मौनी बाबा प्रेमनाथ

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Young-Prem-Nath

मायापुरी अंक 11.1974

फिल्म “सन्यासी” की शूटिंग के समय प्रेमनाथ टकरा गए। वह अपने निजी जीवन में भी सन्यासी ही बने रहते है। रंजीत, सुनीलदत्त आदि उनकी मंडली के लोग है। गेरवे कपड़े और हारमूनियम उनके जीवन के अंग बन गए है। पीने के पश्चात वह भोजन गाने बैठ जाते है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसा सन्यासी फिल्म वालों को बड़ा तंग करता है। कोई नही जानता कि प्रेमनाथ की कब किस मूड की घंटी बज जाए और अपने मूड में क्या हरकत कर बैठे।

प्रेमनाथ को एक विशेष मुद्रा में मोन बैठे देख कर हमने औपचारिक बातों से सिलसिला शुरू करके पूछा।

“कहते है आप दिन व दिन अपनी कीमत बढ़ाते चले जा रहे है। कहते है कि आपकी फिल्में आपके कारण ही हिट होती है। क्या यह दुरुस्त है ?

“मैंने ऐसा दावा कभी नही किया और न कर सकता हूं फिल्म में अकेले किसी का भी कुछ नही होता यह तो सब की मिली जुली कोशिशों का फल होता है। आदमी का भाग्य और उसकी नियत ठीक हो तो फिल्म जरूर हिट होती है। अगर मैं अकेला फिल्म को हिट कर सकता तो चट्टान सिंह तो सुपर हिट होनी चाहिये थी क्यों कि उसमें मेरे सिवा कोई नही था। लेकिन अच्छी फिल्म बनने के बावजूद वह नही चली। यह निर्माता का दुर्भाग्य ही तो है। प्रेमनाथ ने कहा।

“यह तो इन्डस्ट्री है यहां दो आदमी किसी की तारीफ करेंगे तो एक बुराई जरूर करेगा। कलाकार तो मूडी होता है मैं भी मूडी हूं कुछ कमियां हो सकती है। किन्तु जो कुछ भी मैं हूं वह सब जानते है। जानने बूझने के पश्चात भी वह अगर ऐसा कहते है तो यह उनकी ज्यादती है। अभिनेत्रियों की मैं इज्जत करता है। अगर कोई कहती है तो गलत कहती है, प्रेमनाथ ने कहा।


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Mayapuri

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