कुछ यूँ छुप जाती थी परिणीति होली के दिन की उन्हें ढूंढना होता था मुश्किल

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होली की धींगामस्ती में परिणीति चोपड़ा से मुलाकात हो गई। वे पूरी तरह से होली के मूड में नजर आ रही थी। ‘क्या प्रोग्राम है?’ पूछने पर वे बोली, ‘‘नो प्लानिंग। बस बी रेडी। होली की खुमार आंखों में भर कर उस रंगीन दिन को वेलकम कीजिए, बाकी सब अपने आप मौका और दस्तूर बनता रहेगा।’’  होली की बातें आगे बढ़ी तो मैंने पूछा, ‘‘बचपन की होलियों की याद है?’’ जिसपर परिणीति की खूबसूरत आँखों में मासूमियत की चंचलता उभर आई, वे बोली, ‘‘बचपन की होली की याद करती हूं तो वह दिन याद आते हैं जब मैं अपने कमरे में होली के दिन छुप जाया करती थी क्योंकि मुझे अपने चेहरे पर रंग लगवाना बिल्कुल पसंद नहीं था। आई हेटेड इट, होली के हुजूम में जब मेहमान घर में आते थे तो सबसे पहले मैं अंदर भगती थी और ऐसी जगह छुप जाती थी की ढूंढना मुश्किल होता था,  मैं बस होली की हुड़दंग की आवाज सुनते ही छुपने की जगह ढूंढती रहती थी। आश्चर्य की बात है, आज बतौर एक्ट्रेस रोज मुझे अपने चेहरे पर रंग यानी मेकअप लगाना पड़ता है। लेकिन अब  बचपन की तरह होली से दूर नहीं भागती हूँ, फिल्मों के लिए भी होली के दृश्य देना पड़ता है। इट इज ओके विद मी नाउ। लेकिन किसी चीज की टू मच, थ्री मच और मगरमच्छ अच्छी नहीं लगती। मैं होली कम समय के लिए सूखे रंगों से खेलना पसंद करती हूं। हां यह त्यौहार देसी मिठाइयों का त्यौहार है और अपने फैमिली और फ्रेंड्स से मिल बैठने का त्यौहार है। सो गायेज, हैव ए नाइस एंड सेफ होली।’’


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Mayapuri

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