मूवी रिव्यू: एक भूत की दिल छू लेने वाली प्रेमकथा ‘फिल्लौरी’

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रेटिंग****

अनुष्का शर्मा के बैनर की दूसरी फिल्म ‘फिल्लौरी’, जिसे निर्देशित किया लेखक निर्देशक अंशय लाल ने। फिल्म में दो युगों की प्रेम कथा बड़े प्रभावशाली ढंग से दर्शाई गई है।

कनाडा से आये सूरज शर्मा की शादी महरीन कौर पीरजादा से तय हुई है लेकिन चूँकि सूरज मंगली है लिहाजा पंडित का कहना है की मंगल दोष उतारने के लिए पहले उसकी शादी पीपल के पेड़ से करवानी पड़ेगी। सूरज आज का युवक है इसलिये वह इन सब बातों को नहीं मानता, लेकिन परिवार के दबाव में उसे वो सब करना पड़ता है। घर आने के बाद उसे अनुष्का यानि फिल्लौरी का भूत दिखाई देता है। पहले तो सूरज डर जाता है लेकिन बाद में फिल्लौरी उसे बताती है की जिस पेड़ से उसकी शादी हुई है वो उसी पेड़ पर रहती है लिहाजा उसकी शादी उसके साथ हो चुकी हैं। अब या तो वो उसे वापिस उसी पेड़ पर पहुंचा कर आये वरना वो यहीं रहेगी। तब सूरज उसे बताता है की उस पेड़ को तो काट दिया है। इस तरह फिल्लौरी वहीं रहने लगती है लेकिन वो किसी को जरा सा भी नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती और वो सिर्फ सूरज को  दिखाई देती है। सूरज चूँकि थोडा नशा करता है लिहाजा परिवार वाले उसे भूत दिखाई देना उसकी सनक मानते थे। जिस दिन सूरज की सगाई हो रही है, उसे देखते हुये फिल्लौरी को अपनी प्रेम कहानी याद आती है। जो नब्बे साल पुरानी है। जब अनुष्का यानि शशि फिल्लौर गाँव में रहती थी और वो फिल्लौरी नाम से गीत लिखती थी। उसके गीत काफी पॉपुलर थे। उसी गाँव में दिलजीत सिंह दोसांझ भी रहता है जो एक सस्ते गीत गानेवाला सस्ता सा सिंगर है। एक बार दोनों मिलते हैं तो दिलजीत शशि के सामने बड़ाई मारते हुये कहता की वही वो गीतकार है जो फिल्लौरी नाम से लिखता है। ये सुन शशि उसे काफी बुरा भला कहती है और इसके बाद लिखना बंद कर देती है। बाद में जब दिलजीत को असलियत का पता चलता है तो वो काफी शर्मिंदा होता है और अपने आपको पूरी तरह बदल लेता है। शशि का भाई जो एक वकील है स्वाभाव से काफी कड़क आदमी है, दिलजीत उसे जरा भी पसंद नहीं। एक दिन उसे पता चलता है की दिलजीत शशि को चाहता है तो गुस्सा हो वो दिलजीत की पिटाई कर देता है। इसके बाद दिलजीत अमृतसर चला जाता है और वहां फिल्लौरी के लिखे गीत गाकर मशहूर हो जाता है। इसके बाद वो 300 रूपये का मनीआर्डर फिल्लौरी के नाम भेजता है। उसकी ईमानदारी देख फिल्लौरी का भाई दिलजीत से बहुत प्रभावित होता है और वो अपनी बहन से उसे शादी करने की इजाज़त दे देता है। शादी की तारीख तय होती है बैसाखी के दिन। निर्धारित दिन सब तैयारियां है लेकिन दिलजीत नहीं आता और न ही उसकी कोई खबर आती। बाद में पता चलता है की शशि प्रेग्नेट है। यहाँ उसका भाई उसकी काफी मदद करता है लेकिन इस बीच शशि आत्महत्या कर लेती है। कहानी एक बार फिर वर्तमान में आती है, तो इस बार सूरज फिल्लौरी की प्रेम कथा का वक्त और जगह के बारे में पता करता है ,उसके बाद वो अपनी बीवी के साथ अमृतसर आता है, उनके साथ फिल्लौरी भी है वहां वे उस जगह जाते हैं जिसे जलियाँ वाला बाग़ कहा जाता है। फिल्लौरी को अचानक वहां दिलजीत की आत्मा मिल जाती है और वो बताती है की वो उस दौरान अपने संगीत कार के साथ जलियांवाला बाग़ में भाषण सुनने गया था लेकिन वहां अंग्रेजो की गोलियों का शिकार बन गया था। इस तरह बाद में फिल्लौरी दिलजीत और सूरज महरिन दो लव स्टोरी कम्पलीट हो जाती हैं।  phillauri-trailer-647_

कुछ इसी तरह की कहानी पर आधारित फिल्म मिर्ज़िया भी आई थी लेकिन निर्देशक वहां दोनों कहानियों को मिक्स नहीं कर पाया था और न ही उसमें सवेद्नाएं थी जो इस फिल्म में हैं, जबकि अंशय लाल की ये पहली फिल्म है लेकिन उसने बहुत खूबसूरती से दोनों कहानियों का मेल करवाया है। फिल्म की गति कई बार मध्यम होती है लेकिन इसका असर न तो दर्शक पर होता है और न ही फिल्म पर। कास्टिंग फिल्म की यूएसपी कही जा सकती है। पंजाबी संस्कृति को जोड़ती लोकेशन हैं तथा फिल्म का संगीत जैसे कहानी में गुथा हुआ है।dumdum-phillauri-anushka

पहला नंबर अनुष्का का है क्योंकि वो जितनी बेहतरीन अदाकारा है. उतनी ही समझदार निर्मात्री भी है। एक भूत की भूमिका को उसने प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी है। उड़ता पंजाब के बाद एक बार फिर  दिलजीत सिंह दोसांझ ने इतना शानदार अभिनय किया है की वे अनुष्का के साथ कई बार दर्शकों को रुला जाते हैं। इसके बाद सूरज शर्मा और नयी अभिनेत्री महरिन कौर पीरजादा का काम भी देखने लायक है तथा छोटे से रोल में रजा मुराद अच्छे लगते हैं।

एक अरसे बाद ऐसी दिल को छू देने वाली प्रेमकथा देखने को मिली जो एक भूत की है लिहाजा फिल्म को हर स्टेट में टैक्स फ्री कर देना चाहिए, जिससे फिल्म तक हर दर्शक की पहुँच बन सके।


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Mayapuri

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