मूवी रिव्यू: एक्शन पैक्ड – ‘बागी’

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रेटिंग***

कितनी ही फिल्मों से ये साबित हो चुका है कि साउथ इंडियन फिल्मों में मनोरंजन का ज्यादा लाउड मसाला होता है। लिहाजा बॉलीवुड को साउथ की फिल्मों का चस्का लग चुका है। साजिद नाडियाडवाला निर्मित फिल्म ‘बागी’ भी एक तेलुगु फिल्म से प्रेरित मसालेदार एक्शन फिल्म है। प्रभाष तृषा की जोड़ी वाली इस तेलुगु फिल्म का बागी में बहुत कुछ है। यहां तक तकरीबन सारे किरदार भी।

कहानी

रॉनी (टाइगर श्रॉफ) को उसके मरहूम पिता अपने दोस्त मार्शल आर्ट के मास्टर शीपू शौर्य के पास कुछ बनने के लिये भेजते हैं। हमेशा बागी विचारों का रॉनी एक वक्त मास्टर से इस कदर प्रभावित हो जाता है कि बाद में उनका सच्चा शार्गीद बनकर दिखाता है। इस बीच उसे एक लड़की सिया (श्रद्धा कपूर) से प्यार हो जाता है लेकिन उसे देखते ही मार्शल आर्ट का चैंपियन और मास्टर जी का बेटा सुधीर भी चाहने लगता है। दरअसल सुधीर बैंकाक में गलत धंधे चलाता है वहां उसका बहुत बड़ा गैंग है। सुधीर श्रद्धा के लालची पिता सुनील ग्रोवर को पैसा देकर उसे शादी के लिये तैयार कर लेता है। जब इस गलत काम को करने से सुधीर के पिता मास्टर उसे मना करते हैं तो वह उन्हें जहर देकर मार देता है। इस बीच सुनील ग्रोवर रॉनी और सिया के बीच गलतफहमी पैदा कर दोनों को अलग करने में कामयाब हो जाता है और अपनी बेटी को लेकर कहीं और जाना चाहता हैं क्योंकि उसने एक फिल्म प्रोड्यूसर से उसकी फिल्म में अपनी बेटी को हीरोइन लेने के लिये भी पैसा लिया हुआ है। यानि वो सुधीर को भी चीट करना चाहता है लेकिन इसी बीच सुधीर श्रद्धा को किडनेप कर बैंकाक ले आता है। सुनील के कहने पर फिल्म प्रोड्यूसर रॉनी को श्रद्धा को वापस लाने के लिये फीस ऑफर करता है। रॉनी अपने दोस्त के बेटे के इलाज के लिये वो ऑफर स्वीकार कर बैंकाक आकर श्रद्धा से मिलता है तो उसके मिलने के बाद श्रद्धा को पता चलता है कि दोनों को अलग करने के पीछे उसके पिता की साजिश थी। बाद में रॉनी सुधीर और उसके गैंग को तबाह कर श्रद्धा को वापस लाने में कामयाब होता है।

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निर्देशन

फिल्म के राइटर डायरेक्टर सब्बीर खान की हीरोपंती भी तेलुगु फिल्म का रीमेक थी उसी प्रकार बागी भी एक तेलुगु फिल्म का रीमेक है। बस फिल्म में मार्शल आर्ट तथा चंद किरदार नये जोड़ दिये हैं। वरना तेलुगु फिल्म में प्रभाष और तृषा की जोड़ी को टाइगर और श्रद्धा ने रिपीट किया है तथा प्रकाशराज वाला रोल यहां सुनील ग्रोवर ने किया है। फिल्म में काफी फिल्मी लिबर्टी लेते हुये बड़ी आसानी से बेटे द्वारा मार्शल आर्ट योद्धा पिता को जहर देकर मरवा दिया जाता है। जिस बच्चे के इलाज के लिये टाइगर फिल्म प्रोड्यूसर से श्रद्धा को वापस लाने का सौदा करता है बाद में वो बच्चा पूरी तरह से भूला दिया गया। सबसे बड़ी बात कि इस बार निर्देशक का दावा हैं कि कहानी उन्होंने लिखी है जबकि उनका दावा पूरी तरह से झूठा है। बैंकाक की लाकेशंस पर फिल्माये गये एक्शन सीन्स प्रभावशाली हैं। लेकिन पटकथा ढ़ीली रही। लिहाजा फिल्म बेहद धीमी रफ्तार से आगे बढ़ती है जो अंत तक ऐसे ही रहती है।

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अभिनय

इसमें कोई दो राय नहीं कि टाइगर श्रॉफ बेहद मेहनती जुनूनी एक्टर है। एक्शन में बॉलीवुड में उसका सानी नहीं तथा डांस में वो रितिक रोशन से भी आगे निकलने का मादा रखता है। चाहे अभिनय हो, डांस हो या एक्शन उसने हर काम पूरी शिद्दत से किया है। फिल्म दर फिल्म श्रद्धा का ग्रोअप अच्छा लगता है। यहां उसने अपनी साधारण सी भूमिका को एक्शन और डांस से खास बनाने के लिये पूरी मेहनत की है। साउथ इंडियन फिल्म एक्टर सुधीर निगेटिव भूमिका में काफी जमा है उसके एक्शन सीन्स प्रभावित करते हैं। सुनील ग्रोवर अपनी निगेटिव भूमिका को कॉमेडी में तब्दील कर दर्शकों को हंसाने की कोशिश में एक हद तक कामयाब है। इसी तरह संजय मिश्रा भी हंसी के कुछ क्षण जुटाते हैं।

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संगीत

श्रद्धा कपूर द्वारा गाये गीत छम छम को छोड़कर कोई गीत उल्लेखनीय नहीं रहा।

क्यों देखें

टाइगर और श्रद्धा की फ्रेश जोड़ी तथा टाइगर और कुछ अन्य किरदारों द्वारा किये गये बेहतरीन एक्शन के लिये फिल्म देखी जा सकती है।

 


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Mayapuri

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