मूवी रिव्यू: रोमांचक दृश्यों वाली साधारण कहानी है ‘मोहेंजोदारो’

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रेटिंग***

भला हो अंग्रेजी का जिसने जिस प्रकार योग को योगा कर दिया उसी प्रकार मोहनजादड़ों को मोहेंजोदारो बना दिया। आशुतोष गोवारीकर की मेगा बजट फिल्म ‘मोहेंजोदारो’  इतिहास के काल्पनिक साक्ष्यो में लपेट कर एक आम प्रेम कहानी को उस काल के काल्पनिक परिवेश में चित्रित किया गया है।

कहानी

आमरी गांव के किसान दुर्जन सिंह यानि नितिश भारद्वाज और किशोरी शहाणे का बेटा सरमन यानि रितिक रोशन सपने में एक ऐसे हिरन को देखता है जिसके माथे पर एक सींग है वो जानवर उसे किसी का चीज का प्रतीक जान पड़ता है। दूसरे दुर्जन सरमन को मोहेंजोदारो शहर जाने से हमेशा रोकता है लेकिन एक दिन उसकी हठ पर उसे झुकना पड़ता है। सरमन मोहेंजोदारो जैसे शहर को पहली दफा देखता है वहां उसे दुमंजले घर, हाट और काफी कुछ पहली बार दिखाई देता है। उसी दौरान उसकी मुलाकात शहर के पुजारी यानि मनीष चौधरी के बेटी चानी यानि पूजा हेगड़े से होती है। दोनों कई मुलाकातों के बाद एक दूसरे को प्यार करने लगते हैं। दूसरी तरफ हड़प्पा से भ्रष्टाचार की वजह से निकाला गया क्रूर और भ्रष्ट प्रशासक माहम यानि कबीर बेदी मोहेंजोदारो आकर अपनी कुसित चालों से वहां का शासक बन जाता है। उसने अपने लालच और हड़प्पा से बदला लेने के लिये लोगों पर करो का बोझ लाद रखा है। उसने बचपन में ही पुजारी की बेटी चानी से अपने बेटे मुंजा यानि अरूणोदय सिंह की शादी तय की हुई है क्योंकि चानी को पैदा होने के साथ बताया गया था कि वो बड़ी होकर एक विलक्षण लड़की बनने वाली है । एक बार तो सरमन वहां चल रहे लोभ लालच को देख अपने गांव लौट जाना चाहता है लेकिन बाद में चानी का प्यार उसे रोक लेता है। धीरे धीरे सरमन माहम द्धारा किये जा रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा हो जाता है। बदले में उसे प्राणदंड मिलता हैं लेकिन वो बकर और जोकार जैसे नरभक्षी खूनी दरिंदो को हराकर चानी और अपने प्राणों को जीत लेता है। एक दिन उसे पुजारी से पता चलता है कि असल में वो मोहेंजोदारो के पहले शासक सुरजन का बेटा है जिसे माहम ने अपनी चालाकी से मरवा दिया था। इसके बाद सरमन अपने साथ मोहेंजोदारो की जनता को लेकर न सिर्फ मुंजा का सफाया करता है बल्कि माहम को भी उसकी करनी की सजा देता है। फिल्म में बताया गया है कि इसके बाद मोहेंजोदारो सिन्धु नदी के आगोष में समा गया था और मोहेंजोदारो के लोग बाद में नदी किनारे ही बस गये थे जिसे बाद में गंगा बनी।mohenjodarofilm-

 निर्देशन

आशुतोष ने हमेशा की तरह इस बार भी बड़ा ही सोचा लेकिन इस बार उनके पास पौराणिक लेकिन काल्पनिक सोच तो थी लेकिन एक अच्छी कहानी नहीं थी क्योंकि उस वक्त की कहानी और आज की प्रेम कहानी में जरा भी फर्क नहीं है। वही प्रेम करने का तरीका,जिसमे चुंबन सहित वहीं पुराने फार्मूले। बेशक मोहेंजोदारो को उन्होंने अपनी कल्पना शक्ति से काल्पनिक जबरदस्त और प्रभावशाली रूप तो दे दिया लेकिन उस समय का कोई साक्ष्य न होने के तहत उन पर कोई रोक टोक नहीं थी इसलिये उन्होंने किरदारों के लुक पर कुछ ज्यादा काम नहीं किया। परन्तु विशाल सेट और अंत में बड़े और भीषण दृष्य रोगंटे खड़े कर देने में सक्षम हैं।  उन्हें देखते हुये कहीं न कहीं बाहुबली की याद भी आती है। अंत में, आशुतोष इस बार मोहेंजोदारो में अच्छी कहानी नहीं जोड़ पाये।mohenjodaro

अभिनय

रितिक रोशन सरमन की भूमिका में कुछ नया इसलिये नहीं दे पाते क्योंकि भूमिका में उनके लिये कुछ भी नया करने के लिये नहीं था बावजूद एक्शन दृश्यों में वे कुछ कमाल कर ही जाते हैं। पूजा हेगड़े के लिये सुदंर लगने के अलावा खास कुछ करने के लिये नहीं था। कबीर बेदी अपनी पर्सनेलिटी और भारी भरकम आवाज से अपनी भूमिका को प्रभावशाली बना देते हैं लेकिन अरूणोदय सिंह अपनी भूमिका में नहीं जमे। एक अरसे बाद नितिश भारद्वाज को देखना सुखद लगा। मनीष चौधरी हमेशा की तरह इस बार भी पुजारी की भूमिका को बढ़िया आकार दे जाते हैं। किशोरी शहाणे व सुहासिनी मूले भी ठीक रही।Mohenjo-Daro-Song

संगीत

ए आर रहमान के संगीत में सरसरिया तथा तू है आदि गीत अच्छे हैं।

क्यों देखें

जबरदस्त रोगंटे खडे़ कर देने वाले दृश्यों और जबरदस्त विजुअल्स के लिये फिल्म देखने लायक है।


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Mayapuri

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