्योंकि अगले ही दिन से फिल्मों में काम मिलना शुरू हो गया। और फिर देखते हीं देखते चारों ओर महमूद की चर्चा होने लगी।

आज महमूद कहते हैं। मैंने आजतक बाबा की बताई बात गिरह बांध रखी है रोजाना कुरान शरीफ पढ़ा करता हू। उस दिन बाबा के कारण नया जीवन मिला। अगर बाबा दो रुपये न देते तो पता नही भूख की शिद्दत में न मालूम क्या कुछ कर बैठता?


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Mayapuri

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