INTERVIEW: ‘‘इस बार मुझे ऐसी कहानी की तलाश थी जो यूथ को कनेक्ट कर सके’’ – निर्देशक मोहित सूरी

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विक्रम भट्ट के ए डी के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले मोहित सूरी बहुत जल्दी, बहुत छोटी उम्र में स्वतंत्र निर्देशक बन गये थे। पहली फिल्म जहर के बाद वह अभी तक ग्यारह फिल्में निर्देशित कर चुके हैं जिनमें राज, आवारगी, मर्डर  2, आशिकी 2 तथा एक विलन प्रमुख हैं। रोमांटिक फिल्मों के मास्टर मोहित की अगली फिल्म का नाम है ‘हाफ-गर्लफ्रेंड’। हाल ही में इस फिल्म के ट्रेलर लांच पर उपन्यासकार चेतन भगत -जिनकी  बुक पर आधारित है ये फिल्म- द्वारा मोहित से पूछे गये सवाल इस प्रकार थे।

 मोहित क्या आपने हाफ गर्लफ्रेंड बना ली?

मैंने पूरी कोशिश की है कि फिल्म अच्छी बने। रही मेरी पर्सनल हाफ गर्लफ्रेंड की तो उसके बारे में मैं अभी कुछ नहीं बता सकता, क्योंकि मेरी बीवी अभी ऑडियेंस में बैठी है ।shraddha kapoor_mohit suri

मोहित, हर साल एक फिल्म बनाते हैं, अभी तक ग्यारह फिल्में बना चुके है। लेकिन इस फिल्म को बनाने में उन्होंने तीन साल लगा दिये। क्यों ?

मैं इस बार एक ऐसी कहानी की तलाश में था जो यूथ को कनेक्ट कर सके, जहां सिर्फ हंसी मजाक नहीं बल्कि कुछ ऐसे भी रिश्ते होते हैं जो आधे अधूरे रह जाते हैं। मुझे याद है जब मैं किसी से प्यार करता था तो मुझे यही सुनने को मिलता था कि हम सिर्फ दोस्त हैं। ये सुनकर मुझे बहुत बुरा लगता था। इस किताब की बात की जाये तो इसमें सिर्फ टाइटल ही नहीं बल्कि वो कॉपंलेक्स रिलेशनशिप भी थी। आज यूथ को हम देखते हैं जिनमें बहुत से एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं लेकिन उनसे अच्छी तरह कनेक्ट नहीं हो पाते। अब या तो ये टेक्नॉलिजी की वजह से या सोशल सोसाइटी हमें एक्सपेक्ट नहीं करने देती। मैंने फिल्म में इस रिश्ते को पूरा करने की कोशिश की हूं।

आम कहानी और किताब पर फिल्म बनाने में क्या फर्क है?

चूंकि ये बुक पर फिल्म है इसीलिए मुझे इसे बनाने में तीन साल लगे। दरअसल ये काफी पॉपुलर बुक है इसलिए मुझे देखना था कि इसमें क्या बदलाव करने हैं क्या रखना है और क्या निकालना है, जिन्होंने किताब पढ़ी है उन्हें किताब में क्या अच्छा लगा फिल्म में वो सब उन्हें अच्छा लगेगा या नहीं। इन सब पर सोचना और फिर लिखना बहुत मुश्किल था, पूरी किताब को दो घंटे की फिल्म में दिखाना टेढ़ी खीर था, वैसे भी ये कहानी बहुत मुश्किल थी क्योंकि ये एक दो साल की नहीं बल्कि तेरह साल की जर्नी थी एक लड़के और लड़की की, जो बार बार मिलते हैं, अलग अलग जगहों पर मिलते हैं, फिर वो चाहे न्यूयॉर्क हो, बिहार हो या  दिल्ली हो, इसलिए मुझे सिर्फ कहानी लिखने में ही तीन साल लग गये। इसके लिये मैं अपने को-राइटर तुषार और निशिता का आभार प्रकट करना चाहूंगा ।

इस बार अर्जुन कपूर को भोजपुरी बोलना था, सिर्फ बोलना ही नहीं बल्कि इमोट भी करना था, इमोशन भी करेक्ट आना चाहिए था, सिर्फ रट कर नहीं बोलना था। ये आप कैसे कर पाये?

देखिये जो भी किताब का थीम था, उसके मुताबिक प्यार की कोई भाषा नहीं होती। ओबिसयली हमने फिल्म में इसीलिए भोजपुरी को रखा है। श्रद्धा कपूर का किरदार इंगलिश और हिन्दी का मिक्सचर है जिसे आजकल के युवा हिंगलिश कहते हैं। अर्जुन ने भोजपुरी सीखने में काफी मेहनत की, आप फिल्म में देखेंगे कि जब भी अर्जुन भोजपुरी बोलता है तो उसका एक्सेंट कितना करेक्ट होता था।Mohit suri

आपकी फिल्म का म्यूजिक बहुत मैलोडियस होता है। इतने बढ़िया और मीठे गाने कहां से चुराकर लाते हो ?

मैं कभी ऐसा नहीं सोचता कि मेरा म्यूजिक बढ़िया हो और न ही मुझे म्यूजिक की इतनी ज्यादा समझ है। मैं एक बात मानता हूं कि मेरा म्यूजिक तभी अच्छा होगा जब मेरी स्क्रिप्ट अच्छी होगी और मेरे सारे गाने सिचवेशनल होंगे। यहां मेरी एक ही जज है जो हमेशा मेरी फिल्म के म्यूजिक के लिए बहुत क्रिटिकल है वो है मेरी पत्नी उदिता गोस्वामी। वही मेरा म्यूजिक सुनने के बाद बताती है कि वो किस हद तक अच्छा है।


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Mayapuri

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