मुझे निर्माता तंग करते है – मौसमी चटर्जी

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mausami

 

मायापुरी अंक 17.1975

मौसमी चटर्जी हिन्दी फिल्मों की उन अभिनेत्रियों में से हैं जो बिना किसी फिल्म के प्रदर्शित हुए ही स्टार बन गईं। हालांकि हिन्दी फिल्मों में आने से पूर्व मौसमी बंगला फिल्मों में काम कर चुकीं थी। ‘देवी’ उनकी वह बंगला फिल्म है जिसमें मौसमी का अभिनय अपनी चरम सीमा पर है।

मौसमी के संबंध में एक बात और भी कही जा सकती है कि उन्हौंने फिल्मों में आने से पहले ही शादी की और फिर फिल्मों में सफलता पा कर यह साबित कर दिया कि कुशल अभिनेत्री के लिए शादी रूकावट की चीज नही है।

हाल ही में मौसमी से मेरी मुलाकात ‘दि चीट’ के सेट पर हुई। मैनें पूछा ‘’एक अभिनेत्री के करियर पर शादी का कितना असर होता है ?

“मेरा ख्याल तो यह है कि एक शादी शुदा स्त्री को फिल्मों में काम ही नही करना चाहिए। अभिनेत्री पर शादी का असर नही पड़ता लेकिन एक शादी शुदा स्त्री पर फिल्मों का काफी असर पड़ता हैं। बेकार के स्कैंडल उसकी घरेलू जिंदगी को बर्बाद कर सकते हैं।

“क्या यह सच है कि आपकी घरेलू जिंदगी सुखी नही है?

नही, यह झूठ है। हां छोटी मोटी बातें तो हर घर में होती हैं। मेरे घर में तो वह भी नही होती। मेरे हसबैंड बेहद सीधे-सादे आदमी हैं। वे कभी मुझे किसी काम के लिए रोकते नही।“

किसी गैर मर्द से दोस्ती बढ़ाने से भी नही ?

हां, क्योंकि उन्हें मुझ पर पूरा विश्वास है। हमारे बीच काफी अंडरस्टेडिंग हैं।

“लोग कहते हैं कि आपके पति रितेश कुमार और ससुर हेमंत कुमार ने आपको पैसे कमाने की मशीन बना रखा है ?

“गलत, एकदम गलत एक स्त्री के लिए अपने पिता और पति के बारे में ऐसा सोचना भी पाप है। मेरे ससुर जी को हर माह उनके गीतों से ही इतनी रॉयल्टी मिलती है कि उन्हें मुझ पर डिपेंड होने की जरा भी जरूरत नही हैं। अब मेरे पति भी प्रोड्यूसर बन गए हैं।

“विनोद मेहरा के साथ आपका नाम जिस रूप में लोग जोड़ते हैं, इस बारे में आप क्या कहती हैं?

“विनोद के साथ हमारे संबंध को जो भी हैं, ये बिल्कुल घरेलू हैं! उनका संबंध रितेश के साथ मेरी शादी से भी पहले का है। हमारे और विनोद के संबंधो मे जरा सा भी स्वार्थ नही है। इसीलिए लाख स्कैन्डल के बाद भी आज विनोद हमारे घर आते हैं।

जब कुछ है ही नही तो हमें डर किस बात का मौसमी ने बहुत आत्मविश्वास से कहा।

“क्या यह सच है कि विनोद मेहरा की सिफारिश पर ही शक्ति सामंत ने आपको ‘अनुराग’ में अंधी लड़की वाली भूमिका दी थी ? मैंने अगला प्रश्न दागा। इस पर मौसमी थोड़ा चिढ़कर बोलीं

“आप मुझसे इस तरह के पर्सनल सवाल क्यों पूछे जा रहे हैं ? मैं नही, आपके फैन पूछ रहे हैं। जो आपकी फिल्मों के लिए पैसे खर्च करते हैं। वे आपकी पर्सनल लाइफ के बारे में ही ज्यादा जानना चाहते हैं। वे जानना चाहते है कि क्या वास्तव में विनोद की सिफारिश आपको फिल्मों में लाई या आपका टैलेंट लाया ?

हूं, तो सुनिए फिल्मों में मुझे विनोद मेहरा नही, मेरा टैलेंट लाया। शक्ति सामंत ने ‘अनुराग’ में मुझे साइन करने से पहले मेरी फिल्म ‘देवी’ थी। उन्हें मेरा काम पसंद आया इसलिए ‘अनुराग’ में मुझे ले लिया। एक आर्टिस्ट को किसी की सिफारिश की जरूरत नही पड़ती।

“कुछ कुछ सुना है आप अब अपने निर्माताओं को तंग करने लगी हैं ?“और निर्माता जो मुझे तंग करते हैं, वह आपने नही सुना प्यार और तकरार किस बिजनैस में नही होती।

“मां बनने के बाद आपको कैसा महसूस हुआ ?

“इसे बताने के लिए शब्दों का सहारा नही लिया जा सकता। यह सिर्फ अहसास करने वाली खुशी है। मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि मां बनना स्त्री के लिए बहुत बड़े भाग्य की बात है। अब तो मुझे लगता है कि मेरी बेटी ही इस दुनिया की सबसे बड़ी खुशी है।

“और बेटी के पप्पा ? मैनें मुस्कुरा कर पूछा।

“वो तो हैं ही। स्त्री के लिए पति भी उतने ही जरूरी हैं, जितनी कि औलाद।

“क्या आप अपनी बढ़ती लोकप्रियता और सफलता से सुखी हैं, खुश हैं?

“कौन खुश होगा। वैसे कभी कभी इतनी ज्यादा बिजी हो जाती हूं कि बेटी से प्यार करने का भी वक्त नही मिलता, तब मुझे बड़ा दुख होता

है। मन में आता है फिल्में छोड़ छाड़ कर घर में रहूं। रितेश जी की देखभाल करूं बेटी से खूब प्यार करती रहूं। मगर अब जिसे देखो वही कह रहा है मौसमी अब तुम्हारा मौसम आया है। तुम्हें दिखा देना चाहिए कि तुम्हारे अंदर अभिनय की कितनी रोशनी है। एक तरफ घर है, दूसरी तरफ फिल्में और मैं बीच में खड़ी हूं। कई बार अकेले में सोचती हूं मैं क्या हूं, कहां हूं ? इसीलिए मैनें आपसे कहा था कि एक स्त्री अभिनेत्री बनने के बाद घर और फैमिली की जिम्मेदारियों को पूरी तरह कभी नही निभा सकती ना घर के सुख ही उसे नसीब हो सकते। इसीलिए मेरा कहना है कि शादी शुदा औरत को कभी एक्ट्रेस नही बनना चाहिए क्योंकि घर की चार दीवारी और फिल्मों की दुनियां के बीच एक बड़ा फांसला है जिसे तय करना हर स्त्री के लिए सम्भव नही।

इसी बीच मौसमी को शूटिंग के लिए बुलावा आ गया। मैंने भी उनसे विदा ली।

 


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Mayapuri

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