मूवी रिव्यू: दर्शक को आकर्षित करने में नाकाम ‘मोह माया मनी’

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अति महत्त्वाकांक्षा आदमी को क्या कुछ बना देती है। यहां तक कि वो अपराध करने तक से नहीं चूकता। लेकिन ऐसे शख्स का अंत क्या हो सकता है। यही सब निर्देशक मुनीश भारद्वाज ने अपनी फिल्म ‘मौह माया मनी’ में बताने की कोशिश की है।

फिल्म में रीयल स्टेट से संबधित एक कंपनी में काम करने वाला रणवीर शौरी बहुत शातिर दलाल है उसकी महत्वाकांक्षा है कि वो मिडिल क्लास से छुटकारा पा जल्द से जल्द से अपर क्लास में पहुंच जाये। जबकि उसकी बीवी नेहा धूपिया एक चैनल में काम करने वाली अपनी मौजूदा मिडिल क्लास लाइफ से पूरी तरह खुश है इसलिये वो अपने पति से इत्तफाक़ नहीं रखती। उधर रणवीर का ये हाल है कि  वो अपने लालच के तहत अपनी ही कंपनी को भी थूक लगाने से बाज़ नहीं आता। वो अपनी कंपनी के एक क्लाइंट को क्रास कर, एक फाइनेंसर से पचास लाख लेकर एक प्लॉट खरीदता है लेकिन इस बीच कंपनी में उसकी बेईमानी की पोल खुल जाती है लिहाजा उसे खड़े पैर नोकरी से निकाल दिया जाता है। अब उसके सामने सबसे बड़ी विकट समस्या ये है कि वो फाइनेंसर का पैसा कैसे लौटाये, क्योंकि प्लॉट मालिक ने उसे बयाना देने से मना कर दिया है। जान के डर से वो अपनी पत्नि के साथ अपनी मौत का नाटक रचता है। जिसमें उसे उसकी पॉलिसी के तहत इतना पैसा मिल सकता है जिससे वो फाइनेंसर के साथ साथ कार, फ्रिज आदि की इएमआई भी आसानी चुका सकता है। इस नाटक लिये उसे एक डैड बॉडी चाहिये। जब वो ऐसा नहीं कर पाता तो एक संघर्षशील फिल्म डायरेक्टर का खून कर उसे अपनी कार में बैठा कर उसका एक्सिडेंट कर देता है। इस बीच उसे पता चलता है कि उसकी बीवी का अफेयर तो पहले से उसके बॉस से चल रहा है इसलिये वो पॉलिसी के पैसे के साथ अपने बॉस के साथ उड़ने के लिये तौल रही है। बाद में रणवीर उसके बॉस को मार डालता है और नेहा रणवीर को।moh_maya_money

इस तरह की कहानियां इससे पहले भी बहुत दिखाई जा चुकी हैं। यहां कन्टेंट अच्छा था इसलिये जानी पहचानी कहानी के बावजूद फिल्म बौर नहीं करती। फिल्म की पटकथा चुस्त और करेक्ट कास्टिंग दर्शक की दिलचस्पी तो बनाये रखती है लेकिन उसे बांध नहीं पाती। कहानी का बैकग्राउंड दिल्ली और बेस रीयल स्टेट रखा गया है जो स्वाभाविक लगता है। निर्देशक मुख्य कलाकारों से बढ़िया काम करवाने में सफल है। फिल्म का म्यूजिक और बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के अनुरूप है।

रणवीर शौरी अपनी पिछली फिल्म तितली के बाद एक बार फिर बढ़िया परफॉर्मेंस देने में कामयाब रहे। नेहा धूपिया भी अपनी भूमिका में खूब जमी है तथा देवेन्द्र चौहान, विदूशी मेहरा तथा अशविश भट्ट ने इनका अच्छा साथ दिया।

परन्तु सब कुछ अच्छा होने के बाद भी फिल्म में ऐसी कोई खास बात नहीं जिसके सदके ये दर्शक को अपनी तरफ आकर्षित कर सके।


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Mayapuri

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