मूवी रिव्यू: हॉलीवुड फिल्म गॉडफादर को याद करने पर मजबूर करती है फिल्म पॉवर

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Power VS The Godfather

पॉवर में हमें एक और गैंगवार पर बनी कहानी देखने को मिलती है जहाँ फैमिली में ही डॉन प्रथा चल रही है और उनके मुख़ालफ़त गैंग से झगड़े चलते रहते हैं।

हक़ीक़तन, ‘पॉवर’ जो OTT प्लेटफॉर्म Zeeplex पर रिलीज़ हुई है; वह मुंबई अंडरवर्ल्ड  और उसके इर्द-गिर्द घूमती नज़र आती है जहाँ, कालिदास ठाकुर जिसे सब दादा कहते हैं (महेश मांजरेकर) अपने भरोसेमंद गुर्गे अनवर (ज़ाकिर हुसैन), अपने बेटे रामदास (जीशु सेनगुप्ता) और रामदास के साले (प्रतीक बब्बर) के साथ एक क्राइम सिंडिकेट, किसी बिजनेस की तरह चलाता है।

ज्योति वेंकटेश

विद्युत् जामवाल सिंगापुर से वापस आता है और अपनी बचपन की मुहब्बत श्रुति हसन से मिलता है

Vidyut jamal and Shruti hassan

इसके तुरंत बाद ही, कालिदास का छोटा बेटा देवीदास ठाकुर (विद्युत् जामवाल) सिंगापुर से वापस आता है और अपनी बचपन की मुहब्बत और अनवर की बेटी परी, जिसका पूरा नाम परवीन है (श्रुति हसन) से मिलता है।

एक ही परिवार में तकरीबन सारे ही क्रिमिनल मेंबर्स की ज़िन्दगी तब ख़तरे में पड़ जाती है जब दूसरे गैंग के गुंडे मिलकर देशभक्त कालिदास ठाकुर और उसके छोटे बेटे देवीदास पर एक आत्मघाती हमला करते हैं।

इसके बाद ये पूरा परिवार मिलकर किस तरह ट्विस्ट एंड टर्न्स के बाद इन मुसीबतों से जूझता है वो देखने के बाद ही पता चल सकता है।

फिल्म का मैसेज बहुत क्लियर है और फिल्म देखने के बाद ज़हन में काफी देर तक बरक़रार रहता है कि नफ़रत किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

फिल्म का मुद्दा बिलकुल सही है लेकिन कहानी को बताने का तरीका बिलकुल भी सही नहीं है

Vidyut jamal, Shruti hassan and Mhesh manjerekar

फिल्म का मुद्दा बिलकुल सही है लेकिन कहानी को बताने का तरीका बिलकुल भी ऐसा नहीं है जो दर्शकों को कन्विसिंग लगे।

पहले सीन के आने के बाद से ही सिर्फ और सिर्फ इमोशनल ड्रामा या हाई-फाई एक्शन तक सीमित कहानी आपको बांधे रखने में नाकाफी रहती है।

हाँ इतना ज़रूर है कि विद्युत जामवाल एयर सलिल अंकोला के एक्शन सीक्वेंस बहुत ज़बरदस्त लगते हैं और दर्शकों को कुर्सी कस के थाम लेने पर मजबूर करते हैं।

एक्टिंग की बात करें तो, विद्युत जामवाल ने अपनी तरफ से अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने करैक्टर के मुताबित शांत और कैलकुलेटिव होकर देवीदास का किरदार निभाया है।

विद्युत का ये करैक्टर गॉडफादर के माइकल कर्लिओने (ये किरदार अल पचीनो ने निभाया था) का देसी वर्शन है और विद्युत जैसे टॉप एक्शन स्टार की एक्टिंग और एक्शन टेक्नीक को इस करैक्टर ने खुलने का पूरा मौक़ा दिया है।

श्रुति हसन का रोल एक ऐसी लड़की का करैक्टर था जो एक उदास सी लड़की है और उसे किसी समाज सुधारक हीरो का इंतज़ार है जो उसके दोषियों को सज़ा दे सके लेकिन श्रुति इस रोल में बिलकुल भी फिट नज़र नहीं आई हैं।

कुछ जगह ऐसा लगा है जैसे उन्होंने सोते-जागते ये करैक्टर प्ले किया है। महेश मांजरेकर दर्शकों से अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने में फिर कामयाब हुए हैं। विद्याधर जोशी को वेस्ट किया गया है, उनसे और बेहतर काम करवाया जा सकता था।

जीशु सेनगुप्ता ने जितनी बार मुंह खोला है उतनी बार गालियां बकी हैं

jisshu sengupta

जीशु सेनगुप्ता ने जितनी बार मुंह खोला है उतनी बार गालियां बकी हैं लेकिन एक एक्टर के रूप में वो अपना करैक्टर जस्टिफाई करते नज़र आये हैं।

राणा के करैक्टर में सचिन खड़ेकर भी अच्छे लगे हैं वहीं सुधांशु पांडेय ने अपना रोल बेहतरीन निभाया है। प्रतीक बब्बर औसत नज़र आए हैं।

हालांकि अब वो समय है कि वो इन मीडियॉकर रोल्स से बाहर निकल अपने पिता राज बब्बर की तरह किसी अच्छे करैक्टर को कर अपनी एक्टिंग का प्रदर्शन करें।

सलिल अंकोला बिना किसी डायलॉग के भी अपने करैक्टर को सिर्फ बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशन के दम पर अच्छा निभा गए हैं।

कुलमिलाकर, मैं यही कहूंगा कि गॉडफादर के इस वर्शन को कम से कम एक बार तो देखा जाना चाहिए। इसके इफेक्टिव डायलॉग और एक्टर्स की बेहतरीन परफॉरमेंस इतना तो डिज़र्व करती ही है।

फिल्म का अकेला माइनस पॉइंट यही है कि फिल्म में एक दर्जन से भी ज़्यादा मराठी कलाकारों पर फोकस करने की कोशिश करती है।

प्रोड्यूसर -विजय गलानी  

डायरेक्टर – महेश मांजरेकर

स्टार कास्ट – महेश मांजरेकर, विद्युत जामवाल, श्रुति हसन, जीशु सेनगुप्ता, प्रतीक बब्बर, युविका चौधरी, सुधांशु पांडेय, विद्याधर जोशी, समीर धर्माधिकारी, मेधा मांजरेकर, मृण्मयी देशपांडे, भारत दाभोलकर, सचिन खेड़ेकर, सलिल अंकोला, ज़ाकिर हुसैन, गणेश यादव। 

जॉनर – सोशल/क्राइम ड्रामा

रेटिंग – **1/2 (Two and a half)


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Mayapuri

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