मूवी रिव्यू: साइक्लॅाजिक्ल क्राइम की नई परिभाषा ‘मूडस ऑफ क्राइम’

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रेटिंग**

आजकल अधिक धन कमाने की आपाधापी में बड़े लोगों के बच्चे प्यार और अपने पेरेन्टस से अलग रहते हुए क्या कुछ कर बैठते हैं या कुछ सोच लेते हैं। यहां तक वे क्राइम तक कर बैठते हैं। ये प्रोड्यूसर डायरेक्टर सुनील शाह ने फिल्म ‘मूडस ऑफ क्राइम’ में दिखाने की कोशिश की है।

कहानी

डॉक्टर मां बाप की इकलौती औलाद एयाज अहमद दुबई से पढ़ने के लिये मुबंई्र आया हुआ है। उसे मां बाप के हमेशा व्यस्त रहने के बदौलत उनके साथ रहने का जरा भी अवसर नहीं मिलता। इसी प्रकार उपेखा जैन भी अपने नशेड़ी भाई और मां बाप से परेशान हो लगभग साइको हो चुकी है। दोनो दोस्त है। वे कालेज में अनिमा पगारे से साइक्लॉजिकल क्राइम पढ़ रहे हैं। एक दिन दोनों सोचते हैं कि साइक्लॉजिकल क्राइम को थ्यौरी के बजाये प्रैक्टिकल करके देखें। इसके बाद वे बाकायदा पहले छोटा मोटा क्राइम करते हुए उसके बाद होने वाला रोमांच महसूस करना चाहते हैं। बार बार ये करते हुये एक दिन वे पकड़े जाने से बाल बाल बचते हैं इसके बाद वे सब कुछ अपनी प्रोफेसर को बताने उसके घर जाते हैं। किसी काम से उपेखा जैन के बाहर जाने के बाद एयाज बार बार अपनी प्रोफेसर की बेरूखी से तिलमिला कर उसका रेप कर देता है। बाद में अचानक उपेखा के हाथों एयाज मारा जाता हैं इसके बाद उपेखा भी सुसाइट कर लेती है।

निर्देशन

फिल्म का निर्देशक बेसिकली बिजनेसमैन है लेकिन फिल्म मेकिंग के शौक के चलते उसने ये फिल्म बनाई है। हाइलाईट ये हैं कि दो इस दो घंटे की फिल्म का बजट मात्र पचास लाख है। इससे निर्देशक की दूरदर्शिता साबित होती है। फिल्म में आज मां बाप से निराश यंग जनरेशन का डिप्रेशन दिखाया गया है। लिहाजा उन्हें पता ही नहीं कि वे आखिर चाहते क्या हैं। उनकी टेंशन का एक उदाहरण कि टैंस हो उपेखा कभी तो एयाज को सेक्स करने के लिये आमंत्रित करती हैं तो कभी रेप करने के लिये। दरअसल वे चारी, हेराफेरी तथा हिंसा और रेप जैसे अपराधों को स्वंय महसूस करना चाहते हैं। लेकिन अपने प्रयोग के चलते अंत में दोनो मर जाते हैं लेकिन उसके बाद निर्देशक द्धारा दर्शाया गया सस्पेंस हजम नहीं होता। फिल्म थोड़ी लंबी हैं उसे छोटा किया जा सकता था।

अभिनय

फिल्म में कुल मिलाकर तीन मुख्य कलाकार हैं। उपेखा जैन और एयाज अहमद टीवी सीरियल्स के कलाकार हैं। तीसरी कलाकार अनिमा पगारे जिसने प्रोफेसर का रोल किया है। तीनों ही लगभग अपनी भूमिकाओं में ठीक रहे। फिल्म में गीत संगीत नहीं है।

क्यों देखें

सेक्स और क्राइम पर बनी लेकिन नये विशयों पर बनी फिल्मों के शौकीन दर्शक ये फिल्म देख सकते हैं।


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Mayapuri

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